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फैसिलिटी जमीन पर पट्‌टा नहीं:राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगरीय विकास विभाग बैकफुट पर; स्कीम पर रोक लगाई

जयपुर18 दिन पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद गहलोत सरकार बैकफुट पर आ गई। नगरीय विकास विभाग ने प्रशासन शहरों के संग अभियान में जो फैसिलिटी एरिया की जमीन पर भी पट्टे देने के आदेश दिए थे, उसे वापस ले लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट में यह याचिका पर सुनवाई के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को यह आदेश दिए हैं।

राज्य सरकार ने पिछले दिनों 'प्रशासन शहरों के संग अभियान' के तहत एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में पहले से अप्रूव हाउसिंग स्कीम में अगर फैसिलिटी एरिया की जमीन नहीं होती है तो उस जमीन के बदले उतनी जमीन के मूल्य के बराबर राशि फैसिलिटी सेस के रूप में भूखंडधारियों से लिए जाएंगे। इस आदेश का अप्रत्यक्ष रूप से मतलब था कि अगर किसी व्यक्ति का मकान या अन्य कोई निर्माण योजना की फैसिलिटी जमीन पर बना है तो उसकी राशि लेकर उस जमीन का पट्टा जारी किया जा सकेगा। इसके अलावा जिन कॉलोनियों में 30 फीसदी से भी कम फैसिलिटी एरिया है, वहां भी फैसिलिटी सेस सभी भूखंडधारियों से बराबर-बराबर लेकर उस कॉलोनी का नियमन किया जाए।

सरकार के इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। इसके बाद राज्य सरकार ने अपने आदेशों को वापस लेते हुए फैसिलिटी कम होने पर सेस लेकर कॉलोनी का नियमन करने या भूखंड के पट्टे जारी करने की प्रक्रिया को रोक दिया। साथ ही, इस नए प्रावधान को भी प्रशासन शहरों के संग अभियान से हटा दिया है।

सोसायटियों ने दे दिए फैसिलिटी लैंड पर प्लॉट के पट्‌टे
जयपुर सहित राज्य के कई शहरों में गृह निर्माण सहकारी समितियों (सोसायटी) ने सैंकड़ों कॉलोनियां बसाई हैं। इन कॉलोनियों में सोसायटी के पदाधिकारियों ने फैसिलिटी एरिया के लिए रिजर्व रखी जमीन पर भी लोगों को धोखे में बेच दिया। इसके बाद लोगों ने इन भूखंडों पर मकान भी बना लिए। जब जमीनों का नियमन हुआ और कैंप लगे तो ऐसे लोगों के मकान और जमीन फैसिलिटी एरिया में आने के कारण फंस गए। ऐसे लोग लंबे समय से जेडीए व प्रदेश की दूसरी नगरीय निकाय में अपने भवनों का पट्टा लेने के लिए चक्कर काट रहे हैं।

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