पूनिया बोले-BJP से पायलट का कोई लेना-देना नहीं:2018 में राजभवन में दो-दो मुख्यमंत्रियों के नारे लगे, कांग्रेस की पुरानी फिल्म-'गद्दार कौन' ?

जयपुर2 महीने पहले
पूनिया बोले-BJP से पायलट का कोई लेना-देना नहीं

CM अशोक गहलोत के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को गद्दार कहने और पायलट समर्थक विधायकों को गहलोत सरकार गिराने के लिए 10-10 करोड़ रुपए बीजेपी मुख्यालय से पहुंचाए जाने के आरोपों पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने पलटवार किया है। पूनिया ने कहा- बीजेपी से सचिन पायलट का कोई लेना-देना नहीं है। ये कांग्रेस का भीतरी झगड़ा है। उसके दोषी हम कैसे हो सकते हैं ? 2018 में मुख्यमंत्री बनने के बाद दो-दो मुख्यमंत्रियों के नारे राजभवन में लगे थे। बीजेपी ने थोड़े ही लगवाए थे। गहलोत के आरोपों में दम नहीं है। हम पायलट से न कभी मिले, ना बात की। ना पहले जरूरत थी, ना आज है।

पूनिया बोले-ऐसा कभी नहीं होता कि किसी पार्टी को अपने डिप्टी सीएम और पीसीसी चीफ को बर्खास्त करना पड़े। हमने कोई पीले चावल नहीं बांटे थे कि आप जाइए और सरकार गिराइए। ये तो उनका अपना मसला था। बीजेपी को तो एक कारण बनाने की कोशिश की गई है। जबकि झगड़ा उनका अपना था। दोष और पाप उनका अपना था। बीजेपी को तो आरोप लगाने का माध्यम अशोक गहलोत ने अपने बचाव के लिए बना लिया है।

कांग्रेस की पुरानी फिल्म सामने आई- गद्दार कौन ?

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा- कांग्रेस की पुरानी फिल्म सामने आ गई है। फिल्म का नाम है- 'गद्दार कौन' ? उन्होंने अपने इंटरव्यू में कहा बीजेपी के लोग सरकार गिराने के षड़यंत्र में शामिल थे। लेकिन अभी कांग्रेस यह तय नहीं कर पाई गलती किसने की, सजा किसको होगी।राजस्थान की जनता 4 साल से भुगत रही है। सचिन पायलट बीजेपी के नहीं उनके खुदके पीसीसी चीफ और डिप्टी सीएम थे। गहलोत भूल जाते हैं कि 2018 विधानसभा चुनाव में उनको मैंडेट नहीं था। कांग्रेस की 99 सीट थीं। 13 निर्दलीय और 6 बसपा विधायकों को उन्होंने मर्ज किया। जिसकी याचिका अभी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है।

बीजेपी हेडक्वार्टर से पायलट समर्थक विधायकों को पैसा पहुंचाए जाने के आरोपों पर पूनिया बोले- ये तो सियासी आरोप हैं। मैं भी कह सकता हूँ कि अशोक गहलोत ने सरकार बचाने के लिए कितने अनैतिक काम किए होंगे। इसलिए इन सियासी आरोपों का इस समय कुछ नहीं बचता। राजस्थान की जनता और कांग्रेस आलाकमान जानती है कि किसका कंडक्ट कैसा था ? यह तो अशोक गहलोत का पूअर डिफेंस और फेस सेविंग है। मुझे लगता है कांग्रेस ने कुर्सी बचाने के लिए क्या-क्या अनैतिक काम किया होगा। लेकिन उसका मेरे पास कोई सबूत नहीं है। राजनीति में चलती-फिरती बात की कोई तवज्जो नहीं है। उनकी बात से लगता है कि पार्टी की लड़ाई और बिखराव को ढकने के लिए उन्होंने एक कुतर्क का सहारा जरूर लिया है। मुझे इसमें सियासी दम नजर नहीं आता है।

क्या बीजेपी नेता पायलट और विधायकों से नहीं मिले ?

सवाल पर पूनिया बोले- क्यों मिले होंगे, क्या कारण है ? पायलट अपनी मर्जी से अलग हुए। वो हमारे विधायक नहीं थे। उनके पीसीसी चीफ थे। हमने उनको नहीं भेजा। ना उकसाया, ना आमंत्रित किया। कोई अपनी पार्टी से टूटकर जाना चाहे तो क्या करें। बीजेपी मुख्यालय से कैश भेजे जाने पर पूनिया ने कहा- कोई अंधा आदमी भी इस आरोप को स्वीकार नहीं करेगा। अशोक गहलोत जिस तरह की सियासत करते हैं। वो इस तरह के आरोप हमेशा लगाते हैं। जिनका कोई आधार और तर्क नहीं होता है। वह केवल उनके अपने फ्रस्ट्रेशन और निराशा को जाहिर करने का एक तरीका है कि बीजेपी के माथे पर ठीकरा फोड़ा जाए। अलग तो वो हो रहे हैं। गहलोत भी और उनके लोग भी बाड़े में बंद थे।

गहलोत ने पायलट पर फिर दोहराए बगावत और गद्दारी के आरोप।
गहलोत ने पायलट पर फिर दोहराए बगावत और गद्दारी के आरोप।

क्या है पूरा मामला ?

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के राजस्थान आने से पहले कांग्रेस में एक बार फिर भारी खींचतान शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सचिन पायलट पर फिर से पुराने आरोप दोहराए हैं। उन्हें बगावत करने वाला, गद्दार तक कह दिया है। गहलोत ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा- कांग्रेस आलाकमान पायलट को कैसे सीएम बना सकते हैं। जिस आदमी के पास 10 विधायक नहीं हैं, जिसने ​​बगावत की हो, जिसे गद्दार नाम दिया गया है, उसे लोग कैसे स्वीकार कर सकते हैं।

गहलाेत के हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए सचिन पायलट ने कहा है कि वो पहले भी मुझे नाकारा, निकम्मा और गद्दार कह चुके हैं, उन्होंने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं, वे बेबुनियाद हैं। ये समय भाजपा से लड़ने का है, ऐसे झूठे आरोप लगाने की जरूरत नहीं है। वो पार्टी के अनुभवी नेता हैं, उन्हें इतना असुरक्षित नहीं होना चाहिए। हम आज किसी पद पर है, तो जरूरी नहीं है कि हमेशा रहे। पता नहीं कौन मुख्यमंत्री को ऐसी सलाह दे रहा है।

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