REET में कटऑफ से बाहर फिर भी मेरिट का मामला:अभ्यर्थी का आवेदन तो निरस्त, नंबर बढ़ाने वाले अधिकारियों पर नहीं हुई कार्रवाई

जयपुर7 महीने पहले

राजस्थान में रीट भर्ती परीक्षा को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। दौसा के कालूराम नाम के अभ्यर्थी का लेवल-1 की कटऑफ से बाहर रहने के बाद भी मेरिट में नंबर आ गया था। शिक्षा विभाग ने दोषी अभ्यर्थी का आवेदन तो निरस्त कर दिया। अब इस पूरे मामले के बाद विवाद इसलिए तेज हो गया है। क्योंकि जिस अभ्यर्थी के नंबर शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा बढ़ाए गए हैं। उन पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में लेवल-1 की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के साथ ही दोषी अधिकारियों का नाम सार्वजनिक करने की मांग शुरू कर दी है। जिसको लेकर शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है।

कालूराम ने अपने एडमिट कार्ड में दिव्यांग होने की बात से इनकार किया था।
कालूराम ने अपने एडमिट कार्ड में दिव्यांग होने की बात से इनकार किया था।

दरअसल, दौसा जिले के रहने वाले 29 साल के कालूराम मीणा, पिता नारायण मीणा ने ST कैटेगरी में फॉर्म नंबर 70045559 से आवेदन किया था। इसके बाद कैंडिडेट कालू राम मीणा ने 26 सितम्बर को रीट लेवल 1 की परीक्षा दी। शिक्षा विभाग ने लेवल-1 के नंबर जारी कर दिए गए। इसमें भी कालूराम मीणा की सारी डिटेल फॉर्म नंबर 70045559, पिता, माता का नाम और रॉल नंबर वही रहा, जो पहले था। लेकिन जब कालूराम ने 16 मार्च को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में हिस्सा लिया। तो 90 नंबर हासिल करने वाले कालूराम लेवल-1 के टॉपर बन गए। रोल नंबर 293004794 के साथ 150 में से 90 नंबर हासिल करने वाले कालूराम के 150 में से 144 नंबर हो गए।

डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद कालूराम के नंबर बढ़कर 144 पर पहुंच गए।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद कालूराम के नंबर बढ़कर 144 पर पहुंच गए।

डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में हुआ खेल
रीट लेवल-1 की शिक्षा निदेशालय की ओर से जब फाइनल कटऑफ जारी की गई। तो अब तक सामान्य कैटेगरी में शामिल कालूराम डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद अचानक स्पेशल कैटेगरी में शामिल हो गया। और 90 नंबर हासिल करने वाले कालूराम के 54 नंबर बढ़ा दिए गए। हालांकि फाइनल रिटल में कालू राम मीणा, कैटेगरी- जनरल और स्पेशल कैटेगरी में BL/LV, यानि दोनों पैरों से दिव्यांग और लो विजन यानि दृष्टि बाधित बताया गया। जबकि कालूराम मीणा ने शुरुवात में जो फॉर्म भरा था। तो उस वक्त उसने डिफरेंटली एबल्ड में NO लिखा था। लेकिन डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद जो लिस्ट जारी की गई। उसमें कालू के नंबर तो बढ़े ही साथ ही वह दिव्यांग भी बन गया। जिसकी वजह से कालूराम मीणा ने रीट लेवल -1 की मेरिट 20वां स्थान हासिल कर लिया।

डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से पहले कालूराम के 150 में से सिर्फ 90 नंबर आए थे।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन से पहले कालूराम के 150 में से सिर्फ 90 नंबर आए थे।

रीट अभ्यर्थियों द्वारा लेवल-1 में मिली इस धांधली का विरोध शुरू होने के साथ ही शिक्षा विभाग भी हरकत में आ गया। मंत्री बीडी कल्ला के साथ शिक्षा विभाग के निदेशक गौरव अग्रवाल ने भी इस पूरे मामले पर सफाई दी। जहां मंत्री कला ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही। वहीं प्रारंभिक शिक्षा विभाग के निदेशक गौरव अग्रवाल ने कालूराम का आवेदन ही निरस्त कर दिया। बावजूद इसके लेवल-1 के अभ्यर्थियों ने एक बार फिर भर्ती परीक्षा में धांधली को लेकर विरोध शुरू कर दिया है।

बता दें कि इससे पहले भी रीट लेवल-2 में हुई धांधली के बाद भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया गया था। वहीं लेवल-1 में एक अभ्यर्थी के एक से अधिक प्रवेश पत्र जारी करने के मामले की जांच जारी है। ऐसे में फाइनल स्टेज पर पहुंच चुकी लेवल 1 की भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

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