प्रदेश में एक भी फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं:पॉक्सो की 57 कोर्ट, फास्ट ट्रैक 1 भी नहीं... जबकि निचली कोर्ट में 19.72 लाख केस लंबित

जयपुरएक वर्ष पहले
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कैबिनेट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट को दो साल और जारी रखने की मंजूरी दी, जिन राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं हैं उन्हें भी योजना से जुड़ने का दिया प्रस्ताव। - Dainik Bhaskar
कैबिनेट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट को दो साल और जारी रखने की मंजूरी दी, जिन राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं हैं उन्हें भी योजना से जुड़ने का दिया प्रस्ताव।
  • देश में 389 विशेष कोर्ट सहित 1023 फास्ट ट्रैक अदालत मार्च 2023 तक काम करते रहेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने पॉक्सो की 389 विशेष कोर्ट सहित 1023 फास्ट ट्रैक कोर्ट को जारी रखने के संबंध में केन्द्र सरकार की योजना को दो साल की मंजूरी दी है। ये विशेष कोर्ट अब 1 अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2023 तक जारी रहेंगे।

वहीं इन कोर्ट को जारी रखने के लिए कुल 1572.86 करोड़ रुपए के खर्च में से केन्द्र सरकार 971.70 करोड़ रुपए की राशि देगी और राज्य अपने हिस्से के 601.16 करोड़ रुपए देंगे। वहीं केंद्रीय हिस्से की धनराशि निर्भया फंड से उपलब्ध कराई जाएगी।

दरअसल पॉक्सो व फास्ट ट्रैक कोर्ट यौन अपराधों के पीड़ितों के लिए त्वरित न्याय दिलवाने के लिए समर्पित कोर्ट हैं, जो यौन अपराधियों के खिलाफ ढांचे को और मजबूत करती हैं। केन्द्र सरकार ने यह योजना 02 अक्टूबर, 2019 को शुरू की थी। राजस्थान में पॉक्सो की 57 कोर्ट हैं, लेकिन एक भी फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं है, जबकि प्रदेश की निचली कोर्ट में 19.72 लाख मुकदमे लंबित हैं।

लंबित मुकदमों में 14.57 लाख मुकदमे क्रिमिनल हैं, जबकि 5.15 लाख मुकदमे सिविल केटेगरी के हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट देश के 28 राज्यों में ये काम कर रही हैं। ऐसे में देश के सभी 31 राज्य जो इस योजना में शामिल होने के पात्र हैं उनके लिए भी इन कोर्ट को अपने यहां पर शुरू या विस्तार करने का प्रस्ताव दिया है।

कानून में किया संशोधन

ऐसे मामलों में अधिक कड़े प्रावधान, त्वरित सुनवाई के लिए केंद्र सरकार ने “आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018” लागू किया और दुष्कर्म के अपराधियों के लिए मौत की सजा सहित कड़ी सजा का प्रावधान किया। इससे फास्ट ट्रैक विशेष कोर्ट की स्थापना हुई।

राजस्थान में एक भी फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं

प्रदेश में पॉक्सो की 57 कोर्ट काम कर रही हैं। प्रदेश में केन्द्र की योजना 2019 से पहले ही 6 अगस्त 2018 के आदेश से 55 नए पॉक्सो कोर्ट खोलने को मंजूरी दी थी। एक पॉक्सो कोर्ट पहले से काम कर रही थी। पॉक्सो कोर्ट के लिए 60 फीसदी बजट केन्द्र देता है। 40 फीसदी बजट राज्य सरकार वहन करती है। राजस्थान में एक भी फास्ट ट्रेक कोर्ट नहीं है।