जिंदगी पटरी पर, कोरोना की आशंकाएं कायम:प्रदेश में 80% ट्रेनें शुरू लेकिन कोरोना के डर से एसी कोच 70% खाली, अब 550 में से 440 ट्रेनें दौड़ने लगीं

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: शिवांग चतुर्वेदी
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जनरल और स्लीपर में यात्रीभार कोरोना के पहले के स्तर पर पहुंच गया है। - Dainik Bhaskar
जनरल और स्लीपर में यात्रीभार कोरोना के पहले के स्तर पर पहुंच गया है।
  • जनरल कोच में 165% तक सीटें फुल

कोरोना की दूसरी लहर का कहर कम होने के साथ अब जिंदगी और रेल दोनों पटरी पर लौट आई हैं। राजस्थान की 550 में से 440 ट्रेनें और जयपुर की 130 में से 92 ट्रेनों का संचालन शुरू हो गया है। यानी उत्तर पश्चिम रेलवे (राजस्थान का 95% हिस्सा) के जयपुर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर मंडलों से गुजरने वाली 80% ट्रेनें अनलाॅक हो चुकी हैं।

हालांकि काेरोना का खौफ लोगों में अब भी है। यही वजह है कि एसी कोच 70% तक खाली हैं। लोगों को डर है कि एसी के कारण कोरोना संक्रमण तेजी से फैल सकता है। वहीं जनरल और स्लीपर में यात्रीभार कोरोना के पहले के स्तर पर पहुंच गया है।

लंबी दूरी के लिए निजी वाहनों को सुरक्षित मान रहे

लोअर क्लास (स्लीपर, सैकंड सीटिंग, जनरल) में ऑक्यूपेंसी 135 से 165% तक है। काेविड से पहले यह 155% तक रहती थी। वहीं सामान्य दिनों में एसी क्लास में 95% तक सीटें भरी होती हैं। अभी प्रयागराज स्पेशल, बॉम्बे सुपर जैसी ट्रेनों में एसी में यात्रीभार 30% है। इसके अलावा लंबी दूरी के लिए लोग निजी वाहनों को सुरक्षित मान रहे हैं। इसलिए ट्रेन में कम दूरी की यात्राएं करने वालों की संख्या अधिक है।

देश में दूसरी लहर से पहले 12 हजार ट्रेनें दौड़ रहीं थी। अब 70% शुरू हाे चुकी हैं।

अपर क्लास का न्यू नॉर्मल- यूवी मशीन से खत्म करेंगे वायरस

अपर क्लास में यात्रीभार बढ़ाने के लिए भी रेलवे कई बदलाव कर रहा है। कोच के अंदर टॉयलेट और गैलरी में बने नल, सोप डिस्पेंसर और फ्लश अब पैर से ऑपरेट होंगे। एसी डक्ट में प्लाज्मा एयर इक्यूपमेंट इन्सटाॅल है। यह हवा को सैनिटाइज कर कोच को ठंडा करेगा। कोच की सामान्य सफाई के बाद उसमें अल्ट्रा वॉयलेट (यूवी) सैनिटाइजर मशीन का प्रोटोटाइप डिजाइन किया गया है। इससे वायरस को खत्म किया जाएगा।

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