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8 साल बाद चमकेगा 953 जालीदार झरोखों वाला हवामहल:5 मंजिला इस इमारत को दिया गया था भगवान कृष्ण के मुकुट का आकार, अब लॉकडाउन में लाया जा रहा निखार

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: विष्णु शर्मा
लॉकडाउन में चल रहा है जयपुर के हवामहल का निखार।

देश दुनिया में सांस्कृतिक पहचान रखने वाला जयपुर अपने अंदर हैरिटेज, वास्तुकला, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को समेटे हुए है। यूनेस्को द्वारा वर्ल्ड हैरिटेज सिटी में शामिल गुलाबी नगरी जयपुर भारत के खूबसूरत शहरों में से एक है। यहां घूमने आने वाले देशी विदेशी सैलानियों के लिए सबसे पसंदीदा पर्यटन स्थलों में से एक हवामहल है। 953 जालीदार झरोखों वाला यह हवामहल आठ साल बाद फिर से चमकेगा। लॉकडाउन में हवामहल में निखार लाने के लिए रंग रोगन का काम चल रहा है। ऐसे में लॉकडाउन हटने के साथ ही शहरवासी और यहां आने वाले सैलानी इसका दीदार कर सकेंगे।

हवामहल में नए बदलाव की तस्वीर
हवामहल में नए बदलाव की तस्वीर

पहले 2013 में हुआ था हवामहल का रंग रोगन, अब आठ साल बाद निखरेगा
हवामहल अधीक्षक सरोज चंचलानी ने बातचीत में जानकारी देते हुए बताया कि 2013 में हवामहल का रंग रोगन करवाया गया था। इसके बाद पिछले कई सालों में हवामहल का रंग फीका पड़ने लगा था। इसके अलावा अन्य जर्जर हिस्सों की मरम्मत भी महसूस की जा रही थी। ऐसे में आमेर विकास प्रबंधन प्राधिकरण ने 3 मई को वर्क ऑर्डर जारी किया। इसके बाद हवामहल के निखार का काम जारी है।

हवामहल में मास्क नहीं तो प्रवेश नहीं
हवामहल में मास्क नहीं तो प्रवेश नहीं

करीब 30 साल पहले गुलाबी चौके के आधार पर तय होता है रंग
हवामहल अधीक्षक के मुताबिक हवामहल के रंग रोगन का काम शुरू होने के पहले इसकी फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराई गई है। इसके अलावा यहां पिछले करीब 30 साल से रखे गुलाबी रंग के चौके (पत्थर) के अनुसार ही रंग हवामहल पर करवाया जा रहा है। इस चौके को कई साल पहले एक कमेटी ने फाइनल किया था। जानकारी के अनुसार यह काम ExEn रवि गुप्ता की देखरेख में हो रहा है।

हवामहल के अंदर का दृश्य
हवामहल के अंदर का दृश्य

1799 में महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था निर्माण, पांच मंजिला इमारत को भगवान कृष्ण के मुकुट का आकार दिया
हवामहल एक राजसी महल है। इसका निर्माण जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था। वे कृष्ण भक्त थे। ऐसे में वास्तुकार लालचंद उस्ताद की देखरेख में पांच मंजिला इमारत को भगवान कृष्ण के मुकुट के आकार में निर्माण करवाया गया। इसे बनाने के लिए लाल व गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग किया गया। इसमें 953 आकर्षक छोटी-छोटी जालीदार खिड़कियां है। पहले राजपरिवार की महिलाएं इन्हीं खिड़कियों से शहर को नजारा देखा करती थी। वेंचुरी प्रभाव की वजह से इन जालीदार झरोखों में हमेशा ठंडी हवा महल के अंदर आती रहती है। यह इमारत हवामहल के नाम से प्रसिद्ध हो गई।

हवामहल का निर्माण करवाने वाले महाराजा सवाई प्रताप सिंह का चित्र
हवामहल का निर्माण करवाने वाले महाराजा सवाई प्रताप सिंह का चित्र

चौथी मंजिल प्रकाश मंदिर और पांचवीं हवा मंदिर कहलाई
हवामहल की स्थापत्य शैली भी राजपूत और मुगल शैलियों का बेजोड़ नमूना है। हवामहल की पहली दो मंजिलें गलियारों और कक्ष से जुड़ी हैं। रत्नों से सजे इस कक्ष को रत्न महल कहा जाता है। यहां पांच मंजिले है। इनमें पहली मंजिल शरद मंदिर, दूसरी मंजिल रत्न मंदिर, तीसरी मंजिल विचित्र मंदिर, चौथी प्रकाश मंदिर और पांचवीं हवा मंदिर कहलाती है। हवामहल में आनंदपोल और चांदपोल नाम से दो दरवाजे हैं। आनंदपोल पर बनी गणेश प्रतिमा के कारण इसे गणेश पोल भी कहा जाता है। महाराजा सवाई प्रताप सिंह (सवाई जय सिंह के पौत्र और सवाई माधो सिंह के पुत्र) थे।

हवामहल की पांचवीं मंजिल का नाम हवा मंदिर है। यहां से आप जयपुर शहर का दृश्य देख सकते है
हवामहल की पांचवीं मंजिल का नाम हवा मंदिर है। यहां से आप जयपुर शहर का दृश्य देख सकते है
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