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डायबिटीज-हाइपरटेंशन के मरीज:8 माह में 8 लाख हाइपरटेंशन-शुगर के शिकार, एक लाख को दोनों बीमारी

जयपुर2 महीने पहले
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प्रदेश में 8 माह (अप्रैल से नवंबर-2020) में डायबिटीज और हाइपरटेंशन के 8 लाख मरीज सामने आए हैं - Dainik Bhaskar
प्रदेश में 8 माह (अप्रैल से नवंबर-2020) में डायबिटीज और हाइपरटेंशन के 8 लाख मरीज सामने आए हैं
  • कोरोना काल के दौरान मेडिकल कॉलेज, सीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों में आने वाले मरीजों की स्क्रीनिंग में खुलासा
  • डायबिटीज-हाइपरटेंशन में जयपुर, उदयपुर, अलवर, अजमेर और जोधपुर जिले अव्वल

कोरोनाकाल में बीमारी का खौफ, घबराहट, बैचेनी, घर में रहने पर दिन भर जंक फूड का सेवन, बदलती जीवन शैली, मानसिक तनाव, तंबाकू का सेवन, वातावरण में पाए जाने वाले केमिकल, देर से सोना और देर से ही उठना और खानपान के चलते हाइपरटेंशन और डायबिटीज के शिकार लोगों का ग्राफ बढ़ता जा रहा है।

प्रदेश में 8 माह (अप्रैल से नवंबर-2020) में डायबिटीज और हाइपरटेंशन के 8 लाख मरीज सामने आए हैं। इनमें से 5 लाख तो अकेले हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर के हैं। इसके अलावा स्ट्रोक के एक हजार मरीज हैं। स्ट्रोक में राजसमंद पहले व बाड़मेर दूसरे नंबर पर है।

डायबिटीज व हाइपरटेंशन दोनों में टॉप-10 जिले में जयपुर, अलवर, अजमेर, उदयपुर, सीकर, टोंक, बीकानेर,जोधपुर, झालावाड़ और सवाईमाधोपुर पर है। यह खुलासा एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर समेत अजमेर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा और प्रदेश की सीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों में स्क्रीनिंग के दौरान हुआ है।

सबसे चौंकाने वाली जानकारी ये है कि प्रदेश में एक लाख ऐसे मरीज भी मिले, जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर व डायबिटीज दोनों बीमारी थी। कोरोनाकाल में समय पर परीक्षा आयोजित नहीं होना, दिन भर घर में रहना, ऑनलाइन पढ़ाई का दवाब और डिप्रेेशन माना जा रहा है। इसमें युवा सबसे ज्यादा शिकार हुए है।

सिकफेट पीड़ित मरीजों के ‘साइटोकाइन’ ज्यादा निकलने से खतरा

डॉक्टरों के अनुसार एडीपोज टिश्यू डिस्फंक्शन या सिकफेट जिन लोगों के होता, उन्हें हाइपरटेशन, डायबिटीज और लिपिड की दिक्कत होती है। जिससे हार्ट अटैक और लकवा का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में कोरोना होने पर साइटोकाइन स्टॉर्म और कोरोना की संभावना बढ़ जाती है। सिकफेट से साइटोकाइन ज्यादा निकलते है। एसएमएस में मरीजों में किए गए अध्ययन में बिना मोटापे के डायबिटीज व हाई ब्लड प्रेशर मिला है।

यह खतरे की घंटी इसलिए

हाइपरटेंशन से रक्त वाहिकाएं सख्त, मोटी और संकरी होने से हृदय में खून का संचार नहीं होता। एंजाइना (छाती में दर्द) व गंभीर बीमारी के साथ हार्ट अटैक की आशंका रहती है। गुर्दों की रक्त कोशिकाएं कमजोर व संकुचित होने से कार्यक्षमता घट जाती है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा बढ़ता है।
20 से 25 साल तक की उम्र वाले भी ब्लड प्रेशर का शिकार

20 से 25 साल तक की उम्र वाले भी ब्लड प्रेशर की गिरफ्त में आ रहे हैं। 60 साल की उम्र से पहले पुरुषों में उच्च रक्तचाप का खतरा ज्यादा रहता है, लेकिन बाद में महिला-पुरुष दोनों में ही खतरे की आशंका बराबर होती है। लंबे समय तक रक्तचाप का स्तर ज्यादा रहना हाइपरटेंशन या हाई बीपी कहलाता है। साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है।
19.3 फीसदी हाइपरटेंशन व 12.8 फीसदी डायबिटीज से ग्रसित

नेशनल फैमिली हैल्थ सर्वे (एनएफएचएस-4) के अनुसार राजस्थान में 12.8 फीसदी डायबिटीज जबकि 19.3 फीसदी लोग हाइपरटेंशन से ग्रसित है।

भास्कर एक्सपर्ट पैनल

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भंडारी, एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. संदीप माथुर, मेडिसन के डॉ. रमन शर्मा और डॉ. अजीत सिंह।

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