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भयावह कोरोना:आरयूएचएस में ऑक्सीजन वाले सभी 225 बेड फुल 25 गंभीर मरीज लौटाए जा रहे, एसएमएस को बनाएं कोविड अस्पताल

जयपुर9 दिन पहले
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आरयूएचएस हॉस्पिटल 9 मंजिला है। आईसीयू में कोरोना पेशेंट के लिए बेड खाली नहीं हैं। वेंटीलेटर भी फुल
  • घर में रहें क्योंकि संक्रमित हुए तो अस्पताल फुल हैं; निजी अस्पतालों में भी बेड खाली नहीं
  • गंभीर मरीजों पर भी विभाग गंभीर नहीं, विकल्प पर विचार करे सरकार
  • सिस्टम की सांस फूली; प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन वाले बेड नहीं

कल्पना से परे कोरोना डरा रहा है। हर संक्रमितों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। क्या सरकारी...क्या प्राइवेट सभी अस्पतालों में कोरना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक-एक बेड के लिए मशक्कत हो रही है। सरकारी आंकड़ों में भले ही हर दिन मृतकों की संख्या दो से तीन...बताई जा रही हो, जिस तरह आक्सीजन-वेंटिलेटर की मांग बढ़ रही है, हालात चिंताजनक हैं। प्रदेश के सबसे बड़े कोविड अस्पताल आरयूएचएस में 225 ऑक्सीजन सिलेंडर वाले बेड हैं और सभी फुल हैं। हर दिन 25 से अधिक मरीजों को ‘व्यवस्था’ नहीं होने की बात कहकर कहीं और जाने को कह दिया जाता है।

गंभीर मरीजों के लिए कोई विकल्प नहीं सरकार के पास
गंभीर मरीजों को आरयूएचएस में भर्ती तो किया जाता है पर सुपर स्पेशलिटी डॉक्टर्स नहीं होने से इलाज पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वेंटीलेटर फुल हो चुके हैं तो लोगों के लिए गंभीर होने पर कोई विकल्प नहीं बचता। कमोबेश निजी अस्पतालों में भी यही हालात हैं।

एसएमएस क्यों शुरू नहीं? सवाल यह कि जब आरयूएचएस और जयपुरिया में सुविधाएं नहीं हैं तो एसएमएस में गंभीर मरीजों को भर्ती करना शुरू क्यों नहीं किया जा रहा है। यहां सुपर स्पेशलिटी के भी डॉक्टर्स हैं और अभी अन्य सामान्य मरीजों का भी लोड कम है।

वहीं इस मामले को लेकर प्राइवेट हॉस्पिटल एंड नर्सिंग होम सोसायटी के सचिव डॉ. विजय कपूर ने कहा कि तेजी से मरीज बढ़ रहे हैं। डॉक्टर्स भी तेजी से चपेट में आ रहे हैं और उनके लिए बेड के बंदोबस्त नहीं हो पा रहे हैं। गंभीर स्टाफ के लिए अस्पताल नहीं बचे हैं। ऐसे में एसएमएस अस्पताल को ही डेडिकेटेड कोविड अस्पताल घोषित किया जाए।

आरयूएचएस प्रबंधन ने कहा-संदिग्ध मरीज यहां न भेजे जाएं
आरयूएचएस में कोविड के 80 सस्पेक्ट मरीज भर्ती हैं। इनमें से अधिकांश एसएमएस से रेफर किए गए हैं। इसे लेकर बुधवार को आरयूएचएस स्टाफ ने जिला कलक्टर को कहा है कि आरयूएचएस में सस्पेक्ट मरीज नहीं भेजे जाएं। एसएमएस व अन्य अस्पतालों में इन्हें भर्ती कर इलाज किया जा सकता है। अब जबकि यहां काफी पॉजिटिव मरीज हैं तो सस्पेक्ट के लिए खतरा बढ़ जाता है और व्यवस्थाएं करना मुश्किल होता है।

कहने को डॉक्टर्स के लिए फ्लोर, मगर है कुछ नहीं
कहने को आरयूएचएस में 9वीं फ्लोर डॉक्टर्स और स्टाफ के लिए रखी गई है जिस पर 50 बेड लगाए गए हैं। लेकिन फिलहाल इनमें से अधिकांश पर वीआईपी के परिचित ही भर्ती हैं। इसके अलावा यहां ना तो अलग से टॉयलेट की सुविधा है और ना ही ऑक्सीजन के बेड। ऐसे में स्टाफ के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं है।

