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  • After 113 Days The Number Of Patients In The State Is Below One Thousand, 989 New Cases Were Found Today, The Recovery Rate Reached Near 95 Percent

राजस्थान में कोरोना:113 दिन बाद मरीजों की संख्या एक हजार से कम, 989 नए केस मिले, रिकवरी रेट 95 प्रतिशत के नजदीक

जयपुर6 महीने पहले
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RUHS अस्पताल फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
RUHS अस्पताल फाइल फोटो।
  • प्रदेश में कुल मरीजों की संख्या 2.98 लाख से ज्यादा हो गई, जबकि मरने वालों का आंकड़ा 2608 पर पहुंच गया
  • जयपुर में आज कुल 205 नये मरीज मिले

प्रदेश में 113 दिन के लंबे समय के बाद कोरोना के केसों की संख्या में 1000 से कम आई हैं। शनिवार को राजस्थान में कोरोना के 989 नये मरीज मिले हैं। इससे पहले एक हजार से कम मरीज 27 अगस्त को 633 मरीज पूरे राजस्थान में मिले थे। वहीं दूसरी ओर राहत की खबर ये है कि राजस्थान में रिकवरी रेट भी तेजी से बढ़ रही हैं। वर्तमान में यह दर 94.83 से ज्यादा हैं। इसी का परिणाम है कि राजस्थान के सबसे बड़े डेडिकेटेड कोविड अस्पताल में अब 80 फीसदी बैड खाली पड़े हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से जारी रिपोर्ट को देखें तो आज पूरे प्रदेश में सबसे अधिक मामले राजधानी जयपुर में 205 नये मरीज आए हैं। वहीं जोधपुर में आज कोरोना केसों की संख्या 102 रही। इनके अलावा उदयपुर और कोटा ऐसे शहर रहे जहां मरीजों की संख्या 50 से ऊपर रही। पूरे प्रदेश में आज दिन तक की बात करें तो कुल 2.98 लाख से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। जबकि कोरोना से मरने वालों की संख्या 2608 हो गई हैं।

आज इन शहरों में आए इतने मरीज
कोटा 89, उदयपुर 64, अजमेर 35, अलवर 36, बांसवाड़ा 10, बारां 28, भरतपुर 35, भीलवाड़ा 49, बीकानेर 10, बूंदी 31, चित्तौड़गढ़ 22, डूंगरपुर 34, जैसलमेर 16, झालावाड़ 19, झुंझुनूं 10, नागौर 30, पाली 38, राजसमंद 29, सवाई माधोपुर, सिरोही में 18-18 और टोंक में 12 नये कोरोना के मरीज मिले हैं। इनके अलावा सीकर में 9, प्रतापगढ़ 6, करौली 2, जालौर, हनुमानगढ़ 3-3, गंगानगर, चूरू में 4-4, बाड़मेर 6, धौलपुर 5 और दौसा में 7 केस मिले हैं।

80 फीसदी बैड खाली
कोरोना की बढ़ती रिकवरी रेट और कमजोर होते संक्रमण का असर राजस्थान के सबसे बड़े डेडिकेटेड कोविड अस्पताल RUHS में देखने को मिल रहा हैं। यहां कुल 1405 बैड में से लगभग 80 फीसदी बैड खाली पड़ें हैं। करीब एक माह पहले दीपावली के आस-पास यहां बैड मिलना मरीजों के लिए मुश्कील हो रहा था। जानकारों की माने तो यहां प्रतिदिन की ओपीडी भी अब 100 से भी कम रह गई। जबकि आईपीडी की संख्या भी 10 से नीचे आ गई, जिसमें गंभीर मरीजों की संख्या तो लगभग न के बराबर हैं।