प्रयोग पड़े भारी:अजब-गजब फैसलाें से उपचुनाव में मात खाती बीजेपी, अब तक छह मुकाबलों में मिली केवल एक ही सीट

जयपुर10 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
धरियावद, वल्लभनगर उपचुनाव में बीजेपी पर रिकॉर्ड सुधारने का रहेगा दबाव। - Dainik Bhaskar
धरियावद, वल्लभनगर उपचुनाव में बीजेपी पर रिकॉर्ड सुधारने का रहेगा दबाव।

राजस्थान में सत्ता परिवर्तन यानी कांग्रेस सरकार बनने के बाद से लेकर अब तक छह उप चुनाव हुए हैं, लेकिन अजब-गजब फैसलाें के कारण भाजपा काे केवल राजसमंद सीट से ही संताेष करना पड़ा। जबकि चार सीटाें पर हार का सामना करना पड़ा। चार सीटाें पर कांग्रेस ने परचम फहराया रहा, जबकि एक सीट आरएलपी के खाते में गई। टिकट देने के मामलों में भाजपा लगातार प्रयाेग कर रही है, जिसका उसे खामियाजा भी उठाना पड़ रहा है। वल्लभनगर और धरियावद में बीजेपी का टिकट देने का प्रायोगिक फॉर्मूला कितना कारगर साबित हाेगा? यह देखना दिलचस्प हाेगा। किस उपचुनाव में भाजपा की क्या रणनीति रही। उसके नतीजे क्या रहे। इसे आप भी पढ़िए।

रामगढ़ : अलवर में जनवरी 2019 में हुए उप चुनाव में साफिया खान 12 हजार 228 वाेटाें से जीती थीं। उन्हाेंने बीजेपी के प्रत्याशी सुखवंत सिंह काे हराया था। बसपा प्रत्याशी जगत सिंह 24156 वाेट लेकर तीसरे स्थान पर रहे थे। बीजेपी ने इस सीट पर पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा का टिकट काटा था, जबकि आहूजा रामगढ़ से तीन बार के विधायक थे।

खींवसर : हनुमान बेनीवाल का गढ़ माने जाने वाली खींवसर सीट पर बीजेपी ने गठबंधन किया था। चूंकि ये सीट 2018 के विधानसभा चुनाव में आरएलपी के पास थी, ऐसे में उप चुनाव में भी आरएलपी के पास गई। यहां बीजेपी ने पूरा दम दिखाया था और आरएलपी के लिए वाेट मांगे गए थे। हालांकि ये गठबंधन सवा दाे साल चला। बेनीवाल ने किसान बिल पर ये गठबंधन ताेड़ दिया था।

मंडावा : यह कांग्रेस की परंपरागत सीटाें में शामिल रही थी। विधानसभा चुनाव-2018 में पहली बार बीजेपी ने यह सीट जीती थी। चुनाव जीते नरेंद्र खीचड़ के सांसद बनने से यह सीट खाली हुई थी। यहां बीजेपी ने उपचुनाव में दांव खेलते हुए झुंझुनूं प्रधान सुशीला सींगड़ा को ऐनवक्त पर पार्टी में शामिल कर प्रत्याशी बनाया था, लेकिन यह दांव उलटा पड़ गया।

सहाड़ा : भीलवाड़ा जिले की सहाड़ा विधानसभा सीट पर लादूराम पितलिया का बीजेपी ने टिकट काटा था। इसके बाद लादूराम काे धमकाने के ऑडियाे अलग-अलग जारी हुए। पितलिया पर कथित दबाव के चलते नामांकन वापस हुअा। जनता के बीच पार्टी की छवि प्रभावित हुई और पार्टी काे सहाड़ा में सबसे बड़ी हार का सामना करना पड़ा। िदवंगत कांग्रेस विधायक की पत्नी गायत्री त्रिवेदी बताैर कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में करीब 42 हजार वोटों से जीती थी।

सुजानगढ़ : यहां उपचुनाव में बीजेपी हार गई थी। इस सीट पर पहले संताेष मेघवाल काे बीजेपी में शामिल किया गया था। ये तय माना जा रहा था कि वे विधानसभा में उम्मीदवार हाेंगी। एेसा इसलिए क्याेंकि 2018 के विधानसभा चुनाव में 38 हजार से अधिक वाेट लेकर आई थीं। उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कुल वाेटिंग का 21% मत मिले थे, जबकि बीजेपी का 24% शेयर था। बीजेपी ने उनका टिकट काटते हुए खेमराम मेघवाल को टिकट दिया था। यहां पर बीजेपी की बड़ी हार हुई थी।

राजसमंद : विधानसभा सीट पर किरण माहेश्वरी की पुत्री काे जब टिकट दिया जा रहा था ताे पार्टी के नेता एकराय नहीं थे। हालांकि साहनुभूति के आधार पर कुछ वरिष्ठ नेताओं ने उन्हीं काे टिकट देने पर अड़े थे । वरना इस सीट पर बीजेपी दूसरे व्यक्ति काे टिकट देने जा रही थी।

खबरें और भी हैं...