2 लेपर्ड सफारी वाला देश का पहला शहर बनेगा जयपुर:नाहरगढ़, झालाना के बाद अब आमागढ़ में होगी लेपर्ड सफारी

जयपुर7 महीने पहले

जयपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहर के साथ अब वाइल्डलाइफ टूरिस्ट स्पॉट के रूप में भी विकसित हो रहा है। झालाना और नाहरगढ़ सफारी के बाद अब आमागढ़ लेपर्ड सफारी की शुरुआत होने जा रही है। आगरा रोड पर गलता की पहाड़ियों में आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व 16 किलोमीटर में फैला हुआ है। जहां फिलहाल 18 से 20 लेपर्ड रह रहे हैं। वन विभाग द्वारा लेपर्ड रिजर्व में 12 किलोमीटर लम्बा सफारी ट्रैक तैयार किया है। वहीं वन्यजीवों के लिए 7 वाटर पॉइंट बनाए गए है। जहां 22 मई से टूरिस्ट लेपर्ड का नजदीक से दीदार कर सकेंगे।

22 मई को इंटरनेशनल बायोलॉजिकल बायोडायवर्सिटी डे के मौके पर आमागढ़ लेपर्ड सफारी का उद्घाटन प्रस्तावित है।
22 मई को इंटरनेशनल बायोलॉजिकल बायोडायवर्सिटी डे के मौके पर आमागढ़ लेपर्ड सफारी का उद्घाटन प्रस्तावित है।

22 मई को इंटरनेशनल बायोलॉजिकल बायोडायवर्सिटी डे के मौके पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा लेपर्ड सफारी का उद्घाटन प्रस्तावित हैं। वन विभाग के अधिकारियो के ने बताया कि गलता के आसपास आमागढ़ पहाड़ियों और उससे लगते फॉरेस्ट एरिया में बड़ी संख्या में लेपर्ड हैं। झालाना में भी लेपर्ड की संख्या बढ़ गई है। नये लेपर्ड अब अपनी टेरेटरी बनाने के लिए आमागढ़ वन क्षेत्र की तरफ जा रहे है। ऐसे में फोरेस्ट एरिया को डवलप करने से वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सकेगा।

आमागढ़ में लेपर्ड सफारी शुरू होने के बाद जयपुर देश का पहला ऐसा शहर होगा। जहां एक तीन स्थानों पर लेपर्ड सफारी होगी।
आमागढ़ में लेपर्ड सफारी शुरू होने के बाद जयपुर देश का पहला ऐसा शहर होगा। जहां एक तीन स्थानों पर लेपर्ड सफारी होगी।

बता दें कि जयपुर में पिछले कुछ वक्त से लेपर्ड की संख्या लगातार बढ़ रही है। झालाना, आमागढ़ और नाहरगढ़ सफारी में लगभग 70 लेपर्ड रह रहे है। इनमे सबसे अधिक 40 से ज्यादा झालाना लेपर्ड सफारी में हैं। वहीं बढ़ती संख्या के साथ ही रिहायशी इलाकों में भी लेपर्ड के आने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। बीते एक साल में लेपर्ड 9 बार शहरी क्षेत्रों में आ चूका है।

गलता के घने जंगलों में बने आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व में 8 ऐसे लेपर्ड भी देखे गए हैं। जो पहले झालाना लेपर्ड सफारी में थे।
गलता के घने जंगलों में बने आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व में 8 ऐसे लेपर्ड भी देखे गए हैं। जो पहले झालाना लेपर्ड सफारी में थे।
आमागढ़ सफारी के आसपास रिहायशी इलाका भी है। वन विभाग के लिए लेपर्ड से आम आदमी को बचाना भी एक चुनौती रहेगी।
आमागढ़ सफारी के आसपास रिहायशी इलाका भी है। वन विभाग के लिए लेपर्ड से आम आदमी को बचाना भी एक चुनौती रहेगी।
आमागढ़ सफारी में लेपर्ड के साथ नीलगाय, लोमड़ी, बंदर, मोर, जंगली खरगोश समेत विभिन्न प्रजातियों के पक्षी भी निवास करते हैं।
आमागढ़ सफारी में लेपर्ड के साथ नीलगाय, लोमड़ी, बंदर, मोर, जंगली खरगोश समेत विभिन्न प्रजातियों के पक्षी भी निवास करते हैं।
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