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महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में चलेगी प्री-प्राइमरी कक्षाएं:8 से 15 नवंबर तक कर सकते हैं आवेदन, 17 नवंबर को निकाली जाएगी लॉटरी; ऐसा करने वाला पहला राज्य है राजस्थान

जयपुर21 दिन पहले
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राजस्थान के महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अब पूर्व प्राथमिक (प्री-प्राइमरी) कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है। जिसके लिए 8 नवंबर से 15 नवंबर तक एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो रही है। जिसमें ऑफलाइन के साथ ही आवेदक शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भी आवेदन कर सकते हैं।

प्री प्राइमरी क्लासेज में एडमिशन के आवेदन के बाद लॉटरी से छात्रों की सूची तैयार की जाएगी। जिसमें स्कूल के नजदीक और आस-पड़ोस में रहने वाले छात्रों को एडमिशन में पहली प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद 17 नवंबर को लॉटरी निकाली जाएगी। जबकि 18 नवंबर को चयनित विद्यार्थियों की सूची जारी होगी। इसके साथ ही प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर ही महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में भी केयरटेकर और सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएंगे।

प्री-प्राइमरी कक्षाओं की अवधि 3 साल की होगी। इसमें नर्सरी, केजी वन और केजी टू होगा। इन कक्षाओं में 3 साल और उससे अधिक आयु के बच्चों को प्रवेश दिया जाएगा। हर सेक्शन में विद्यार्थियों की संख्या 25 होगी और उन्हें पढ़ने के लिए शिक्षकों का चयन लेवल 1 अध्यापकों में से वॉक इन इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा।

शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा ने बताया की प्री-प्राइमरी कक्षाओं में RSCERT द्वारा विशेष रूप से तैयार पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। इसके साथ ही कक्षाएं प्रतिदिन 4 घंटे और सप्ताह में पांच दिन संचालित होगी। जिनका संचालन महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों के वर्तमान भवन में किया जाएगा। वहीं अतिरिक्त कक्षा कक्ष की जरूरत होने पर स्कूलों में अलग से भवन निर्माण किया जाएगा। राजस्थान अंग्रेजी माध्यम में सरकारी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाओं का संचालन करने वाला वर्तमान में देश का एकमात्र राज्य भी बन गया है।

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में इसकी घोषणा की थी। इसमें प्रदेश के अंग्रेजी स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं शुरू करने का वादा किया गया था। ऐसे में मुख्यमंत्री के वादे को पूरा करते हुए इसी सत्र से स्कूलों में छात्रों का प्रवेश शुरू कर दिया जाएगा। इससे ना सिर्फ शिक्षा के स्तर में सुधार होगा, बल्कि राजस्थान के शैक्षणिक माहौल में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा भी पैदा होगी। इसका सीधा फायदा अभिभावकों और छात्रों को मिलेगा।

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