भास्कर एक्सक्लूसिवभास्कर खुलासे पर 17 दिन बाद किडनैपर की बहन गिरफ्तार:बोलेरो का डीजल खत्म होने पर वही पेट्रोल पंप से लेकर आई थी

सीकर/जयपुर3 महीने पहलेलेखक: विक्रम सिंह सोलंकी

सीकर में कोचिंग संचालक के 9 साल के बेटे गन्नू के अपहरण के मामले में पुलिस ने 12 घंटे के रिकॉर्ड टाइम में केस सॉल्व कर बच्चे को बरामद कर लिया था।

...लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये केस 12 के बजाय 2 घंटे में सॉल्व हो सकता था।

गन्नू किडनैपिंग केस में दैनिक भास्कर ने ग्राउंड पर जाकर इन्वेस्टिगेशन किया, जिसमें 3 बड़े खुलासे हुए।

1. गन्नू को अपहरण कर ले जाते समय 20 किलोमीटर के बाद बदमाशों की गाड़ी में डीजल खत्म हो गया था। जब पुलिस नाकाबंदी करा रही थी, उस दौरान 20 मिनट तक किडनैपर्स सड़क पर ही खड़े थे। किडनैपर की बहन ही उनके लिए डीजल लेकर गई थी।

2. मास्टरमाइंड किडनैपर आनंदपाल गढ़वाल एक पुलिसवाले का भांजा है। बदमाशों ने रेकी करने के लिए कोचिंग संचालक के घर से 400 मीटर दूर ही मकान किराए पर लिया था।

3. गुन्नू के अपहरण के लिए जयपुर से भी स्कॉर्पियो चोरी की गई थी, जिसे बाद में नेछवा में छोड़ कर बोलेरो चोरी की।

भास्कर की इन्वेस्टिगेशन में कई खुलासे हुए। पढ़िए- पूरी रिपोर्ट…

एक महीने से कर रहे थे किडनैपिंग की प्लानिंग
मास्टरमाइंड आनंदपाल गढ़वाल और सुनील गढ़वाल ने बच्चे के अपहरण की प्लानिंग एक महीने पहले ही बना ली थी। दोनों ने पहले हरमाड़ा से एक स्कॉपियो चोरी की। स्कॉपियो चोरी होने के बाद जयपुर पुलिस ने नाकाबंदी करवा दी।

दोनों स्कॉर्पियो चोरी करके नेछवा इलाके में चले गए थे। पुलिस का दबाव बढ़ने पर दोनों ने स्कॉर्पियो को वहीं छोड़ दिया और बोलेरो चुरा ली। इसी बोलेरो से दोनों ने कोचिंग संचालक महावीर हुड्‌डा के घर की रेकी थी। बोलेरो पुलिस ने बरामद कर ली है।

2 दिन तक कोचिंग संचालक के घर की रेकी
आनंदपाल और सुनील गढ़वाल ने 2 दिन कोचिंग संचालक के घर की रेकी की। काॅलोनी में दोनों को घूमते हुए लोगों ने भी देखा था। 4 अक्टूबर मंगलवार की सुबह चोरी की बोलेरो लेकर वे गुन्नू के घर के पास पहुंच गए। अपहरण के बाद कोचिंग सेंटर के बाहर लगे CCTV फुटेज चेक किए तो पता लगा कि सुबह 7.38 बजे तक बोलेरो वहीं खड़ी थी।

जब गुन्नू को लेकर उसके नाना घर से निकले तो सुबह 7.45 बजे बोलेरो भी आगे निकल गई। स्कूटी का पीछा करते हुए मात्र तीन मिनट के बाद ही सुबह 7.48 बजे बदमाशों ने बच्चे का अपहरण कर लिया। पहले तो स्कूटी ठीक से नहीं चलाने की बात पर धमकाने लगे। फिर बच्चे को गाड़ी में खींच कर डाल लिया। स्कूटी को लात मार कर गिरा दिया और तेजी से बोलेरो लेकर फरार हो गए।

