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पटाखा दुकानें सील:राजस्थान में 31 दिसंबर तक पटाखों पर बैन; बेचने पर 10 हजार रुपए और जलाने पर 2 हजार रुपए जुर्माना

जयपुरएक वर्ष पहले
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सुप्रीम कोर्ट पूर्व में आतिशबाजी की समय सीमा तय कर चुका है - Dainik Bhaskar
सुप्रीम कोर्ट पूर्व में आतिशबाजी की समय सीमा तय कर चुका है
  • पटाखा कारोबारियों की याचिका पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई
  • दिवाली ही नहीं, सावों और नए साल पर भी नहीं कर सकेंगे आतिशबाजी
  • दुकानों में बंद हो गए 150 करोड़

सरकार द्वारा पटाखा बिक्री पर 31 दिसंबर तक रोक लगा रखी है। इस रोक को प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने तमाम अस्थायी लाइसेंस आवेदन रद्द कर दिए हैं, सोमवार को पुलिस ने स्थायी लाइसेंस वाली पटाखा दुकानों को भी सील कर दिया।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर राहुल प्रकाश ने सोमवार को स्थानीय थाना पुलिस को आदेश देकर शहर सभी स्थाई लाइसेंस वाली पटाखा शॉप को बंद कर सील लगवा दी। चोरी-छिपे पटाखें बेचने वाले दुकानदारों पर निगरानी रखी जा रही है। शहर में 200 से ज्यादा स्थायी लाइसेंस वाली दुकानें हैं। 160 स्थाई लाइसेंस जयपुर पुलिस व 52 लाइसेंस नागपुर विस्फोटक विभाग से जारी किए हुए हैं।

उधर, हाईकोर्ट ने पटाखों पर पाबंदी के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई 10 नवंबर तक टाल दी है। जस्टिस गोवर्धन बाढ़दार व एमके व्यास की खंडपीठ ने यह निर्देश राजस्थान फायरवर्क्स डीलर एंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन व अन्य की याचिका पर दिया। अधिवक्ता श्वेता पारीक ने मामले में पक्षकार बनने का प्रार्थना पत्र दायर किया।

एसोसिएशन ने कहा है- पटाखों पर पाबंदी के फैसले से हजारों लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। कारोबारियों के करोड़ों रुपए का एडवांस फंस गया है। किसी बड़ी एजेंसी या संस्था ने किसी रिसर्च में दावा नहीं किया है कि पटाखे चलाने से कोरोना फैलेगा। सुप्रीम कोर्ट पूर्व में आतिशबाजी की समय सीमा तय कर चुका है। राज्य सरकार भी बैन के बजाय समय सीमा तय कर दे।

लैंप भी नहीं उड़ा सकेंगे
लैंप भी नहीं उड़ा सकेंगे

दिवाली ही नहीं, सावों और नए साल पर भी नहीं कर सकेंगे आतिशबाजी

राजस्थान में दीपावली और नए साल पर ही आतिशबाजी पर प्रतिबंध नहीं रहेगा, बल्कि नवंबर और दिसंबर में होने वाले विवाहोत्सव में भी पटाखे नहीं चला पाएंगे। सरकार ने कोरोना संकट के बीच प्रदेश में 31 दिसंबर तक आतिशबाजी पर रोक लगा दी है। एडवाइजरी में सरकार ने कहा था कि कोरोना प्रभावित व्यक्तियों की श्वसन क्रिया प्रभावित होती है, इसलिए वायुमंडल को प्रदूषणरहित रखना आवश्यक है।

इसी के चलते जिला प्रशासन व कमिश्नरेट पुलिस ने शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में बिकने वाले पटाखों के लाइसेंस जारी नहीं किए हैं। शहर में करीब 1400 और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 50 पटाखों के लाइसेंस दिए जाते हैं। पटाखों पर बैन लगाने के बाद राज्य सरकार ने भारी जुर्माना भी तय कर दिया है। पटाखे बेचने पर दस हजार रुपए और पटाखे चलाने पर दो हजार रुपए का जुर्माना तय किया है। इसके

लिए राजस्थान महामारी एक्ट में संशोधन करने के बाद गृह विभाग ने अधिसचूना जारी कर दी है। इधर, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पटाखों को लेकर बड़ा फैसला दिया है। एनजीटी ने दिल्‍ली-एनसीआर में 30 नवंबर तक पटाखों पर रोक लगा दी है। इस निर्णय के बाद दीपावली पर लोग आतिशबाजी नहीं कर सकेंगे।

दीपावली के बाद देवउठनी एकादशी सहित डेढ़ माह में 8 बड़े सावे हैं। दीपावली और नववर्ष पर पटाखे चलाने पर रोक का आदेश विवाह में होने वाली आतिशबाजी पर भी रहेगा। 31 दिसंबर तक विवाह या अन्य अवसरों पर भी पटाखे नहीं चलाए जा सकेंगे।

दुकानों में बंद हो गए 150 करोड़

व्यापारियाें ने सरकार-प्रशासन की कार्रवाई काे तानाशाही बताया

जयपुर में लगभग 160 पटाखा व आतिशबाजी दुकानों काे सील करने से पटाखा कारोबारियों का 150 करोड़ रुपया फंस गया है, क्योंकि दुकान-गोदाम सीलबंद होने से पटाखों का स्टॉक खराब होने की आशंका बन गई है। पटाखा व्यापारियों ने पटाखा पर रोक और सीलबंदी को सरकार और प्रशासन की तानाशाही करार दिया है।

इस मामले में पटाखा कारोबारी कानूनी लड़ाई भी लड़ रहे हैं। व्यवसायियों का कहना है कि बंद दुकानों काे सील करना व्यावहारिक नहीं है। इस कदम से प्रदेश में पटाखा कारोबारियों काे करीब 150 कराेड़ रुपए का नुकसान हाेगा। पटाखा उद्योग से जुड़े मजदूरों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। पटाखा कारोबारियों को जीएसटी, आयकर समेत विभिन्न कागजी कार्यवाही काे करने में भी परेशानी पैदा हाेगी। पटाखा उद्योग को अब हाईकोर्ट से उम्मीद है, मंगलवार को वहां सुनवाई होनी है।
^ सरकार की ओर से पटाखों की बिक्री पर राेक के बाद सोमवार को अचानक दुकानें ही नहीं, पटाखा व्यवसायियों के ऑफिस भी सील कर दिए हैं, जबकि मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई तय है। यह अन्याय है। सरकार काे बिना किसी कारण दुकान और कार्यालय सील करने का अधिकार नहीं है। व्यापारी दीये, मोमबत्ती या पूजन सामग्री बेचकर कुछ भरपाई कर सकते थे। हम सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे।
-जहीर अहमद, महामंत्री, एसाे. ऑफ फायरवर्क्स एंड आर्टिस्ट
^ पटाखा दुकानों को सील करने की कार्रवाई गलत है। व्यापारी अपनी दुकान या ऑफिस में नहीं बैठेगा ताे कहां जाएगा? दिवाली सीजन में व्यापारियों ने हमेशा की तरह पटाखों का स्टॉक किया। दुकानें सील होने यह स्टॉक ही सील हो गया है। व्यापारी को ये मौका भी नहीं दिया कि जहां पटाखा बैन नहीं, वहां भेज सकें। प्रशासन काे अपनी कार्रवाई वापस लेनी चाहिए।
सुभाष गाेयल, अध्यक्ष, जयपुर व्यापार महासंघ

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