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डेढ़ साल बाद स्कूल पहुंचे बच्चों का फूलों से स्वागत:पेरेंट्स में तीसरी लहर का डर बरकरार, अधिकांश स्कूलों में पहले दिन सिर्फ 10% छात्र ही पहुंचे स्कूल

जयपुरएक वर्ष पहले
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बीकानेर के एक स्कूल में बच्चों का फूलों से हुआ स्वागत। - Dainik Bhaskar
बीकानेर के एक स्कूल में बच्चों का फूलों से हुआ स्वागत।

राजस्थान में डेढ़ साल बाद सोमवार को पहली से 5वीं तक के स्कूल खुले। पहले दिन जयपुर में सिर्फ 10% छात्र ही पहुंचे। बीकानेर के एक स्कूल में बच्चों पर फूल बरसाकर स्वागत किया गया। पहले दिन स्कूलों ने जितनी तैयारी बच्चों के आने को लेकर की थी, उससे काफी कम बच्चे स्कूल पहुंचे। स्कूल संचालकों का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से बच्चे कम आए, क्योंकि ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन भी पढ़ाई चल रही है। उधर, सरकारी स्कूलों में भी बच्चों की संख्या न के बराबर ही रही। अब निजी और सरकारी स्कूलों का प्रबंधन बच्चों के अभिभावकों को समझाने में जुट गया है।

दैनिक भास्कर की टीम ने जयपुर शहर के करीब 25, जोधपुर के 20, बीकानेर के 15, कोटा के 20, उदयपुर के 14 स्कूलों सहित प्रदेश के 125 निजी और 25 सरकारी स्कूलों के हालात का जायजा लिया। रिपोर्ट चौंकाने वाली मिली। टीम ने पेरेंट्स से बातचीत की तो सामने आया कि कुछ तो बच्चों की वैक्सीन नहीं आने तक भेजने को तैयार नहीं हैं। कई स्कूल ऐसे भी हैं, जिन्होंने पहली से 5वीं तक के बच्चों के लिए ऑफलाइन पढाई शुरू नहीं की है।

बढ़ेगी छात्रों की संख्या
जयपुर के रावत पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर नरेंद्र सिंह ने बताया कि आज पहला दिन था। इस वजह से कम ही छात्र स्कूल पहुंचे। अभिभावक और छात्र आज स्कूल आने वाले छात्रों को देखकर मोटिवेट होंगे। ऐसे में मुझे लगता है आने वाले दिनों में पहली से 5वीं तक के बच्चों की संख्या में भी इजाफा होगा।

ऑनलाइन पढ़ाई की वजह से कम छात्र पहुंचे स्कूल
जयपुर के टैगोर पब्लिक स्कूल की CEO डॉक्टर रुचिरा राठौड़ ने बताया कि कोरोना के डर की वजह से सोमवार को पहले दिन बच्चों की संख्या काफी कम रही है। उन्होंने बताया की पेरेंट्स भी अब बच्चों को घर से ही पढ़ाने के आदी हो गए हैं। इसी वजह से कम संख्या में बच्चे स्कूल पहुंचे।

नोखा के एक स्कूल में तापमान चेक किया गया।
नोखा के एक स्कूल में तापमान चेक किया गया।

वैक्सीन आने तक करूंगी इंतजार
जयपुर के गांधी नगर में रहने वाली अनीता शर्मा ने बताया कि केरल के साथ देश के कई राज्यों में कोरोना फिर से से असर दिखा रहा है। कभी भी राजस्थान में भी विकराल रूप ले सकता है। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजूंगी। जब छोटे बच्चों के लिए वैक्सीन आ जाएगी, तब वैक्सीन की डोज लगने के बाद ही मेरे बच्चे स्कूल जाएंगे।

अजमेर में भी वैसे ही हालात
स्कूल शुरू होने के बाद अजमेर में पहले दिन 20 प्रतिशत बच्चे ही उपस्थित हुए। अजमेर के सरकारी स्कूल टीचर रमेश जोड़ी ने बताया कि पहले दिन स्कूल में पहली से 5वीं तक में करीब 35 बच्चे आए, जबकि असल संख्या 160 से भी ज्यादा है। धीरे-धीरे विद्यार्थियों की संख्या बढेगी।

15% छात्र पहले दिन पहुंचे
जोधपुर के स्कूलों ने सभी बच्चों को बुलाया, क्योंकि क्लास रूम ज्यादा होने से सभी कमरे खोल दिए गए। कई परिजनों ने सहमति पत्र नहीं दिया। उन बच्चों को ऑनलाइन पढाई करवाई गई। सोमवार को 15% बच्चे ही स्कूल आए।

बीकानेर के एक स्कूल में कुछ इस तरह बच्चों ने की पढ़ाई।
बीकानेर के एक स्कूल में कुछ इस तरह बच्चों ने की पढ़ाई।

पहले दिन बच्चों ने बनाई दूरी
उदयपुर में भी स्कूल खुलने के बाद पहले दिन छात्रों की बेरुखी देखने को मिली। लंबे इंतजार के बाद खुले स्कूलों में टीचर छात्रों का इंतजार करते नजर आए। शहरी क्षेत्र के स्कूलों में 20% छात्र पहुंचे। ग्रामीण इलाकों में छात्रों का प्रतिशत घटकर 10% से भी कम हो गया।

छात्रों का रहा टोटा
बीकानेर में राजस्थान के अन्य शहरों जैसा हाल रहा। बच्चों ने ऑनलाइन पढ़ाई करना ही मुनासिब समझा। स्कूल आने वाले छात्रों की संख्या काफी कम थी। ऐसे में स्कूल संचालक पहले दिन छात्रों का इंतजार करते नजर आय।

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