अपहरण के बाद बोलेरो में तेल हुआ खत्म
गन्नू के अपहरण के बाद किडनैपर्स बोलेरो नवलगढ़ रोड की तरफ ले गए। टोल से पहले से ही वे पीलियों की ढहर की तरफ जाने वाले सुनसान रास्ते में घूम गए। 20 किलोमीटर के बाद ही बोलेरो में तेल खत्म हो गया।

दोनों भाई काफी परेशान हो चुके थे, तब सुनील ने बहन शुभिता को फोन किया। उसकी बहन स्कूटी लेकर घर से दो किलोमीटर दूर नायरा के पेट्रोल पंप पर गई। वहां से 6 किलोमीटर दूर मुंह ढंक कर पहुंची।

शुभिता को वहां डीजल लेकर पहुंचने में करीब 20 मिनट का समय लगा। इधर, 7.45 बजे अपहरण के बाद ही पुलिस एक्टिव हो गई थी। नाकाबंदी करा ली गई थी। उस एरिया में सर्च ऑपरेशन होता तो किडनैपर्स 2 घंटे के अंदर पकड़े जाते।

आरोपी का पिता चलाता है होटल
जांच में सामने आया कि आनंदपाल का पिता बाबूलाल भी जेल जा चुका है। उस पर एक युवती ने गैंगरेप का आरोप लगाया था। तब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लंबे समय के बाद दोनों पक्षों में राजीनामा हो गया था तब बाबूलाल जेल से बाहर आया था।

जिस नायरा पेट्रोल पंप से सुनील की बहन ने डीजल लिया था, उसी पंप के साथ ही नवलगढ़ रोड पर आनंदपाल का पिता बाबूलाल न्यू झंकार होटल चलाता है। सुनील की बहन की शादी हो चुकी है, लेकिन पति से विवाद के कारण काफी दिनों से परिवार के साथ ही रहती है।

आनंदपाल के घर पहुंची पुलिस ताे मामा को पता लगा
गुन्नू के अपहरण के मामले की जांच करते हुए पुलिस सुनील गढवाल के पास पहुंची। सुनील को घर से ही पकड़ लिया गया। तब उसने आनंदपाल के बारे में पुलिस को बता दिया। तब तक आनंदपाल अपने दोस्त के पास मंडावा फरार हो गया था।

पुलिस घर पहुंची तो आनंदपाल की मां ने भाई राजेश कुमार को फोन कर बताया। राजेश सीओ सिटी वीरेंद्र शर्मा के ड्राइवर हैं। बहन का फोन आने पर राजेश को बता लगा कि जिस अपराधी को पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही थी, वो उसका भांजा आनंदपाल ही है।

राजेश ने आनंदपाल के मोबाइल पर कुछ मैसेज छोडे़। मोबाइल ऑन होने पर उसे समझाया और लोकेशन निकाली। सुबह पुलिस ने मंडावा से उसे पकड़ा। फिर उसे लेकर सीकर आए।

अपहरण का मकसद
गन्नू का अपहरण करने वाला आनंदपाल दो साल पहले महावीर हुड्‌डा के स्कूल व कोचिंग में पढ़ता था। पहले मामा के पास ही रहता था। कोरोना आने के बाद पिता को गले का कैंसर हो गया था। आनंदपाल बाहर स्टडी वीजा से जाना चाहता था। पहले उसने कनाडा के लिए एप्लाई किया था। वहां से रिजेक्ट होने पर यूके(इंग्लैंड) के लिए आवेदन किया था। मामा राजेश कुमार ने परिवार के साथ मिलकर 12 लाख रुपए जमा भी कराए थे। वीजा भी आ चुका था। आनंदपाल ने किडनैपिंग की साजिश रची ताकि फिरौती के रुपए लेकर आराम से विदेश भाग सके।

आनंदपाल : गुमानों का बास का रहने वाला है। 12वीं पास है। एक छोटा भाई सतेंद्र है। पिता बाबूलाल गढ़वाल होटल चलाता है। जिस स्कूल में पढ़ता था, वहां खूब पैसे आते थे। इसलिए उनके ही बच्चे को अपहरण की योजना बनाई। बड़ा मामा राजेश कुमार पुलिस में है। छोटा मामा दिलीप कुमार प्रोपर्टी का काम करता है।

