पढ़ाई की पॉलिटिक्स:विधायकों को खुश करने के लिए 209 सरकारी कॉलेजों की घोषणा; खुले 122, 112 में सिर्फ बीए

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: अर्पित शर्मा
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प्रोफेशनल कोर्सेज तो दूर बीकॉम-बीएससी पढ़ने वाले दूसरी जगह जाने को मजबूर। - Dainik Bhaskar
प्रोफेशनल कोर्सेज तो दूर बीकॉम-बीएससी पढ़ने वाले दूसरी जगह जाने को मजबूर।

पक्ष और विपक्ष के विधायकों को खुश करने के लिए सरकार ने अपने पहले तीन बजट में ताबड़तोड़ 209 कॉलेज खोलने की घोषणा तो कर दी, लेकिन अब तक खोले गए 122 में से 112 कॉलेजों में सिर्फ बीए की पढ़ाई कराई जा रही है। प्रोफेशनल कोर्सेज तो दूर आस-पास की स्कूलों से पास आउट बीकॉम एवं बीएससी तक के स्टूडेंट्स को सुदूर इलाकों में कॉलेज जाना पड़ रहा है। अब इस बजट में 87 कॉलेज घोषित किए गए थे, इनमें से 32 कॉलेजों की लिस्ट जारी की गई है और उनमें भी सिर्फ बीए ही शुरू किया जाएगा।

सरकारी-प्राइवेट कॉलेजों में नामांकन की स्थिति
सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों की मिलाकर बात करें ताे आट्‌र्स में इस साल 8,89,328 छात्र-छात्राओं का नामांकन हुआ। इनमें 4.84 लाख ताे छात्राएं ही हैं। वहीं, साइंस में करीब 3 लाख और कॉमर्स में यह संख्या करीब 86 हजार है। आट्‌र्स में छात्राओं का एडमिशन ज्यादा हाेने का एक कारण यह भी है कि सरकारी कॉलेजों में सिर्फ बीए है और दूर जाने में परेशानी हाेती है। प्रदेश के करीब 372 सरकारी कॉलेजों में 2021-22 सेशन में 5,08,628 छात्र-छात्राओं का नामांकन हुआ है। जिनमें 243390 छात्र और 265238 छात्राएं हैं।

3 साल में खोले गए कॉलेजों में साइंस के विषयों के लिए ताे इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं
पिछले तीन साल में खाेले गए काॅलेज अस्थाई ताैर पर सरकारी स्कूलों या अन्य भवनों में चल रहे हैं। सरकारी कॉलेजों में साइंस के विषयों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब्स वगैरह की कमीं हैं। तीन साल में खुले 122 कॉलेजों में से सिर्फ 4 में ही साइंस के विषय शुरू किए गए। इंफ्रास्ट्रक्चर की कमीं का पिछले साल कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था। काॅलेज आयुक्तालय ने हाल ही में 32 नए कॉलेजों के लिए विषय स्वीकृत किये हैं। जिनमें सिर्फ बीए के विषय ही हैं। इसके अलावा जयपुर के गणगौरी बाजार गर्ल्स काॅलेज के लिए भी 46 पद और वित्तीय स्वीकृति जारी की है।

2 कमराें के कॉलेज खोलने से नहीं हाेगा भला, रोजगार दिलाने वाले विषय भी चाहिए

  • सरकार काे काॅलेज खाेलने ही हैं ताे बीकाॅम, बीएससी से लेकर बीबीए, बीसीए भी शुरू किए जाएं ताकि छात्रों काे राेजगार मिल सके। 2 कमराें के काॅलेज खाेलने से भला नहीं हाेगा। हालांकि इसके लिए इनवेस्टमेंट, लैब्स, इंस्ट्रूमेंट ज्यादा चाहिए। दूसरी ओर आर्ट्स के भी जाे सब्जेक्ट चलाए जा रहे हैं उनमें भी कॉम्बिनेशन ठीक नहीं हैं। पॉलिटिकल साइंस, हिस्ट्री जैसे सब्जेक्ट ताे सब में हैं लेकिन साेश्याेलाॅजी जैसे विषय काफी कम जगह हैं। - प्राे. के एल शर्मा, पूर्व कुलपति आरयू
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