नीट-2022 से बाहर होंगे हजारों स्टूडेंट:एक साल खराब होने से परेशान हैं छात्र, जानिए क्या है कारण

जयपुर4 दिन पहलेलेखक: दीपक आनंद
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नीट पीजी-2022 की स्थिति स्पष्ट होने के बाद यह तय हो गया है कि इस साल नीट पीजी में कॉम्पिटिशन कम होगा। कारण, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, केरल सहित अन्य कुछ राज्यों के एमबीबीएस छात्रों की इंटर्नशिप पूरी नहीं हुई है। ऐसे में करीब सात हजार छात्र पहले ही इस परीक्षा से बाहर हो गए हैं। इन राज्यों में साल 2022 की पीजी परीक्षा में साल 2020 या उससे पहले के छात्र ही एलिजिबल हो पाएंगे।

मतलब, 50 प्रतिशत स्टेट कोटे की सीटों पर प्रतिस्पर्धा हर साल की तुलना में कम रहेगी। वहीं, इन राज्यों में 2023 में दो बैच एक साथ परीक्षा देंगे। उस स्थिति में इस साल के मुकाबले कॉम्पिटिशन ज्यादा मुश्किल होगा। साल 2021 के छात्रों की इंटर्नशिप नीट पीजी-2022 के बाद पूरी होगी। वहीं 2022 में एमबीबीएस कर चुके छात्रों की इंटर्नशिप साल 2023 के नीट पीजी तक पूरी हो जाएगी। ऐसे में एमबीबीएस के दो अधिक बैच अगले साल पीजी एंट्रेंस के पात्र होंगे।

पीजी की करीब 42 हजार सीटों के लिए औसतन दो लाख छात्रों के बीच कॉम्पिटिशन रहता है। मेडिकल एजुकेशन एक्सपर्ट आकाश सोनी ने बताया कि कई राज्यों के डाॅक्टर्स कोराेना की वजह से इंटर्नशिप पूरी नहीं कर पाएंगे। इंटर्नशिप की कट ऑफ अवधि समाप्त होने तक यह नीट पीजी के लिए एलिजिबल नहीं हाेंगे। एमबीबीएस के साथ इंटर्नशिप पूरी होने पर ही छात्र नीट पीजी के लिए पात्र होते हैं।

सीटों पर 50% सेंट्रल और 50% स्टेट कोटे से एडमिशन
नीट पीजी के स्कोर के आधार पर मेडिकल स्टूडेंट्स को अलग-अलग कोर्सेज में कोटे के आधार पर एडमिशन होता है। पीजी में किसी भी राज्य के मेडिकल कॉलेज की 50 प्रतिशत सीटों पर सेंट्रल व 50 स्टेट कोटे की सीट्स होती हैं। वहीं नीट यूजी में 15 फीसदी सीटें केंद्रीय व 85 प्रतिशत सीटें राज्य के कोटे की होती हैं। एम्स सहित अन्य कुछ केंद्रीय मेडिकल संस्थान खुद के एंट्रेंस के आधार पर पीजी में दाखिला देते हैं।