उपचुनाव:दाेनाें सीटाें पर भितरघात और बागियाें से घिरने लगी बीजेपी, कांग्रेस दिख रही सेफ

जयपुर18 दिन पहले
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वल्लभनगर व धरियावद विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों ने भरे पर्चे। - Dainik Bhaskar
वल्लभनगर व धरियावद विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों ने भरे पर्चे।

उपचुनाव में टिकट वितरण के बाद वल्लभनगर से लेकर धरियावद तक बीजेपी में भीतरघात और बागियाें ने आवाज बुलंद कर दी है। वल्लभनगर में पार्टी के 2018 के प्रत्याशी रहे उदयलाल डांगी ने पर्चा दाखिल कर दिया है। वहीं धरियावद सीट पर बीजेपी के दिवंगत विधायक गाैतमलाल मीणा के बेटे कन्हैयालाल ने भी पर्चा दाखिल किया। बीजेपी के लिए वल्लभनगर में पहले से ही जनता सेना के प्रमुख रणधीर सिंह भींडर ने चिंता बढ़ा रखी है। माना जा रहा है कि बीजेपी इन नेताओं की नाम वापसी के लिए जल्द ही कदम उठाएगी।

हिम्मत सिंह काे काेराेनाकाल में सेवा ही अभियान और खेतसिंह काे एसटी माेर्चे का जिलाध्यक्ष हाेने का फायदा मिला: हिम्मत सिंह झाला ने काेराेनाकाल में सेवा ही संगठन अभियान के तहत अच्छा याेगदान दिया था और लाेगाें की मदद के लिए जुटे थे। इसी का फायदा उन्हें मिला। इसी तरह खेत सिंह लंबे समय से बीजेपी में सक्रिय हैं और पहले भी दावेदारी जता चुके हैं। वर्तमान में खेतसिंह एसटी मोर्चा के जिलाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं।

दोनों सीटों पर संगठन की चली; एक पर समाज को साधा तो दूसरी पर परिवारवाद को नकारा

बीजेपी में दोनों ही टिकटों में संगठन की चली है। वल्लभनगर में गुलाबचंद कटारिया के विरोध के चलते रणधीर भींडर को टिकट नहीं दिया गया। राजपूत समाज को साधने के लिए हिम्मत सिंह झाला को टिकट दिया गया। झाला के नाम की सिफारिश चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी आदि नेताओं ने की थी। कटारिया यहां उदयलाल डांगी को टिकट दिलाने के पक्ष में थे। धरियावद में दिवंगत विधायक गौतमलाल मीणा के पुत्र कन्हैया लाल को टिकट देने की तैयारी थी। मगर पार्टी ने परिवारवाद को दरकिनार करते खेत सिंह को टिकट दिया है।

2018 विस चुनाव परिणाम

  • वल्लभनगर में कांग्रेस से दिवंगत विधायक गजेंद्र सिंह काे 66306 वाेट मिले थे, जनता सेना से रणधीर सिंह काे 62587 और बीजेपी के उदयलाल डांगी काे 46667 वाेट मिले थे।
  • धरियावद में बीजेपी के दिवंगत विधायक गाैतमलाल मीणा काे 96457 वाेट मिले थे जबकि कांग्रेस के नगराज दूसरे स्थान पर रहकर 72615 वाेट हासिल किए।

अब क्या : भींडर और दिवंगत विधायक के परिजनाें काे टिकट नहीं मिलने का असर संभव
वल्लभनगर विधानसभा सीट पर उप चुनाव में बीजेपी ने भींडर परिवार काे टिकट देने की नब्ज काे टटाेला था लेकिन गुलाबचंद कटारिया के विराेध और सर्वे रिपाेर्ट पक्ष में नहीं थी। इस वजह से संगठन ने खुद के स्तर पर निर्णय लेते हुए हिम्मतसिंह झाला काे टिकट दिया है। ऐसा करके पार्टी राजपूत समाज काे भी साधना चाहती है, क्याेंकि महाराणा प्रताप पर सही भाषा का उपयाेग नहीं हाेने के चलते राजपूत समाज ने नाराजगी जाहिर की थी। उधर दिवंगत विधायक के परिवार काे टिकट नहीं मिलने से सहानुभूति लहर के वाेट कितने प्रभावित हाेंगे ये समय बताएगा।

कांग्रेस : दिवंगत विधायक की पत्नी काे टिकट मिलने का क्या फायदा?
अप्रैल में हुए उप चुनाव में दिवंगत विधायक के परिजनों काे टिकट देने पर बीजेपी और कांग्रेस दाेंनाे पार्टियों काे फायदा हुआ था। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी कांग्रेस काे फायदा होगा।

गुलाबचंद कटारिया कैसे भारी पड़े पार्टी के दूसरे नेताओं पर?

वल्लभनगर से पूर्व विधायक रणधीर सिंह भींडर पहले बीजेपी में थे और संगठन के लिए काम भी किया था। कई नेता उनकी वापसी चाहते थे और उपचुनाव में वल्लभनगर की सीट उन्हें दिलाना चाहते थे। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और रणधीर सिंह भींडर के बीच सियासी अदावत के चलते ये संभव नहीं हाे पाया। उधर पार्टी नेताओं ने कटारिया की नाराजगी माेल नहीं लेना ही ठीक समझा। संगठन ने खुद वल्लभनगर के टिकट पर फैसला लिया। खेतसिंह काे धरियावद में तरजीह दी गई, जिस पर कटारिया पक्ष में थे।

असर क्या? : दाेनाें सीटें अगर कांग्रेस या बीजेपी ने जीतीं
अगर ये दाेनाें सीटें कांग्रेस ने जीती या हारी ताे गहलाेत सरकार पर काेई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। उधर बीजेपी दाेनाें सीटें जीतीं ताे पार्टी के कामकाज पर विश्वास की मुहर लगेगी। वहीं हार हाेने पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां से लेकर नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की लीडरशिप पर असर देखने काे मिल सकता है।

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