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वाइट फंगस का तोड़:सर्जरी के बाद इंजेक्शन के साथ 3 बार लहसुन खिलाया, इंफेक्शन रुका...मरीज स्वस्थ

जयपुर16 दिन पहले
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पहली MRI 11 मई और दूसरी 24 मई की है। - Dainik Bhaskar
पहली MRI 11 मई और दूसरी 24 मई की है।
  • न्यूराेसर्जन डाॅ. कमल गाेयल का दावा: लहसुन में एलीसिन दवा की क्षमता बढ़ाकर फंगल जर्मिनेशन कम करता है

काेराेना के बाद ब्लैक, वाइट और येलाे फंगस के मरीजों का ग्राफ बढ़ा है। राजस्थान में 2400 से ज्यादा मामले आ चुके हैं। कई बार इस बीमारी में सर्जरी और दवाएं कारगर नहीं हाेतीं। न्यूराेसर्जन डाॅ. कमल गाेयल ने अलग-अलग जर्नल के हवाले से दावा किया है मरीज काे एंटी फंगल दवा के साथ लहसुन खिलाया जाए ताे फंगल जर्मिनेशन काे कम हो सकता है।

उन्हाेंने वाइट फंगस के काेमा में पहुंचे दाे मरीजों को यह ट्रीटमेंट दिया ताे परिणाम अच्छे आए। चूरू निवासी प्रमाेद (25) काेविड के बाद वाइट फंगस इंफेक्शन से काेमा में चला गया था। परिजन आईबीएस हाॅस्पिटल लाए। डाॅक्टराें ने सर्जरी की और लाइपाेसाेमाल की बजाय एम्फाेटेरिसिन-बी सिम्पल इंजेक्शन के साथ दिन में 3 बार लहसुन खिलाया। कई बार लाइपाेसाेमाल दिन में 8 डोज देने के बाद कारगर नहीं हाेता।

डाॅक्टराें का दावा है लहसुन में एलिसिन एम्फाेटेरिसिन-बी सिम्पल इंजेक्शन की मारक क्षमता बढ़ाकर फंगल साइटाेप्लाज्म की मेम्ब्रेन सेल को कमजाेर कर जर्मिनेशन कम करता है। पब मेड, एनसीबीआई समेत विश्व के 110 जर्नल में इसका दावा है।

डाॅ. कमल गाेयल बताते हैं ब्लैक, वाइट और येलाे फंगस का बड़ा कारण कमजाेर इम्यूनिटी है। काेविड से इम्यूनिटी कमजाेर हाे जाती है। वायरस लिम्फाेसाइट्स, ल्यूकाेसाइट्स सेल्स कम कर देता है। इससे आंख, नाक और ब्रेन में फंगस इंफेक्शन फैलता है। इंफेक्शन इतना खतरनाक है कि इसमें मृत्यु दर 50% से अधिक है। जरूरी है कि स्टेरायड्स का यूज आईसीएमआर के प्राेटाेकाॅल के तहत हाे और शुगर लेवल की माॅनिटरिंग की जाए। काेविड के बाद मरीज काे दांत, आंख, सिर में दर्द, चेहरे पर सूजन, नजर में धुंधलेपन हाे ताे तुरंत डाॅक्टर्स से परामर्श लेना चाहिए।