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अदृश्य शत्रु...कोरोना:मुंह और शौच के रास्ते खून आया, सीटी स्कैन कराया तो 80% फेफड़े खराब थे

जयपुर10 दिन पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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बदलते लक्षणों से परेशानी बढ़ी। - Dainik Bhaskar
बदलते लक्षणों से परेशानी बढ़ी।
  • बदलते लक्षणों से परेशानी बढ़ी, 2 दिन में नॉर्मल से वेंटिलेटर पर पहुंचे मरीज

कोरोना के बढ़ते केस ने जहां आमजन की परेशानी बढ़ा रखी है वहीं पॉजिटिव मरीजों में नए तरीके के ही लक्षण से डॉक्टर्स पसोपेश में हैं। पहली बार कोरोना मरीजों में इस तरह के खतरनाक लक्षण सामने आए हैं। डराने वाली बात यह है ये लक्षण 20 से 30 वर्ष के युवाओं में सामने आए हैं और वे गंभीर रूप से बीमार रहे। नए लक्षणों में कफ के साथ और शौच के दौरान खून आना हैं।

फोर्टिस के सीनियर फिजिशियन डॉ. पंकज आनंद का कहना है कि इनमें मरीजों में अन्य लक्षण नहीं के बराबर होते हैं और लंग्स सीधे 60 से 70 फीसदी तक प्रभावित हो रहे हैं। शहर के अस्पतालों में ऐसे मरीज सामने आ रहे हैं और अब बढ़ते मरीजों के बीच इस नई फाइडिंग ने परेशानी को ओर बढ़ा दिया है।

केस 1- अग्रवाल फार्म के 21 साल के निशांत बंसल को 17 अप्रैल को कोरोना हुआ। सामान्य दिखते लक्षणों के बीच मुंह से खून आया तो परिजन घबराए और जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। एचआरसीटी में आया कि निशांत के 75 फीसदी से अधिक लंग्स प्रभावित हो चुके थे और सांस लेने में बहुत तकलीफ थी। रेमडेसिविर, स्टेराइड व टॉसिलीजुमेब जैसी दवाइयां लगातार दी गई।

केस 2- 27 साल के विमल अग्रवाल के ब्लड आने लगा तो जांच कराई। पॉजिटिव आए और फिर सीटी स्कैन कराया। विमल के पूरे लंग्स में इंफेक्शन हो चुका था और वे सांस भी बा-मुश्किल ले पा रहे थे। ताज्जुब की बात यह कि सीटी स्कोर 10 आ रहा था। पूछने पर उन्होंने डॉक्टर्स को बताया कि तीन दिन से उनके मुंह से खून आ रहा था। हालांकि यह बहुत कम था लेकिन फिर भी डर की स्थिति हो गई।

खून पतला करें या गाढ़ा

कोविड के मरीजों में खून पतला करने के लिए एंटी-काग्युलेंट दिया जाता है ताकि हार्ट और अन्य अंग प्रभावित नहीं हों। अब ऐसी स्थिति में डॉक्टर्स नहीं समझ पा रहे हैं खून पतला करने की दवा देते हैं तो मरीज को दिक्कत तय है। ऐसे में अब सामान्य काग्युलेंट दिया जा रहा है ताकि ब्लड को गाढ़ा रखा जा सके। देखा जाएगा ब्लड गाढ़ा करने की स्थिति में मरीज का कोरोना कितनी जल्दी कवर होता है।

पहली बार ऐसे लक्षण आए हैं कि मुंह-शौच के रास्ते खून आया है। ऐसे मरीजों के लंग्स तेजी से खराब हुए। मरीजों में अन्य लक्षण भी अधिक नहीं दिखते, इसलिए खतरा अधिक है। समय पर सीटी-दवाएं जरूरी हैं। -डॉ. एम.के. गुप्ता, पल्मोनोलॉजिस्ट व डायरेक्टर, आंच हॉस्पिटल

यदि किसी व्यक्ति में पुराना टीबी और फाइब्रोसिस हो तो इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे केस आने लगे हैं और ब्लड आ जाता है। सावधानी जरूरी है और व्यक्ति की समय पर जांच हो। -डॉ. रमन शर्मा, सीनि.फिजिशियन, मेडिसिन, एसएमएस

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