जयपुरिया अस्पताल के बाहर नवजात की मौत:जन्म के 4 घंटे बाद ही बच्ची को लावारिस छोड़ा चूहों ने कुतरा, शरीर पर 18 घाव, कान कुत्ता खा गया

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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जयपुरिया अस्पताल के बाहर कोई नवजात को छोड़ गया। - Dainik Bhaskar
जयपुरिया अस्पताल के बाहर कोई नवजात को छोड़ गया।

जयपुरिया अस्पताल इमरजेंसी के बाहर गेट नंबर 2 पर शुक्रवार की सर्द रात को मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई। जन्म के 4 घंटे बाद ही अबोध बच्ची को उसे ‘अपने’ ही शुक्रवार-शनिवार रात तीन-चार बजे लावारिस छोड़ गए। थोड़ी देर में ही बिना कपड़ों की नवजात को चूहों ने कुतर डाला।

नवजात की दर्द से भरी चीत्कार सुनने वाला कोई नहीं था। शरीर पर 18 घाव मिले। कान तो श्वान काट ले गया। सुबह हुई तो लोगों को पता चला। तुरंत सूचना पुलिस और अस्पताल को दी, मगर तब तक नवजात की जान जा चुकी थी। शनिवार देर शाम तक नवजात के शव को मोर्चरी में ही रखवा दिया गया। पुलिस वहां लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की तलाश कर रही है।

इस मौत के ‘अपने’ ही जिम्मेदार
महज 4 घंटे की नवजात की जान ‘अपनों’ ने ही ले ली। बड़ा सवाल; आखिरकार जब बच्ची को पालना ही नहीं था तो उसे इस दुनिया में लाकर यूं मरने के लिए क्यों छोड़ दिया? मौत का ऐसा मंजर देखकर अस्पताल में मौजूद हर किसी जेहन में गम और जुबां पर गुस्सा दिखा। हर कोई सिर्फ एक ही बात कर रहा था कि कोई मां-बाप कैसे अपने जिगर के टुकड़े को यूं बेजा सामान की तरह फेंक सकता है?

पुलिस दिनभर में सीसीटीवी नहीं खंगाल सकी
जयपुरिया अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बाहर चूहों के कुतरने से हुई 4 घंटे की बच्ची का शनिवार को पोस्टमार्टम नहीं कराया जा सका। पुलिस दिनभर में भी कैमरों को नहीं खंगाल सकी। गौरतलब है कि जयपुरिया अस्पताल के बाहर जिस जगह बच्ची को रखा गया, वहां कैमरे लगे हैं। कैमरे जेडीए की तरफ से लगाए गए हैं।

अस्पताल प्रशासन ने मामले की जानकारी पुलिस को दे दी थी। बजाज नगर पुलिस मौके पर पहुंची भी और बच्ची के शव को मोर्चरी में रखवा दिया है। इधर, पुलिस जल्द ही कैमरों में बच्ची को रखने वालों की तलाश करेगी फिर पोस्टमार्टम कराया जा सकेगा।

अस्पताल के अंदर छोड़ जाते तो जान बच जाती
जयपुरिया अस्पताल के बाहर कोई नवजात को छोड़ गया। बच्ची के कान और कुछ जगह जानवरों के काटने के निशान मिले हैं। पोस्टमार्टम के लिए शव को मोर्चरी में रखा है। जेडीए के कैमरों से दोषियों की तलाश की जा रही है। किसी को बच्ची को नहीं रखना था तो अस्पताल में छोड़ जाता। -डॉ. अशोक गुप्ता, अधीक्षक, जयपुरिया अस्पताल