कोरोना का खतरा, ऑनलाइन पढ़ाई पर स्कूलों की मनमानी:सरकार आदेश दे चुकी, फिर भी ऑफलाइन हो रही पढ़ाई; पेरेंट्स बोले- मरने नहीं भेज सकते

जयपुर10 महीने पहले
अभिभावक संघ ने शिक्षा मंत्री से शिकायत भी की है।

राजस्थान में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूलों में फिर से सख्ती बढ़ा दी थी। गृह विभाग के बाद शिक्षा विभाग ने भी ऑनलाइन पढ़ाई फिर से शुरू करने के आदेश दिए थे। ताकि बच्चों घर में रहकर सुरक्षित शिक्षा ले सकें, लेकिन निजी स्कूल संचालक मनमानी पर उतर आए हैं। कई स्कूलों में अब भी ऑनलाइन पढ़ाई शुरू नहीं की गई है।, वे पेरेंट्स पर बच्चों को स्कूल भेजने का दबाव बना रहे हैं। अब अभिभावकों ने निजी स्कूलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

इस दौरान स्कूलों की हकीकत जानने के लिए जब दैनिक भास्कर ने ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो हालात चौंकाने वाले थे। जयपुर के हवा सड़क स्थित सी. जी. पी. एस. स्कूल में सरकार की गाइडलाइन के बावजूद ऑनलाइन पढ़ाई को बंद कर दिया गया था। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि सरकार द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने का कोई लिखित आदेश नहीं आया है। ऐसे में फिलहाल ऑनलाइन नहीं करवाई जाएगी।

स्कूल प्रबंधन ने ऑनलाइन अकाउंट किया ब्लॉक।
स्कूल प्रबंधन ने ऑनलाइन अकाउंट किया ब्लॉक।

वहीं रुक्मणी बिरला स्कूल में फीस जमा नहीं कराने पर छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई से रोक दिया गया। स्कूल प्रबंधन द्वारा अभिभावकों से फीस मांगी गई। लेकिन अभिभावकों ने आर्थिक स्थिति का हवाला देकर फीस जमा नहीं नहीं कराई। तो स्कूल प्रबंधन ने छात्रों के ऑनलाइन अकाउंट को ही ब्लॉक कर दिया। इस वजह से सैकड़ों की संख्या में छात्र चाह कर भी नहीं पढ़ पा रहे है। वहीं जब इस पूरे मामले पर हमारी टीम ने स्कूल प्रबंधन से बातचीत करना चाही। तो उन्होंने इस पूरे मामले पर बात करने से मना कर दिया। हालांकि इस दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से स्कूल प्रबंधन ने लगातार अभिभावकों से इसकी डिमांड कर रहा है।

ऐसे ही हालत जयपुर के तिलक नगर स्थित माहेश्वरी स्कूल में भी सामने आय। जहां सरकारी आदेश के बावजूद छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाई करने से रोका जा रहा है। जिसको लेकर अभिभावकों ने शिक्षा विभाग में शिकायत भी की है। लेकिन हालत जस के तस है। जिसकी वजह से छात्र चाह कर भी पढ़ नहीं पा रहे है।

अभिभावक एकता आंदोलन के संयोजक मनीष विजयवर्गीय ने कहा कि राजस्थान में सरकार की गाइडलाइन की अवहेलना हो रही है, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी आंख बंद कर बैठे हैं। जिसका खामियाजा अभिभावक और छात्रों को उठाना पड़ रहा है। विजयवर्गीय ने कहा कि राजस्थान के स्कूलों में छात्र पॉजिटिव आ रहे हैं, लेकिन स्कूल संचालक अब भी ऑनलाइन पढ़ाई नहीं करवा रहे है। कुछ स्कूलों द्वारा फीस जमा नहीं करवाने पर छात्रों को पढ़ाई से दूर रखा जा रहा है।

जयपुर के अभिभावक तरुण शर्मा ने कहा कि फिलहाल छोटे बच्चों के लिए वैक्सीन नहीं आई है। यही कारण है कि मैं अपने बच्चों की जान जोखिम में नहीं डाल सकता। बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहता, लेकिन स्कूलों द्वारा जबरन दबाव बनाया जा रहा है। इसके लिए स्कूलों ने ऑनलाइन पढ़ाई भी बंद कर दी है। जो सरासर गलत है। हमने कलेक्टर से लेकर शिक्षा मंत्री तक इस पूरे मामले की शिकायत की है। अब तक स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

बच्चों को मरने के लिए स्कूल नहीं भेज सकते
जयपुर की रहने वाली कोमल कंवर ने कहा कि सरकार ने नई गाइडलाइन तो जारी कर दी, लेकिन स्कूलों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए कोई कारगर रणनीति नहीं बनाई है। जब तक कोरोना खत्म नहीं होता, हम अपने बच्चों को मरने के लिए स्कूल नहीं भेज सकते हैं। जिसकी वजह से अभी स्कूल मनमानी कर रहे हैं। ऐसे में सरकार को स्कूलों की प्रॉपर मॉनिटरिंग के लिए भी एक कमेटी बनानी चाहिए। इसमें अधिकारियों के साथ अभिभावकों को भी शामिल किया जाना चाहिए। तभी अभिभावकों और बच्चों को राहत मिल सकेगी।

राजस्थान में सरकारी आदेश की अवहेलना करने वाले स्कूलों में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर के स्कूल भी शामिल है। जहां शिक्षा विभाग की गाइडलाइन के बावजूद छात्रों को ऑनलाइन नहीं पढ़ाया जा रहा है। इनमें रुक्मणी बिरला, माहेश्वरी स्कूल और चिल्ड्रन गार्डन प्ले स्कूल जयपुर, सोफिया स्कूल अजमेर, सेंट पॉल स्कूल ब्यावर समेत कोटा, उदयपुर और जोधपुर के निजी स्कूल भी शामिल हैं।

इससे पहले, 26 नवंबर को गृह विभाग और शिक्षा विभाग ने कोरोना की नई गाइडलाइन जारी की थी कि प्रदेशभर के स्कूलों में अब तीन पारियों में पढ़ाई करवाई जाए। कक्षा पहली से पांचवी के बच्चों को सुबह 10 से दोपहर 3:45 तक, कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को सुबह 10:15 से शाम 4 बजे तक और कक्षा 9 से 12 के बच्चों को सुबह 10:30 से शाम 4:15 बजे तक के शिफ्ट में रखा गया था।

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