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भास्कर रियलिटी चेक:अंधड़-बारिश आते ही शहर के 90 हजार घरों की बिजली गुल हुई, 6 हजार घरों में 24 घंटे बाद भी अंधेरा कायम रहा

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: श्याम राज शर्मा
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विभाग का दावा-2 दिन में सिर्फ 4000 शिकायतें आईं; एचटी फीडर के रिंग सिस्टम व रिंग मेन यूनिट के बावजूद अंधेरे में रहते हैं उपभोक्ता - Dainik Bhaskar
विभाग का दावा-2 दिन में सिर्फ 4000 शिकायतें आईं; एचटी फीडर के रिंग सिस्टम व रिंग मेन यूनिट के बावजूद अंधेरे में रहते हैं उपभोक्ता

जयपुर डिस्कॉम ने राजधानी के बिजली सिस्टम को अपग्रेड करने, बिजली लाइन अंडरग्राउंड और रिंग मेन यूनिट लगाने पर 8 साल में 700 करोड़ खर्च कर दिए हैं, इसके बाद भी सोमवार की रात अंधड़ और बारिश आते ही 90 हजार से ज्यादा घरों में बिजली गुल हो गई। स्थिति यह है कि 6 हजार घरों में 24 घंटे बाद भी अंधेरा कायम है।

एचटी फीडर पर रिंग सिस्टम और रिंग मेन यूनिट के बावजूद लाइन चेंज कर बिजली सप्लाई चालू नहीं हो पाई। आंकड़ों में गफलत के लिए पूरा फीडर बंद होने पर काॅल सेंटर में शिकायत दर्ज नहीं की गई। काॅल सेंटर के रिकॉर्ड में सोमवार को सिर्फ 1500 घरों में बिजली बंद दिखाया है।

मंगलवार को 2500 कनेक्शन पर बिजली बंद बताई गई। लोगों ने काॅल सेंटर पर फोन भी किया, लेकिन ‘नो रेस्पॉन्स’ रहा। इंजीनियरों ने फोन रिसीव ही नहीं किए। शहर में केवल 1029 एचटी फीडर हैं, जिसमें से 138 फीडर में बिजली बंद रही। लाइनों पर 4108 आरएमयू लगा रखे हैं।

पूरा सिस्टम सुधारने में समय लगेगा, हमारी प्रक्रिया जारी है : डिस्कॉम
10000 किमी एलटी लाइन है शहर में 1500 किमी ही अंडर ग्राउंड है सिर्फ 4000 एचटी लाइन, 3000 किमी ही अंडरग्राउंड है।
एसई अभियंता एके त्यागी का कहना है ज्यादातर शिकायतें बाहरी इलाकों सांगानेर, करधनी, पुराना घाट, जगतपुरा की हैं। 46 पोल गिरे और 9 ट्रांसफार्मर भी खराब हुए।

जयपुर डिस्कॉम के दावे और हकीकत
दावा 1: ओवरहेड बिजली लाइनों व एचटी फीडर को अंडरग्राउंड करने से तार नहीं भिड़ेंगे और बिजली गुल नहीं होगी।
हकीकत : बिजली लाइनों को कम गहराई पर अंडरग्राउंड किया। कई जगह लाइन ओवरहेड ही है। बारिश व अंधड़ आते ही फॉल्ट व ट्रिपिंग से बिजली गुल हो जाती है। सड़क पर पानी भरते ही करंट आ जाता है।

दावा 2 : 10 साल में 600 करोड़ से सिटी सर्किल में ऑटोमेटिक आरएमयू लगाए और फीडरों को ग्राउंड केबल में बदला ताकि फॉल्ट से बंद लाइन दूसरे फीडर से चालू हो सके। हकीकत : आरएमयू फीडर के बीच में लगाने थे, लेकिन ठेकेदारों ने ट्रांसफार्मर के पास लगा कर पेमेंट लिया। इससे ट्रांसफार्मर या फीडर में फॉल्ट या ट्रिपिंग आने पर पूरा इलाका ही बंद हो जाता है।

दावा 3 : बिजली लाइनों की रिंग बनाने पर 200 करोड़ रुपए खर्च किए। ताकि एक लाइन बंद होने पर दूसरी लाइन से जोड़ दे और तत्काल बिजली सप्लाई चालू हो। हकीकत : इंजीनियरों ने ठेकेदारों से मिलीभगत कर रिंग सिस्टम के नाम पर एक जगह ही दो -तीन लाइनें डालकर पेमेंट उठा लिया। केबल में फॉल्ट ढूंढने में 8 से 48 घंटे तक का समय लग जाता है।

दावा 4 : बिजली बंद होने पर तार सही करने पर टीम एम-सील लगा कर मजबूत कर देगी। हकीकत : टीम एम-सील नहीं लगाती है। एक ही कनेक्शन में कई बार बिजली गुल होती है।