सुनील गढ़वाल : आनंदपाल का चचेरा भाई है। 12वीं पास है। गुमानों का बास का ही रहने वाला है। ट्रैक्टर चलाता है। दोनों के परिवार में आपस में नहीं बनती है। जमीन को लेकर दोनों परिवार में विवाद हुआ था। पहले से दो मुकदमें दर्ज है। सुनील और आनंदपाल ने ही मिलकर अपहरण की योजना बनाई थी। फर्जी आईडी से नई सिम के लिए भी सेटिंग की थी।

योगेश सैनी : खंडेला के कोटड़ी का रहने वाला है। बस स्टैंड पर ही ई-मित्र की दुकान है। योगेश सैनी ने ही दोनों काे फर्जी सिम दी थी। जांच में पता लगा एक युवक नवीन ने ही उसे सिम देने के लिए बोला था। उसे कहा कि दो युवक सिम लेने आएंगे, उन्हें दे देना।

हिमांशु चौधरी : 19 साल का है और जसवंतपुरा श्रीमाधोपुर का रहने वाला है। अपहरण कर 50 लाख रुपए की फिरौती मांगने में शामिल था। कोचिंग संचालक महावीर हुड्‌डा के स्कूल में ही पढ़ा था। इसे पूरे परिवार की जानकारी थी। रैकी करने के लिए उनके मकान से 400 मीटर दूर ही एक मकान लिया था।

संदीप मेघवाल : श्रीमाधोपुर के वार्ड नौ का रहने वाला है। रैकी कर अपहरण की योजना में शामिल था। अपहरण की मीटिंग में भी कई बार शामिल हुआ था। हिमांशु चौधरी का दोस्त है।

रोहित मीणा : खंडेला के दूल्हेपुरा का रहने वाला है। ये तीनों आपस में दोस्त है। अपहरण की पूरी योजना में शामिल था। अपहरण के बाद हिमांशु, संदीप के साथ एक प्लॉट में छिप गए थे। वहीं से पुलिस ने तीनों को पकड़ा था।

बहन का फोन आने पर अपहरण में शामिल होने का पता लगा
घटना के बाद रात को बहन ने फोन किया था वो बोली कि सुनील को अपहरण के मामले में पुलिस ले गई है। वो बोली कि आनंदपाल के बारे में भी आकर घर पर पूछ रहे है। तभी मुझे अपहरण में भांजे के शामिल होने की बात का पता लगा था। वह काफी होशियार था। मेरे पास ही रहकर पढ़ता था। सुनील के संपर्क में पता नहीं कैसे आया और ये सब ऐसा हो गया। -राजेश कुमार, ड्राइवर ( आनंदपाल का मामा )

भास्कर खुलासे के बाद आरोपी की बहन गिरफ्तार
गुन्नू अपहरण केस में सीकर पुलिस आरोपी की बहन को बचाने का प्रयास कर रही थी। भास्कर खुलासे के बाद सीकर पुलिस एक्टिव हुई। गुन्नू अपहरण केस 2 अक्टूबर को हुआ था। 17 दिनों के बाद पेट्रोल पंप से डीजल ले जाने वाली आरोपी सुनील की बहन शुभिता (28) पत्नी राजेश कुमार निवासी गोठड़ा भूकरान दादिया को गिरफ्तार कर लिया।

उद्योगनगर थानाधिकारी श्रीनिवास जांगिड़ ने बताया कि शुभिता ही बोलेरो में डीजल खत्म होने पर देकर आई थी। उसे सुनील गढ़वाल ने ही फोन कर डीजल लाने को कहा था। जांच के बाद उसे गुमाना का बास से गिरफ्तार कर लिया है। वह अभी पिता शुभकरण गढ़वाल के पास गुमाना का बास में रहती थी। गुन्नू अपहरण में शामिल आरोपियों की जल्द ही शिनाख्त परेड कराई जाएगी।

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