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हादसा हो तो विकास हो:सुबह 6 बजे हादसा, 10 बजे सीवरलाइन बदलने का वर्कऑर्डर, अब कल से काम

जयपुरएक महीने पहले
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हादसे का कारण सड़क के नीचे से गुजर रही 900 मिमी यानी 1 मीटर चाैड़ी सीवर लाइन की लीकेज से हादसा हुआ। - Dainik Bhaskar
हादसे का कारण सड़क के नीचे से गुजर रही 900 मिमी यानी 1 मीटर चाैड़ी सीवर लाइन की लीकेज से हादसा हुआ।
  • चौमू हाउस सर्किल के पास धंसी सड़क, 25 फीट गहरे गड्‌ढे में गिरा ऑटो
  • 50 साल पुरानी थी 900 एमएम की सीवर लाइन, सड़क को फिर ले धंसी

राजधानी में भ्रष्टाचार की सड़कें अब जानलेवा हो चली हैं। शनिवार सुबह 6 बजे जयपुर के पॉश इलाके में सचिवालय से एक किमी दूर चाैमू हाउस सर्किल पर 30 फीट चाैड़ी सड़क धंस गई। इससे 25 फीट गहरा गड्‌ढा हो गया और एक ऑटाे चालक व महिला यात्री सहित गड्ढे में समा गया। हालांकि, वहां मौजूद लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए दूसरे ऑटो की रस्सी के सहारे झाेटवाडा निवासी चालक राशिद व मधुबन काॅलाेनी, टाेंक फाटक निवासी युवती रेखा काेटिया काे बाहर निकाला। रेखा को उपचार के बाद घर भेज दिया, लेकिन राशिद एसएमएस में भर्ती है।
4 साल में 3 बार सड़क में गड्‌ढा; 50 साल पुरानी थी 900 एमएम की सीवर लाइन, सड़क को फिर ले धंसी

सी-स्कीम स्थित चाैमूं हाउस सर्किल पर शनिवार तड़के अचानक सड़क धंस गई और 25 फीट का गड्डा हो गया। इसी दाैरान यहां से गुजर रहा एक ऑटाे गड्ढे में समा गया। हादसे बाद निगम के जिम्मेदार अधिकारियाें की नींद उड़ी हुई है। हादसे का कारण सड़क के नीचे से गुजर रही 900 मिमी यानी 1 मीटर चाैड़ी सीवर लाइन की लीकेज से हादसा हुआ।

हालांकि यहां ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई। चार साल में तीन बार सीवर लाइन लीक हाेने से सड़क धंस चुकी है। 25 जुलाई 2017 को जब पहली बार सड़क धंसी थी को निगम अधिकारियाें का दावा था कि जल्द ही नई लाइन डाल दी जाएगी। हालांकि फाइल टेबल-टेबल घूमती रही। शनिवार सुबह तीसरी घटना हुई तो दाे घंटे में ही वर्क ऑर्डर जारी कर दिए गए।
जर्जर सीवर लाइन और केबल का जाल हर बार खतरा
यह सीवर करीब 50 साल पहले डाली गई थी। यह लाइन बनीपार्क, बडाेदिया बस्ती, सैन काॅलाेनी, मिशन कपाउंड, चाैमूं हाउस सर्किल, सी-स्कीम हाेते हुए एक पुरानी नहर के बराबर चलते हुए नाले में मिलती है। यह सीवर लाइन जगह-जगह से जर्जर हाे चुकी है। इसके अलावा लाइन के बराबर में मुख्य सड़क चाैराहे पर केबल लाइनाें का जाल भी बिछा हुआ है।

1.5 करोड़ रु. से 800 मी. लंबी लाइन डलेगी
लाइन बदलने के लिए 6 माह पहले ही टेंडर हो चुके हैं, लेकिन इसका वर्कऑर्डर नहीं हुआ था। लेकिन हादसे के 4 घंटे बाद ही सीवरलाइन बदलने के वर्कऑर्डर जारी कर दिए गए। सोमवार से इस पर काम भी शुरू हो जाएगा। अब जल्द 1.5 कराेड़ रु. खर्च कर 800 मीटर लंबी नई लाइन डाली जाएगी।

सुबह 6 बजे हादसे की आंखों देखी; धमाका हुआ, हम भागे, सड़क धंसी मिली, ऑटो में 2 लोग हिलते दिखे