आंकड़े जो डराते हैं मगर फिर भी हमें कोरोना को हराना है

  • 700 बेड हैं आरयूएचएस में। जिनमें से 520 पर मरीज हैं
  • डराने वाली बात यह कि ऑक्सीजन सिलिंडर वाले 225 बेड ही हैं और सभी फुल हैं
  • 20-25 मरीज ऐसे आते हैं, जिन्हें जरूरत होती है और उन्हें कहीं ओर जाना पड़ता है रोजाना

अब तक की स्थिति

पॉजिटिव16039
डेथ304
रिकवर9899
डिस्चार्ज9899
एक्टिव केस5836
प्रवासी750

जयपुर में अब तक का आंकड़ा 16 हजार के पार

जयपुर में 367 नए संक्रमित, दो की मौत, जगतपुरा में 65 केस

शहर में कोरोना बेकाबू होता जा रहा है। एसएमएस, स्वास्थ्य भवन, एनएचएम, सीफू, राजस्थान नर्सिंग काउंसिल, जेल, परिवहन विभाग, यूनिवर्सिटी, सचिवालय, सीएमअो, हाईकोर्ट, पुलिस के बाद अब जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में भी कोरोना संक्रमित मिल रहे है। जयपुर में बुधवार को 367 नए संक्रमित में से दो की मौत हुई है। जयपुर में ज्यादा केसेज मिलने वालों में जगतपुरा-65, सांगानेर-60, मानसरोवर -48, मालवीय नगर-39, दुर्गापुरा-29, गोपालपुरा -24, बस्सी -16 है।

कहां-कितने केसेज
सीतापुरा, दुर्गापुरा में 8-8, हिंगोनिया-6, टोंक रोड़-5, भांकरोटा, चाकसू, लूनियावास में 4-4, त्रिवेणी नगर, गुर्जर की थड़ी में तीन-तीन, बनीपार्क, झालाना, जोबनेर, महेश नगर, फागी, सोडाला, टोंक फाटक, वैशाली नगर में दो-दो, गोनर, गोनेर रोड़, हरमाड़ा, जवाहर नगर, माणक चौक, फुलेरा, राजापार्क, रिद्वि-सिद्वि, तिलक नगर में एक-एक संक्रमित मिला है।

जयपुर में संक्रमित मरीज सबसे ज्यादा लेकिन ठीक होने वाले महज 61 फीसदी

राजधानी में कोरोना संक्रमित मरीजों का ग्राफ जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, लेकिन यहां पर दवा, जांच, इलाज और हरेक तरह की सुविधा होने के बावजूद रिकवरी रेट महज 61 फीसदी है। जिसका कारण पॉजिटिव मरीजों की संख्या के साथ ही अस्पताल में मरीजों का भर्ती होना है।

रिकवरी रेट कम होने से कोरोना पर काबू का दावा करने वाली सरकार भी सवालों के घेरे में है। जबकि देश का 78 फीसदी और राजस्थान का रिकवरी रेट 82 फीसदी है। डॉक्टरों के अनुसार रिकवरी रेट बढ़ने का कारण लोग जागरुक हो रहे हैं।

वायरस से कैसे लड़ना है और खुद को कैसे सुरक्षित रखना है, वे समझ रहे हैं। इसके अलावा होम अाइसोलेशन है, जहां पर 14 दिन क्वारंटाइन रहना पड़ता है। और दूसरा सैंपल भी नहीं लेना पड़ता। कोरोना संक्रमण ठीक होने के बाद ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। दोबारा इसके संक्रमण की चपेट में न आएं। इसके लिए पोस्ट कोविड केयर गाइड लाइन का सख्ती से पालना करनी चाहिए।

कितना रिकवरी रेट
नाम रिकवरी रेट

भरतपुर 94%
अलवर 93%
पाली 93%
बीकानेर 91%
अजमेर 90%
उदयपुर 86%
जोधपुर 84%
कोटा 65%
जयपुर 61%

(बुधवार को सुबह 10.30 बजे जारी रिपोर्ट के आधार पर)

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