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बाघों की लड़ाई:सल्तनत के लिए दो बहनों में खूनी संघर्ष; रोकने के लिए एक को भेजेंगे सरिस्का

जयपुर3 महीने पहले
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  • रणथंभौर में टेरिटरी को लेकर 8 महीने से चल रहा कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रहा, जीभ कटी, शरीर पर गहरे जख्म आए

रणथंभौर में टेरिटरी को लेकर बाघों का संघर्ष तो होता रहा है, लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि दो सब-एडल्ट बहनों का घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा। न तो कोई अपना इलाका छोड़ रहा है और न ही टकराहट रूक पा रही है। रणथंभौर के सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय ‘लेक एरिया’ (जोन-3) में बाघिन ‘एरोहैड’ की दो बेटियां (रिद्धी-सिद्धी) एक-दूसरे के खून की प्यासी बनी हुई है।

8 महीने से लगातार इनकी लड़ाइयां हो रही है। कुछ समय तक मां ने दोनों को अलग भी किया, बात नहीं बनी तो बीच-बचाव करना छोड़ दिया। पिछले सप्ताह तो रिद्धी इतना जख्मी हो गई कि उसको ट्रंकुलाइज कर इलाज करना पड़ा। बाघिन की जीभ कट गई तो एक हिस्से में बड़े घाव भी हो गए। संबंधित अधिकारियों के मुताबिक जख्म इतने गहरे थे कि उनमें कीड़े पड़ गए थे। अगर इलाज नहीं किया होता तो सर्वाइव करना ही मुश्किल था।

अब जबकि लड़ाई किसी नतीजे पर नहीं पहुंची और कोई अपनी जगह छोड़ने को तैयार नहीं होता दिख रहा तो विभाग ने इनको अलग करने की प्लानिंग की है। तय किया गया है कि एक बाघिन को सरिस्का भेज दिया जाए। जहां इनकी जरूरत भी है और इससे इस खूनी संघर्ष को विराम भी मिलेगा।
मई से लड़ाई जारी, टाइगर वर्ल्ड रोमांचित
सब-एडल्ट बाघिनों की लड़ाई अप्रेल-मई 2020 से जारी है। पर्यटकों के पास भी इसी संघर्ष की तस्वीरें आ रही है। कुल मिलाकर रणथंभौर से फिलहाल टाइगर वर्ल्ड को यही एक खबर रोमांचित किए हैं। सबके मुताबिक पहली बार ऐसा संघर्ष दिखाई पड़ रहा है।
बहनों के बाद मां-बेटी में फैसला बाकी

बहनों को अलग करने के बाद मां-बेटी की सल्तनत पर नजर रहेंगी। इतिहास देखते तो यहां कभी मां ने बेटी को तो कभी बेटी ने मां को खदेड़ा है। मछली से लेकर रिद्धी-सिद्धी तक की कई पीढ़ियों के संघर्ष यादगार रहे हैं।
सरिस्का के लिए यह जरूरी

सरिस्का के लिहाज से ऐसी बाघिन की जरूरत है जो पहले ब्रीड कर चुकी हो। वहीं जीन पूल मजबूत करने के लिहाज से दूसरे स्टेट से भी बाघ लाए जा सकते हैंं। रिद्धी-सिद्धी एरोहैड के दूसरे लीटर की बाघिनें हैं। जो करीब ढाई साल की हैं।

  • हमें कोई परेशानी नहीं है। मेरे हिसाब से घायल (रिद्धी) की जगह दूसरी बाघिन (सिद्धी) को भेज सकते हैं। - टीसी वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, रणथंभौर
  • सरिस्का को बाघों की जरूरत है। रणथंभौर से कोई बाघिन आती है तो ठीक है। हम तैयार हैं। - आरएन मीणा, फील्ड डायरेक्टर, सरिस्का
  • इस विषय पर प्लान कर रहे हैं। मैंने दोनों फील्ड डायरेक्टर से बात की है। एनटीसीए और राज्य सरकार को भी लिखेंगे। - मोहनलाल मीणा, चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन
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