राजस्थान फोन टैपिंग केस:हंगामे के कारण 4 बार विधानसभा स्थगित, भाजपा MLA 7 दिन के लिए सस्पेंड; गहलोत बोले- यह भाजपा का आपसी झगड़ा

जयपुरएक वर्ष पहले
राजस्थान में फोन टैपिंग मुद्दे पर विधानसभा में भाजपा विधायकों ने वेल में आकर हंगामा किया। नाराज स्पीकर ने कहा कि मैंने सोच समझकर व्यवस्था दी है। मैं अध्यक्ष की व्यवस्था पर आपको सवाल उठाने की अनुमति नहीं दे सकता।
  • दिन भर हंगामे के बाद शाम को बनी सहमति, कल फोन टैपिंग पर सदन में चर्चा होगी, सरकार का जवाब आएगा
  • विधानसभा स्पीकर के चैंबर में नेता प्रतिपक्ष और प्रमुख नेताओं की बैठक के बाद गतिरोध टूटा

फोन टैपिंग पर राजस्थान सरकार के कबूलनामे पर सियासी हलकों से लेकर विधानसभा तक माहौल गरमा गया है। फोन टैपिंग पर मंगलवार को विधानसभा में भाजपा ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के कारण स्पीकर को चार बार सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। देऱ शाम CM अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर इसे बीजेपी का आपसी झगड़ा और वर्चस्व की लड़ाई बताया। उन्होंने विपक्ष पर बेवजह सदन का समय खराब करने का आरोप भी लगाया।

गहलोत ने लिखा, 'फोन टैपिंग को लेकर 14 अगस्त को विधानसभा में पूरी बात रख चुका हूं। ऐसा लगता है कि यह बीजेपी का आपसी झगड़ा है। वर्चस्व की लड़ाई है। इसमें बेवजह मुद्दे बनाए जा रहे हैं। अनावश्यक रूप से हाउस को डिस्टर्ब किए जाने की कोशिश है।' गहलोत ने सोशल मीडिया पर 14 अगस्त को विधानसभा में फोन टैपिंग को लेकर दिए गए बयान की पूरी ट्रांस्क्रिप्ट भी डाली है। इधर, चार बार के स्थगन के बाद मंगलवार को हंगामे और नारेबाजी के बीच ही सदन चला। शाम को कार्यवाही स्थगित होने के बाद कुछ देर भाजपा विधायक धरने पर बैठे रहे।

सरकार के जवाब देने के आश्वासन के बाद टूटा गतिरोध
फोन टैपिंग विवाद को लेकर भाजपा विधायक विधानसभा की कार्यवाही स्थगित होने के बाद कुछ भी धरने पर बैठे। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष और चुनिंदा विधायकों ने स्पीकर के चैंबर में चर्चा की। स्पीकर से चर्चा में गतिरोध टूटने का रास्ता तय हुआ। कल फोन टैपिंग पर चर्चा और सरकार की तरफ से जवाब दिलवाने के आश्वासन मिलने के बाद धरना खत्म कर दिया। विधायक मदन दिलावर के निलंबन पर भी फिर से विचार करने पर सहमति बनी। बुधवार को विधानसभा में 12 बजे के बाद फोन टैपिंग पर चर्चा होगी। इसके बाद सरकार का जवाब भी आएगा।

फोन टैपिंग पर दिनभर हुआ हंगामा, 4 बार सदन स्थगित
इससे पहले फोन टैपिंग पर चर्चा की मांग को लेकर भाजपा ने दिन भर हंगामा किया। हंगामे के कारण चसर बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। पहले 12:30 बजे और फिर 1 बजे और फिर 1.40 बजे आधे-आधे घंटे के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित की गई। 2.10 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई। लेकिन 3.15 बजे फिर हंगामे के कारण सदन को चौथी बार आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा। इस दौरान एक बार फिर से विधायकों की खरीद फरोख्त और ऑडियो टैप का मुद्दा भी उठना तय है।

फोन टैपिंग पर गहलोत ने 36 घंटे बाद चुप्पी तोड़ी:CM ने कहा- ऐसा लगता है फोन टैपिंग बीजेपी का आपसी झगड़ा, वर्चस्व की लड़ाई है; सदन को बेवजह डिस्टर्ब करने की कोशिश

हंगामे के बीच ही सदन में अनुदान की मांगें बहस के बाद पारित
दोपहर 2:10 पर सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा स्पीकर ने फोन टैपिंग पर नए तथ्य दिए बिना सदन में चर्चा करवाने से इनकार कर दिया। चर्चा नहीं कराने से नाराज भाजपा विधायकों ने फिर से वेल में नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामे और नारेबाजी के बीच ही विधानसभा में उच्च शिक्षा और खेल की अनुदान मांगों पर बहस चल रही है। ​फोन टैपिंग पर अब सदन में डेडलॉक (गतिरोध) ​बन गया है। भाजपा ने फोन टैपिंग पर चर्चा के बिना विधानसभा की कार्यवाही चलने देने से इनकार कर दिया ।

भाजपा विधायक मदन दिलावर सदन से सात दिन के लिए निलंबित
हंगामे और नारेबाजी के बीच भाजपा विधायक मदन दिलावर को 7 दिन के लिए विधानसभा से निलंबित कर दिया गया। संसदीय कार्यमंत्री शांति धरीवाल ने दिलावर को निलंबित करने का प्रस्ताव रखा। इसे ध्वनिमत से पारित किया गया। इसके बाद स्पीकर ने दिलावर को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। इसी दौरान स्पीकर ने मार्शल को दिलावर को सदन से बाहर निकालने के आदेश दिए। इस पर भाजपा विधायकों ने दिलावर के चारों तरफ घेरा बना दिया। हंगामा बढ़ता देख स्पीकर ने विधानसभा की कार्यवाही को चौथी बार 3:15 बजे स्थगित कर दिया।

