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महिला माइनिंग इंजीनियर संध्या रासकतला का इंटरव्यू:15 की उम्र में पापा के साथ कोयला खदान में गई, तभी ठान लिया था- ये खदानें ही मेरी जिंदगी बनेंगी, आज पहली महिला माइनिंग इंजीनियर हूं

जयपुर2 महीने पहले
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संध्या रासकतला, महिला माइनिंग इंजीनियर। - Dainik Bhaskar
संध्या रासकतला, महिला माइनिंग इंजीनियर।

भूमिगत खदान के परिचालन का चुनौती पूर्ण क्षेत्र चुना, कोर्ट के दखल के बाद प्रतिबंधित श्रेणी में पहली महिला खान प्रबंधक बनीं संध्या रासकतला.....

आपकी ज्यादातर सहपाठी ने अन्य कोर्स और फील्ड चुने, आपने माइनिंग फील्ड क्यों चुना?
जवाब:
ज्यादातर ने कंप्यूटर साइंस लिया था। मैंने सोचा, काम तो सभी जगह करना होता है। टाइमिंग, क्वालिटी जैसी चीजें सभी जगह मायने रखती हैं। कभी काम में कमी रही तो सुनने को भी मिलेगा। फिर क्यों न कुछ अलग करूं। पढ़ना, आगे बढ़ना और कुछ करना ही है तो बड़ी चुनौती की तरफ क्यों न बढूं।

आपके पिता तो कोल माइंस में ही कार्यरत रहे, उन्होंने किस तरह के अनुभव बताए?
जवाब:
परिवार ने मुझे कभी नहीं रोका। बस यही शर्त थी कि जो भी काम करना चाहो, पहले परिवार को बता दो। मैंने अपना फैसला बताया, परिवार ने पूरा साथ दिया।

पहली बार कोल माइंस में उतरीं तब कैसा लगा, माइनिंग फील्ड में जाने का इरादा नहीं बदला?
जवाब:
पहली बार पापा के साथ कोल माइंस में उतरी तब 15 साल की थी। आठवीं में पढ़ती थी। वहां सब काला-काला था। एक बार तो लगा कि कैसे होगा। फिर ठान लिया कि काम तो यही करना है। अंदाजा लग गया था कि मैटल माइंस में भी ऐसा ही कुछ होगा। वैसे भी हम लोग उस एरिया में रहते थे, जहां दिन-रात मशीनें चलती थीं। ब्लास्टिंग भी होती थी। हम इस माहौल के अभ्यस्त थे।

कहीं से तीखी प्रतिक्रियाएं भी मिली होंगी?
जवाब:
पापा के साथ विजिट करने गई तब उनके ही किसी साथी कर्मचारी ने कहा, इसके लिए माइनिंग क्यों चुन रहे हो? पापा ने कहा, बच्ची की मर्जी है, मैं इसके साथ हूं।

ऐसी कोई चुनौती सामने आई, जिसने आपको परेशान किया, फिर आपने उसे जीत में बदल दिया?
जवाब:
कॉलेज में जब माइनिंग ली, सर ने खूब खरी-खरी सुनाई। कहा कि यह फील्ड ठीक नहीं है, काम करोगी तब पता चलेगा। आगे इसमें कोई फ्यूचर नहीं है। तब बुरा लगा लेकिन जब माइनिंग इंजीनियर बन गई तो उन्हीं सर ने फोन कर शाबाशी दी।

जब इंजीनियर बनकर प्लांट पर पहुंचीं तो व्यक्तिगत रूप से कैसा महसूस हुआ?
जवाब:
लगा कि आज जब हर क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं, खुद को प्रूव कर रही हैं, मेरा यह कदम माइनिंग क्षेत्र में लड़कियों के लिए नई राह खोलेगा। जो लड़कियां चुनौती स्वीकार करना चाहती हैं, उन्हें इससे हौसला मिलेगा। अभी जिस हिन्दुस्तान जिंक में कार्यरत हूं, वहां भी सभी ने कहा कि यह क्रान्तिकारी कदम है।

अब आगे के लिए क्या सपना है?
जवाब:
चाहती हूं कि इस फील्ड में देश की पहली महिला सीईओ बनूं।

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