सीरो सर्वे का सच:राजस्थान के 76.2% लोगों में नहीं बनी एंटीबॉडी, क्योंकि सर्वे 4 जिलों में ही हुआ

जयपुर9 महीने पहलेलेखक: डूंगरसिंह राजपुरोहित
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आईसीएमआर ने कहा- सही तस्वीर जानने के लिए कुल 33 जिलों ​​​​​​​मेें से कम से कम 11 जिलों में सर्वे कराना जरूरी। - Dainik Bhaskar
आईसीएमआर ने कहा- सही तस्वीर जानने के लिए कुल 33 जिलों ​​​​​​​मेें से कम से कम 11 जिलों में सर्वे कराना जरूरी।
  • केंद्र के सीरो सर्वे से ये न मान बैठें कि हम तीसरी लहर से सेफ हो गए

अगर आप भी केंद्र के सीरो सर्वे की रिपोर्ट में यह पढ़कर बेफिक्र हो गए हैं कि राजस्थान के 76.5% लोगों में एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है और तीसरी लहर से घबराने की जरूरत नहीं है तो कृपया ध्यान दीजिए। आईसीएमआर का साफ-साफ कहना है कि इस रिपोर्ट का मतलब ये कतई नहीं है कि पूरे राजस्थान में 76.2% लोगों में एंटीबॉडी बन गई है।

राजस्थान सरकार अपनी खुद की सीरो सर्वे और सीरो प्रिवेलेंस स्टडी कर एंटीबाडी का पता लगाए। इसके लिए कम से कम एक तिहाई यानी 11 जिलों में रैंडम सैंपल लेकर सर्वे स्टडी करनी होगी, तब पता चलेगा कि वास्तव में राजस्थान में कितने लोगों में एंटीबाॅडी विकसित हो गई है।

पहले नए वैरिएंट का तो पता चले, तब कहें कि तीसरी लहर से सेफ है या नहीं:डाॅ. रावत

इंदौर के मेदांता अस्पताल के डायरेक्टर भरत रावत का कहना है कि 76.2% लोगों में एंटीबॉडी बन भी गई हो, तब भी पहले यह तो पता चले कि तीसरी लहर लाने वाला स्ट्रेन कौन सा होगा? नया स्ट्रेन हुआ तो फिर बचने की संभावना कम है। उस पर इस एंटीबाॅडी का कम असर होगा।

पुराना ही हुआ तो सेफ कह सकते हैं। हर्ड इम्युनिटी भी पुराने वैरिएंट के लिए विकसित हो सकती है, नए वैरिएंट में पुरानी हर्ड इम्युनिटी किसी काम की नहीं है। आंशिक रूप से यह बात सही है कि अगर बड़ों को टीके लगे हुए हैं तो बच्चों को खतरा कम है।

भास्कर EXPLAINER; सवाल: लोगों को कैसे पता चलेगा कितनों में एंटीबॉडी बनी है? जवाब- राज्य को 2 महीने से लिख रहे हैं कि स्टेट सीरो सर्वेे कराएं, पर वे सुन ही नहीं रहे हैं

आईसीएमआर के एपिडेमोलाॅजी एंड कम्यूनिकेबल डिजीजेज (ईसीडी) हेड डाॅ. समिरन पांडा ने दैनिक भास्कर को बताया कि कैसे हुआ ये सीरो सर्वे? और इसका क्या मतलब है? पढ़िए, वो सब जो आपके लिए जानना जरूरी है...

Q. सीरो सर्वे में राजस्थान में 76.2% लोगों में एंटीबाॅडी विकसित होना बताया है, तो क्या राजस्थान अब सेफ हैं?

हमने तो देश के 70 जिलों में राजस्थान के रैंडम 4 जिले लिए। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि 33 जिलों की 76.2% आबादी में एंटीबाॅडी पनप गई और वे सेफ हैं।

Q. आपने राज्य का नाम लिखकर रिपोर्ट जारी की है। तो फिर प्रदेश के 4 जिलों का उल्लेख क्यों नहीं किया?
हमने देश के 70 जिले ही लेकर रैंडम सीरो सर्वे करवाया है। किसी राज्य का पूरा सर्वे नहीं कराया गया है।

Q. क्या दिल्ली के आदेशों की पालना में राजस्थान की कोई कमी रही? राजस्थान की जनता को कैसे पता चलेगा कि कितने प्रतिशत लोगों में एंटीबाॅडी विकसित हो चुकी है?

हम 2 माह से कह रहे हैं और लिखित आदेश दे चुके हैं। लेकिन राज्य ने न तो अपना डिस्ट्रिक्ट लेवल डाटा तैयार कराया और न ही सीरो प्रिवलेंस स्टडी करवाई। राजस्थान सरकार खुद अपने स्तर पर स्टडी नहीं करवाएगी, तब तक कैसे पता चलेगा कि स्टेट सीरो सर्वे में क्या निकला? 50 या कितने प्रतिशत लोगों में एंटीबाॅडी विकसित हुई?

Q. किसी राज्य ने अपने स्तर पर सीरो सर्वे करवाया है क्या?
हां! दिल्ली सरकार द्वारा कई छोटे-छोटे इलाकों में बांटकर अपना सीरो सर्वे करवाया है।

Q. क्या तीसरी लहर आई तो राजस्थान के बच्चे सेफ रहेंगे?
दूसरी लहर में भी बच्चे सबसे कम संक्रमित हुए। बड़े ही ज्यादा भर्ती हुए। सभी जिलों के एंटीबाॅडी डाटा एकत्रित कर यदि 70 प्रतिशत से अधिक एंटीबाॅडी विकसित हो चुकी है तो बच्चे आगे के संक्रमण को भी झेल लेंगे।

Q. क्या एंटीबाॅडी और वैक्सीनेशन के आधार पर राजस्थान में बच्चों को स्कूल भेज सकते हैं?
स्कूलों में स्टाफ और सफाईकर्मी के अनिवार्य वैक्सीनेशन और घर में सभी परिजनों के टीके लगने पर बच्चों को स्कूल भेज सकते हैं। बच्चों में वैरिएंट से लड़कर उबरने की क्षमता ज्यादा पाई गई है।