वर्ल्ड एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में देवेंद्र ने जीता सिल्वर मेडल:60.97 मीटर भाला फेक बढ़ाया भारत का मान, बोले - पैरा खिलाड़ियों के प्रति बदला नजरिया

जयपुर2 महीने पहले
जेवलिन थ्रोअर देवेंद्र झाझड़िया ने वर्ल्ड एथलेटिक्स ग्रांड प्रीक्स में जीता सिल्वर।

वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स में भारत के खिलाड़ियों ने भाला फेंककर देश का नाम दुनियाभर में रोशन किया है। मोरक्को के मारकेच सिटी में आयोजित ग्रांड प्रिक्स में देवेंद्र झाझड़िया ने 60.97 मीटर दूर भाला फेक सिल्वर मेडल जीता है। वहीं भारत के ही अजीत कुमार ने 64 मीटर भाला फेक गोल्ड मेडल अपने नाम किया है।

सिल्वर मैडल जितने के बाद देवेंद्र ने कहा कि टोक्यो पैरा-ओलंपिक के बाद में फिर से ट्रेनिंग पर आ गया था। पिछले कुछ सालों में भारत में स्पोर्ट्स का माहौल बदल रहा है। लोगों का स्पोर्ट्स और दिव्यांगों के प्रति नजरिया बदल रहा है। अब हमारे देश में पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब के साथ खेलोगे कूदोगे तो बनोगे लाजवाब का नारा चल रहा है। जिससे युवाओं के साथ उनके परिजन भी खेलो का महत्त्व समझ रहे है।

देवेंद्र ने कहा कि हर किसी के जीवन में एज फेक्टर होता है। खिलाड़ियों के लिए तो खास तौर पर होता है। लेकिन आप अपने समर्पण, सूझबूझ और मेहनत से इसका असर कम कर सकते हैं। बढ़ती उम्र के साथ रिकवरी मुश्किल से होती है। तो आपको यह ध्यान रखना होता है कि कैसे कम से कम इंजरी हो। इसके साथ ही खिलाडी की डाइट सबसे ज्यादा जरुरी है। बता दें कि देवेंद्र मूल रूप से राजस्थान के चूरू के निवासी है। वह अब तक कई अंतरराष्ट्रीय मैडल के साथ अर्जुन अवार्ड, पद्मश्री अवार्ड, सर्वोच्च खेल रत्न अवार्ड, पद्मभूषण अवार्ड से सम्मानित हो चुके हैं।

कबड्डी प्लेयर से की शादी, एक ही स्कूल में पढ़ते थे

देवेंद्र झाझड़िया की पत्नी मंजू खुद भी कबड्डी प्लेयर रही हैं। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे। कहती हैं, कभी भी मेरे मन में ऐसा विचार नहीं आया कि इनके एक हाथ नहीं है। उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की है, वह हजारों हाथों के बराबर है। 2007 में जब मुझे पता चला कि इनके साथ मेरी शादी हो रही है तो मैं खुशी-खुशी राजी हो गई थी।

करंट लगने से काटना पड़ा था हाथ

देवेंद्र झाझड़िया जब 8 साल के थे। तब वह अपने गांव में पेड़ पर चढ़ रहे थे। तभी हाई टेंशन लाइन की चपेट में आने से देवेंद्र के बाएं हाथ में दिक्कत हो गई। हाथ कोहनी से काटना पड़ा था। देवेंद्र ने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया, लेकिन मां जीवनी देवी ने उन्हें मोटिवेट किया। देवेंद्र ने धीरे-धीरे पढ़ाई के साथ जेवलिन थ्रो खेलना शुरू किया, और अब तीन ओलिंपिक मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन चुके हैं।