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मंत्री-पति का जलवा, पावर कपल का मैसेज:कांग्रेस में फूटेगा चिट्ठी बम, विस्फोटक चिट्ठी में क्या? प्रभारी बनते ही मंत्रीजी ने सियासी खूंटा तोड़ा

जयपुर7 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
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प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी का विपक्षी खेमा एक बार फिर हमला करने की योजना बना रहा है। हमले का हथियार दलितों के मुद्दों को बनाया है। दलित नेताओं और कुछ विधायकों ने मिलकर सीधे राहुल गांधी को चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में दलितों को लेकर सरकार के दावों और हकीकत का ब्यौरा देते हुए सरकार और मुखिया की शिकायत की गई है।

राहुल गांधी से चार दलित विधायकों और नेताओं ने मिलने का समय भी मांगा है। चिट्ठी से शिकायतों में कोई कमी रह गई हो तो मिलकर उसे पूरा किया जाए, इसके पीछे यह रणनीति है। चिट्ठी में एक भी दलित कैबिनेट मंत्री नहीं होने, सफाई कर्मचारी आयोग का गठन नहीं होने का जिक्र है। एससी आयोग नहीं बनने सहित शिकायतों का एक लंबा ब्यौरा है। नाराज खेमे की चिट्ठी के हथियार की मारक क्षमता का असर आने वाले दिनों में दिख सकता है।

अर्बन डेवलपमेंट में सिंह इज किंग थ्योरी के आगे सब पस्त
अर्बन डेवलपमेंट में सिंह इज किंग थ्योरी के आगे आजकल सब पस्त दिख रहे हैं। इस थ्योरी का ही कमाल है कि खुद को सत्ता के नजदीक समझने वाले अफसरों के नंबर कम हो गए हैं। नंबर कम होने का उन अफसरों को अहसास भी करवा दिया है। एक अफसर के पारिवारिक बिजनेस का ब्यौरा भी सत्ता के कर्ताधर्ता तक पहुंचा दिया है, उस बिजनेस में कुछ गड़बड़िया भी हैं।

अब कारखानों में कुछ कमियां खामियां तो मिल ही जाती हैं। उन्हीं का पूरा ब्यौरा बनाकर पहुंचा दिया है। अर्बन डेवलपमेंट में तिकड़ी का तिलिस्म बन ही रहा था कि सिंह इज किंग थ्योरी ने उसे तोड़ ही नहीं दिया लगभग नेस्तनाबूद करने की ठान रखी है।

सत्ता के संक्रमण से संक्रमित नेताजी के दामपंथी कारनामों की शिकायत

सत्ता के नजदीकी एक प्रभावशाली नेता सत्ता की आवश्यक बुराइयों से ज्यादा ही संक्रमित हो गए। सत्ता से संक्रमित नेताजी के दामपंथी कारनामों की शिकायत जिले के प्रभारी मंत्री से बर्दाश्त नहीं हुई। प्रभारी भी दिल्ली तक प्रभाव रखते हैं, इसलिए नेताजी के सत्ता के संक्रमण और दामपंथ का पूरा ब्यौरा प्रदेश के मुखिया के सामने रख दिया। शिकायत तो हो गई, लेकिन अब एक्शन का इंतजार है। इतना सब कुछ होने के बावजूद जानकारों को कुछ बदलने की कतई उम्मीद नहीं है।

मदहोशी से रेवेन्यू देने वाले विभाग के कर्ताधर्ता का पावर कट

लोगों को मदहोश बनाकर सरकार को सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने वाले विभाग के कर्ताधर्ता को इन दिनों पावर कट का अहसास होने लगा है। यह पावर कट एनर्जी वाला नहीं है। कुछ दिन पहले विभाग के कर्ताधर्ता ने तबादलों की लिस्ट बनाकर ऊपर भेजी, लेकिन जब आदेश आए तो कर्ताधर्ता को पैरों तले से जमीन खिसकने जैसा अहसास हुआ, क्योंकि सबकुछ बदल दिया था। मदहोशी वाले विभाग के कर्ताधर्ता की तबादला लिस्ट को एसीएस और प्रमुख सचिव ने सीधे प्रदेश के मुखिया से ही मंजूर करवा ली। पता लगा है कि कर्ताधर्ता जिनके खास हैं, उनकी भी तबादला लिस्ट में नहीं चली है।

मंत्री पति के ठाठ चर्चा में

प्रधान पति, सरपंच पति के बाद सत्ता के गलियारों में इन दिनों मंत्री-पति की धूम है। मंत्री पति का पद बहुत लंबे अरसे बाद चर्चा में आया है। मंत्री पति राजनीति में बाकी पतियों से अलग हैं, उनकी अपनी प्रोफेशनल और प्रशासनिक योग्यता है इसलिए उनका पावर 60 साल की उम्र तक रहेगा। जब तीन-तीन तरह के पावर और खूबियां हों तो जलवा होना स्वाभाविक है। मंत्री पति ने पावर कपल का अहसास करवाने के लिए मंत्री के बंगले पर अपनी नेम प्लेट भी लगवा ली है। अब जो भी बंगले पर आता है या पास से गुजरता है, उसकी निगाह नेम प्लेट पर जरूर जाती है। पावर कपल के थोड़े बहुत जलवे तो अब चलते ही हैं।

राजधानी के नेताजी का आइडेंटिटी क्राइसिस और प्रचार की सोतिया डाह
राजधानी में विपक्षी पार्टी के एक जनाधार वाले नेता इन दिनों प्रचार नहीं पाने के कारण आइडेंटिटी क्राइसिस का शिकार हैं। नेताजी को मलाल इस बात का है कि राजधानी में इतना काम करने के बावजूद उन्हें मीडिया में कोई पूछ नहीं रहा। इसके ठीक उलट सत्ता में रहते हुए जिन नेताजी से विभाग छीनकर उन्हें दिया था, वे नेताजी बाहरी होते हुए भी छाए रहते हैं। नेताजी ने अपने चुनिंदा नजदीकियों के सामने इस दर्द का इजहार करते हुए इसका मर्ज तलाशने को कहा। अब नेताजी के नजदीकी इस आइडेंटिटी क्राइसिस बीमारी का इलाज पूछ रहे हैं।

प्रभारी बनते ही मंत्रीजी ने सियासी खूंटा तोड़ा

कांग्रेस में नए नए प्रभारी बने चर्चित मंत्रीजी मौके पर चौका मारने में शुरू से ही माहिर रहे हैं। तमाम विवादों के बावजूद उनके सियासी सितारे यूं ही बुलंदियों पर नहीं है। प्रभारी के तौर पर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पहली बार शामिल होने के बाद उनके तेवर देख हर कोई हैरान था। किसी ने उनसे प्रदेश के मुखिया को लेकर पूछ लिया तो उन्होंने ऐसा जवाब दिया जिसकी सामने वाले को उम्मीद कतई नहीं थी। नए प्रभारी ने साफ अहसास करवा दिया कि राजस्थान में वे अब किसी नेता के खूंटे से नहीं बंधने वाले।

अब प्रदेश वाला अस्थायी सियासी खूंटा तोड़ दिया है। बात सही भी है, सियासी खूंटा कोई स्थायी थोड़े ही है, जब हाईकमान को रिपोर्ट करनी है तो राजस्थान वाले बड़े नेता कौन होते हैं ? अब मंत्रीजी फॉलोवर नहीं कॉलोबरेटर बन गए हैं, थोड़े दिन बाद वे और अच्छी तरह से इसका अहसास करवा देंगे।

इलेस्ट्रेशन : संजय ढिमरी,जयपुर

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