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आयुष्मान बीमा योजना:ब्लड और बोन कैंसर की दवाएं निशुल्क मिलना बंद हुईं; मरीजों को हर महीने खर्च करने पड़ रहे हजारों

जयपुर7 दिन पहले
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अब मरीजों को 8000 से 78000 हजार रुपए तक की दवाएं हर महीने खरीदनी पड़ रही हैं - Dainik Bhaskar
अब मरीजों को 8000 से 78000 हजार रुपए तक की दवाएं हर महीने खरीदनी पड़ रही हैं
  • 31 जनवरी 2021 से दवाएं मिलनी बंद हुईं, आरएमएससीएल ने 4 सितम्बर 2020 को टेंडर भी किया था लेकिन प्रोसेस आगे नहीं बढ़ा

निशुल्क दवा योजना में दवाओं की कमी और आरएमएससीएल की ‘जिद’ कैंसर मरीजों के लिए मौत का कारण बन रही है। भामाशाह योजना में कैंसर की महंगी दवाएं थीं, पर आयुष्मान बीमा योजना में इन दवाओं को फिलहाल देना बंद कर दिया गया है।

हालांकि सरकार की मंशा है कि कैंसर की महंगी दवाएं मुफ्त मिलें लेकिन आरएमएससीएल ने 7 महीने बाद भी इनका टेंडर नहीं खोला है। कैंसर के मरीजों को एसएमएस अस्पताल जयपुर, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर, जोधपुर और कोटा तक में दवाएं नहीं मिल रही हैं।

कैंसर मरीजों के 4 केस से ही अंदाजा लगा सकते हैं... परेशानी कितनी बड़ी है

केस 1 बीकानेर के हनुमंत राज की पत्नी ऊषा को 7 साल से ल्यूकोमिया है। भामाशाह योजना में फ्री दवा मिलती थी। 30 जनवरी 2021 से दवा मिलनी बंद हो गई। अब हर माह 15000 की दवा खरीदनी पड़ रही है। हनुमंत कहते हैं-सरकार हमारी स्थिति समझे।

केस 2 ब्लड कैंसर से पीड़ित 45 वर्षीय निजी कंपनी में काम करने वाले अमन की कोरोनाकाल में नौकरी चली गई। कैंसर की दवा नीलोटिनिब को सरकार ने निशुल्क दवा पैकेज से हटा दिया। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से दवा भी नहीं खरीद पा रहे।

केस 3 एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित हनुमानगढ़ निवासी 55 वर्षीय मरीज के अल्ट्रोम्बोपेग नामक दवा चल रही है। एसएमएस अस्पताल जयपुर में दवा उपलब्ध नहीं होने पर बाजार में 35 हजार से 40 हजार की खरीदनी पड़ रही है।

केस 4 प्लेटलेट्स कम होने पर इम्यून थ्रोम्बोसाइटो पीनिया नामक बीमारी से पीड़ित चौमू निवासी 40 वर्षीय जगमोहन दवा नहीं मिलने पर दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

केस 5 झालावाड़ निवासी एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित महिला को जयपुर, बीकानेर में दवा नहीं मिल रही है। भामाशाह योजना में पैकेज में फिर से शामिल करने के लिए मांग की है।

किस दवा पर कितना खर्च

  • निलोटिनिब- 8-9 हजार
  • डेसाटिनिब 10-11 हजार
  • एबिराटेरोन 9-10 हजार
  • ​​​​​​​सेराफेनिब 8-10 हजार​​​​​​​
  • अल्ट्रोम्बोपेग 35-40 हजार​​​​​​​

आमजन के लिए सरकार गंभीर, टेंडर कराया था
तत्कालीन एसीएस रोहित सिंह ने इन दवाओं को ईडीएल में शामिल करने को कहा था। 4 सितम्बर 2020 को आरएमएससीएल ने टेंडर कर भी किए पर मामला अभी तक लटका हुआ है।

महंगी दवाएं, निशुल्क मिलें तो बचे जिंदगी
निलोटिबिन की एक टेबलेट 1300 रुपए की है। एक मरीज को हर महीने 60 टेबलेट चाहिए। यानी हर माह 78000 रुपए खर्च होंगे।

केंद्र के अनुसार दवाओं को हटाना और जोड़ा है। पहले दवा के अनुसार पैकेज था लेकिन अब बीमारियों के अनुसार पैकेज निर्धारित किया गया है। कैंसर जैसी बीमारी की उसी साल्ट की दूसरी दवा उपलब्ध है।
-कानाराम, संयुक्त सीईओ, आरएसएचएए

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