दूषित हवा से लंग्स डैमेज होने का खतरा बढ़ा:AQI 300 के पार, अस्थमा के मरीज 30% बढ़े, एसएमएस में रोज ओपीडी 500 से अधिक

जयपुर10 महीने पहले
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सर्दी और प्रदूषण का जहर अब शहरियों को बीमार करने लगा है। - Dainik Bhaskar
सर्दी और प्रदूषण का जहर अब शहरियों को बीमार करने लगा है।

सर्दी और प्रदूषण का जहर अब शहरियों को बीमार करने लगा है। हाल यह है कि प्रदूषण का स्तर 300 से अधिक पहुंच गया है। इस कारण एलर्जी-अस्थमा और क्रॉनिक ऑबस्ट्रेक्टिव पल्मोनरी डिजीज के मरीज 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इधर, एसएमएस में जहां हर दिन 200 मरीज अस्थमा के आते थे अब 500 से अधिक आ रहे हैं। इसके अलावा सामान्य ओपीडी जहां 5000 थी वह भी अब 9000 से अधिक पहुंच गई है। मरीजों को घंटों तक का इंतजार करना पड़ रहा है।

एसएमएस में नार्मल ओपीडी 5000 से 9000 तक पहुंची
पीएम लेवल .1 पर है, तो वह सबसे ज्यादा खतरनाक है। इस लेवल पर धूल के कण सांस के जरिए लंग्स से होते हुए सीधे ब्लड में चले जाते हैं, जो ब्रेन और हार्ट के लिए खतरनाक है। इससे हार्ट फैलियर के अलावा ब्रेन में न्यूरो संबंधी बीमारियां हो जाती हैं।

निम्स के डॉ.नलीन जोशी और आंच अस्पताल के अस्थमा-एलर्जी विशेषज्ञ डॉ एम के गुप्ता ने बताया कि अस्थमा के मरीजों को सर्दियों में अल सुबह ओस या कोहरे के समय मॉर्निंग वॉक करने से बचना चाहिए। इसकी वजह है कि ओस या कोहरे में धूल के कण और पॉल्यूशन हवा में ऊपर न जाकर नीचे ही ओस के कारण रुक जाते हैं। वॉक के दौरान अस्थमा अटैक को बढ़ा देते हैं। ऐसे में धूप निकलने के बाद वॉक करें। इन मरीजों को घर से निकलते ही मास्क का उपयोग करना चाहिए।

पीएम लेवल जितना कम, उतना अधिक खतरनाक
मणिपाल अस्पताल के एलर्जी-अस्थमा डॉ. विकास पिलानिया ने बताया हवा में पीएम का लेवल जितना कम होगा, यह उतना ही खतरनाक है। 10 माइक्रोन लेवल पर पर धूल के कण नाक तक ही सीमित रह जाते हैं। इससे छोटे यानी 2.5 पीएम पर धूल के कण नाक, मुंह के जरिए फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं, जिससे लंग्स की वर्किंग कैपेसिटी इफेक्ट होती है।