स्थगन प्रस्ताव खारिज होने से भड़के भाजपा विधायक
शून्यकाल शुरू होते ही स्थगन प्रस्ताव खारिज होने से नाराज भाजपा विधायकों ने वेल में पहुंचकर नारेबाजी की। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और विधायक कालीचरण सराफ ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए फोन टैपिंग का मामला उठाना चाहा, लेकिन स्पीकर सीपी जोशी ने इसकी मंजूरी नहींं दी। इस पर नाराज भाजपा विधायकों ने सदन में वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी।

कटारिया बोले- सरकार बताए किस-किसके फोन टैप करवाए
शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि सरकारी मुख्य सचेतक ने एक FIR करवाई थी उसका आधार फोन टैपिंग ही था। इससे यह तय हो गया कि सरकार ​की किसी एजेंसी ने फोन टैपिंग करवाई। सरकार को सदन में यह बताना चाहिए कि किस अधिकार से सरकार ने किन किन लोगों के फोन टैप करवाए।

कटारिया ने कहा कि हम यही जानना चाहते हैं कि जिस रिफरेंस में मुकदमा दर्ज हुआ। उसमें अनुमति लेकर फोन टैप हुआ या नहीं? गृह विभाग की अनुमति लेकर अभियुक्तों के लिए फोन टैप करवाते हैं। हम जानना चाहते हैं कि मुख्य सचेतक ने जो FIR करवाई थी क्या उसका आधार फोन टैपिंग थी?

बता दें कि सचेतक महेश जोशी ने विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर जुलाई में एंटी क्राइम ब्यूरो (ACB) और पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) में केस दर्ज करवाया था। उस शिकायत में बाद में कुछ ऑडियो टेप की ACB और एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) को दिए गए थे। ACB और ATS ने केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। उस वक्त भाजपा से जुड़े दो कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया था। ACB और SOG मुकदमे में 3 निर्दलीय विधायकों के अलावा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, मंत्री विश्वेंद्र सिंह और भंवरलाल शर्मा के भी नाम थे।

भाजपा चर्चा पर अड़ी, स्पीकर ने कहा- नए तथ्य दीजिए
1:30 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ने कहा- फोन टैपिंग पर आपके पास स्थगन प्रस्ताव के अलावा कोई नए तथ्य हैं तो दीजिए। आज ही चर्चा करवाकर सदन में सरकार का जवाब दिलवा दिया जाएगा, लेकिन स्थगन प्रस्ताव खारिज करने के अध्यक्ष के फैसले का रिव्यू नहीं होगा। इस पर नेता प्रतिपक्ष कटारिया ने कहा कि हमारी मजबूरी है कि हम इस पर आज चर्चा किए बिना कार्यवाही आगे नहीं बढ़ने देंगे। सरकार का जवाब चाहे कल आ जाए।

बिना सबूत विधायकों- केंद्रीय मंत्रियों के फोन टैप के सबूत दीजिए
स्पीकर ने कहा- राजेंद्र राठौड़ का स्थगन है जिसमें लिखा है, ‘सांसदों, विधायकों और केंद्रीय मंत्रियों के बिना अधिकृत प्राधिकारियों के फोन टैप करवाए गए। आपने इसके सबूत नहीं दिए। आप सबूत दीजिए और नाम बताइए। आपके पास सबूत या रिकॉर्ड हैं तो दीजिए, इसके बिना सदन में चर्चा की अनुमति नहीं दे सकता।’

आपको मेरे फैसले पर विश्वास नहीं तो मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं
अध्यक्ष के स्थगन खारिज होने के बाद भाजपा विधायकों ने वेल में आकर हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। नाराज स्पीकर ने कहा, ‘मैंने सोच समझकर व्यवस्था दी है। मैं अध्यक्ष की व्यवस्था पर आपको सवाल उठाने की अनुमति नहीं दे सकता। आपको अध्यक्ष के फैसले पर विश्वास नहीं हैं तो आप मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं।’

राजनीतिक लाभ के लिए की गई फोन टैपिंग: भाजपा
भाजपा सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि गहलोत सरकार राजस्थान के लोगों की जासूसी कर रही है। यह देश को मजबूत करने या आतंकवादियों को पकड़ने के लिए नहीं किया गया। कांग्रेस की सरकार ने इसे अपने राजनीतिक लाभ के लिए किया था। यदि आप फोन टैपिंग करना चाहते हैं, जो संविधान के अनुसार किया जा सकता है, तो इसे राज्य के लाभ के लिए करें, आम लोगों पर नहीं।

भाजपा अपने मंत्री के ऑडियो टेप से बौखलाई: कांग्रेस
गहलोत सरकार के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने राठोड़ के बयान पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार विधायकों या सांसदों के फोन टैप नहीं करती है। भाजपा के लोग इसलिए बौखलाए हुए हैं क्योंकि उनके एक केंद्रीय मंत्री का ऑडियो टेप सामने आया था। वे सरकार बनाने और गिराने की बात कर रहे थे। अगर आप इतने ही ईमानदार हैं तो केंद्रीय मंत्री को वॉयस सैंपल देना था। उनके पास तो सुप्रीम कोर्ट जाने का भी ऑप्शन है। आप दुनिया को बताइए कि टेप में आपकी आवाज नहीं है।