^चाय की थड़ी लगाने वाले विष्णु मीणा का कहना है अचानक धमाका हुआ। देखा ताे गहरा गड्ढा बना हुआ था और नीचे घायल फंसे थे। हमने सबसे पहले घायलों काे बाहर निकाला।
^सुबह ड्यूटी खत्म कर सर्किल के पास चाय पी रहा था। तभी तेज आवाज आई, हम भागे। सर्किल पर बड़ा सा गड्‌ढा हो रखा था और एक ऑटाे फंसा हुआ था। -प्रहलाद तेतरवाल
^मार्निंग वॉक के लिए निकला था। चौमूं हाउस सर्किल के पास पहुंचा ही था कि कुछ लोगों को भागते हुए देखा। मैं भी भागा। देखा...सड़क धंसी थी और ऑटो उसमें पलटा हुआ था। लाेगाें की मदद से ऑटाे चालक-युवती काे निकाला और अस्पताल में दाखिल कराया।
-राजकुमार स्थानीय निवासी

सावधान! हादसे प्रगति पर हैं; कौन जिम्मेदार आखिर कर क्या रहा है आइए समझते हैं

सिटी हीरो; सबसे पहले चाय वाले और गार्ड ने अपनी जिम्मेदारी निभाई
ऑटो सवार दो लोगों को 25 फीट गहरे गड्‌ढे से प्रहलाद और राजकुमार ने निकाला।

सरकार; मंत्री ने बचाने वालों का सम्मान किया, 2100-2100 दिए
परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने दोनों युवकों को 2100-2100 देकर इतिश्री की।
असल जिम्मेदार; 6 माह से रुके वर्कऑर्डर, हादसे के तुरंत बाद जारी
निगम कमिश्नर ने हादसे के बाद दोपहर तक
6 माह से रुका वर्कऑर्डर जारी कर दिया।

एक्सपर्ट; जेडीए से रिटायर्ड एडिशनल चीफ इंजीनियर अरविंद आर्य

1 सीवर लाइन में दाे जगह से दिक्कत हाे सकती है। पहला यह कि किसी जॉइंट में लीक हाेने पर पानी रिसता रहता है और उस जगह पर गड्ढा बन जाता है, जैसे ही ऊपर का लाेड ज्यादा हाे जाता है ताे सड़क धंस जाती है। लाइन में लीकेज हाेता है उसके ढूंढ पाना मुश्किल है और अगर चैम्बर के आसपास लीकेज है ताे आसानी से दिख जाती है। 2 यह 900 एमएम की लाइन है। सीवर लाइन अंडर ग्रेविटी आगे बढ़ती यानी कि ढलान की तरफ मलबा बहता है। इस दाैरान यदि कहीं लाइन में आगे ब्लाॅक हाे जाए ताे पानी पीछे एकत्र हाेकर प्रेशर बनाता है, तब भी लीकेज हाेने के चांस हाेते हैं। 3 इस लाइन में धीरे-धीरे पानी रिसकर कैविटी बन गई हाेगी और फिर अचानक ज्यादा कैविटी बनने पर सड़क धंस गई। 4 सीवर लाइन हर एक दाे साल में मेंटिनेंस हाेना जरूरी है, लेकिन इतनी बड़ी लाइन है और बहती हुई लाइन से लीकेज पकड़ना बेहद मुश्किल काम हाेता है।

ये हैं हादसे के जिम्मेदार क्योंकि 6 माह से फाइल इनके पास अटकी थी

इस लाइन का सर्वे कब हुआ पता नहीं
^एरिया वाइज सीवर लाइन के मेंटिनेंस का सर्वे करते हैं। बजट से तय होता है कि लाइन बदलनी है या नहीं। इस लाइन का सर्वे कब हुआ पता नहीं।
-लाेकबंधु, कमिश्नर, हेरिटेज निगम

सीवर लाइन पुरानी थी
^सीवर लाइन काफी पुरानी थी। 4 साल पहले जहां सड़क धंसी, वह दूसरी जगह थी। अब जहां हादसा हुआ वहां न पानी था ना लीकेज।
-मुकेश गुप्ता, एडि. चीफ इंजिनियर, हेरिटेज

​​​​​​​पता नहीं था हादसा हो जाएगा
^2017 में लीकेज हुआ, 3 पाइप बदले। लाइन पुरानी है ताे इसे बदलने की भी प्लानिंग थी। हमें नहीं पता था कि उससे पहले ही ऐसा हादसा हाे जाएगा।
-दिनेश गुप्ता, एक्सईन, सिविल लाइंस जाेन

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