बायो बबल इफेक्ट:जूम पर द्रविड़ की नई पारी शुरू; SMS का यह मैच अब तक के मैचों से जुदा, कोरोना प्रोटोकॉल ने सब बदल दिया

जयपुर6 महीने पहलेलेखक: संजीव गर्ग
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न्यूजीलैंड टीम के टेस्ट खिलाड़ियों ने आरसीए एकेडमी में कड़ी सुरक्षा में प्रैक्टिस की। - Dainik Bhaskar
न्यूजीलैंड टीम के टेस्ट खिलाड़ियों ने आरसीए एकेडमी में कड़ी सुरक्षा में प्रैक्टिस की।

8 साल बाद जयपुर में कोई अंतरराष्ट्रीय मैच होने जा रहा है। न्यूजीलैंड-भारत सीरीज का यह पहला टी-20 है जो कि 17 नवंबर को संवाई मानसिंह सिंह स्टेडियम (SMS) खेला जाएगा। खास बात यह है कि यह पहला टी20 इंटरनेशनल मैच है जो कि जयपुर में खेला जा रहा है। कोविड प्रतिबंध के बाद भारत में यह पहला अंतरराष्ट्रीय मैच है। इसलिए खिलाड़ियों और पब्लिक के लिए भी चीजें सामान्य नहीं हैं। खिलाड़ियों की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई है।

जितने समय वे खेलते हैं उससे ज्यादा समय तो इन्हें क्वारैंटाइन और बायो बबल में रहना होता है। ऐसा ही कुछ क्रिकेट प्रेमियों के लिए भी है। पहले प्रैक्टिस देखने के लिए ही दर्शक उमड़ पड़ते थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। बायो बबल में वे खिलाड़ियों के आसपास तक नहीं जा सकते। न ही अपने पसंदीदा खिलाड़ी के साथ फोटो खिंचवा सकते हैं। कोविड के बाद कैसे बदली खिलाड़ियों की जिंदगी और कैसा होता है क्वारेंटाइन और बायो बबल आइए जानते हैं....

क्वारैंटाइन में ऐसे रहते हैं खिलाड़ी
खिलाड़ियों को अलग-अलग रूम में रहना होता है। एक-दूसरे के कमरे में भी नहीं जा सकते। उनका खाना तक दरवाजे के बाहर ही रख दिया जाता है। 5 दिन तक होटल के कमरे वगैरह की सफाई करने भी कोई नहीं जाता। कोई भी खिलाड़ी किसी दूसरे व्यक्ति के संपर्क में नहीं आता। दरवाजे के सामने खड़े होकर ही खिलाड़ी आपस में बात कर सकते हैं। इस दौरान लगातार खिलाड़ियों का आरटीपीसीआर टेस्ट होता रहता है।

कैसे बनाया जाता है बायो-बबल
क्वारैंटाइनके बाद शुरू होती है बायो बबल की प्रक्रिया। जो खिलाड़ी या सपोर्ट स्टाफ क्वारैंटाइन होते हैं वे ही बायो बबल में शामिल होते हैं क्वारैंटाइन में रहे लोगों के अलावा किसी के भी संपर्क में खिलाड़ी नहीं आ सकते। बस ड्राइवर और क्लीनर वगैरह को भी क्वारैंटाइन रहना पड़ता है। बायो बबल वही एरिया होता है जहां कि खिलाड़ी क्वारैंटाइन के बाद आपस में मिल सकते हैं। साथ खाना खा सकते हैं। प्रैक्टिस करते हैं।

टीमें बायो बबल टू बायो बबल ट्रांसफर होती हैं
टीमें बायो बबल टू बायो बबल ट्रांसफर होती हैं। एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए खिलाड़ियों को चार्टर्ड फ्लाइट से जाना पड़ता है। न्यूजीलैंड टीम UAE में विश्व कप फाइनल खेलने के अगले दिन बायो बबल से बायो बबल में ही जयपुर ट्रांसफर होगी। जयपुर से टीमें जब रांची जाएंगी, तो भी चार्टर्ड फ्लाइट से बायो बबल में ही ट्रांसफर होंंगी।