...वो कुल्फी, जिसे खाने CM-विधायक ठेले पर आते थे:बॉलीवुड-क्रिकेट स्टार भी स्वाद के दीवाने; इंग्लैंड, चीन में बिजनेस का मिला ऑफर

जयपुर5 महीने पहलेलेखक: स्मित पालीवाल

गर्मियों में भरी दोपहर गली में टन-टन बजती घंटी एक ही याद दिलाती है। ठंडी-ठंडी मटका कुल्फी। ऐसा कोई शख्स नहीं जिसने मटका कुल्फी का स्वाद न चखा हो। कितनी भी भीषण गर्मी हो, क्या मजाल जो कुल्फी की एक बूंद भी पिघल जाए। दूध-रबड़ी से भरपूर जयपुर का एक ऐसा ही स्वाद है जिसे खाने के लिए खुद मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री-विधायक आते थे।

आज भी जयपुर आने वाले बॉलीवुड से लेकर क्रिकेट स्टार भी इसका स्वाद चखना नहीं भूलते। कभी ठेले पर बिकने वाली कुल्फी आज पंडित नाम से ब्रांड बन गई है। सालाना कारोबार करोड़ों का हो गया है। राजस्थानी जायका की इस कड़ी में आपको ले चलते हैं हवा महल रोड की उन गलियों में, जहां के स्वाद के दीवाने दुनियाभर में हैं...।

साल 1947 में रामेश्वर प्रसाद शर्मा ने 19 साल की उम्र में सिटी पैलेस के नजदीक ठेला लगाकर कुल्फी बेचना शुरू किया था। तब आसपास और भी लोग कुल्फी बेचते थे, लेकिन बेहतरीन स्वाद के कारण रामेश्वर प्रसाद के ठेले पर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। इसी भीड़ ने रामेश्वर शर्मा को पंडित जी पुकारना शुरू कर दिया। कारोबार ऐसा चला कि हवा महल सड़क पर जहां रामेश्वर प्रसाद ठेला लगाते थे, उसके सामने ही उनके बेटे ने दुकान खरीद ली। रामेश्वर प्रसाद की कुल्फी बनाने की रेसिपी एकदम सीक्रेट थी, जिसे बाद में उनके बेटे घनश्याम ने सीखा। आज तीसरी पीढ़ी भी इसी कारोबार से जुड़ी है।

वक्त बदलता गया, पंडितजी वैरायटी बढ़ाते गए
पंडित घनश्याम शर्मा ने बताया कि उनके पिता भैंस और गाय के दूध के मिश्रण से कुल्फी बनाते थे। कुल्फी बनाने के लिए दूध को लगभग 8 घंटे तक उबालना पड़ता हैं। इससे उसकी रबड़ी लच्छे तैयार होते हैं। इसके बाद तैयार हुए दूध को ट्रेडिशनल तरीके से ही बर्फ और नमक के बीच माइनस 40 डिग्री में कुल्फी के सांचों में भर जमाया जाता है। ताकि कुल्फी में देसी स्वाद बरकरार रहे। उन्होंने बताया कि वक्त के साथ कुल्फी की वैरायटी बढ़ा दी हैं। पहले सिर्फ मलाई कुल्फी बनाई जाती थी। लेकिन अब केसर पिस्ता बादाम, चॉकलेट, मैंगो, पान, सीताफल और डायबिटिक लोगों के लिए शुगर फ्री स्पेशल कुल्फी बनाई जा रही है।

2007 में ब्रांड नेम कराया पेटेंट
घनश्याम ने बताया कि पिछले 75 सालों से हमारी कुल्फी का स्वाद नहीं बदला है। जयपुर समेत देशभर में कई लोगों ने नकल करने की भी कोशिश की। लेकिन वैसा स्वाद नहीं ला पाए। साल 2007 में पंडित कुल्फी नाम पेटेंट करा लिया था। ताकि हमारे नाम से देशभर में कोई भी दुकानदार जनता को बेवकूफ ना बना सके। जयपुर में वैसे तो पंडित कुल्फी के नाम से कुछ दुकानें चल रही हैं। लेकिन उनकी ब्रांच केवल दो जगह चांदी की टकसाल और मानसरोवर चौपाटी में है।

25 से 120 रुपए तक की कुल्फी
पंडित घनश्याम ने बताया कि महंगाई बढ़ने के साथ ही कुल्फी की लागत भी बढ़ गई है। पहले जो कुल्फी 5 रुपए से लेकर 20 रुपए में बेची जा रही थी। आज उसकी कीमत बढ़ कर 25 से 120 रुपए पहुंच गई है। केसर पिस्ता बादाम मिक्स 35 रुपए, डिब्बा छोटा (सादा)- 50 और बड़ा 80 रुपए है।

गर्मी के सीजन में डेली सेल 5 हजार कुल्फी के आसा-पास रहती है। लेकिन वीकेंड पर कई बार 7 हजार कुल्फी तक बिक जाती है। शादी के सीजन में बल्क ऑर्डर अलग से मिलते हैं। एक अनुमान के मुताबिक कुल्फी से दोनों ब्रांच का सालाना कारोबार करीब 2 करोड़ के आस-पास रहता है।

राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति चख चुके हैं पंडित कुल्फी का स्वाद
पंडित कुल्फी पिछले कुछ सालों में पिंक सिटी की पहचान बन चुकी है। परकोटे क्षेत्र में बनी पंडित कुल्फी खाने वालों में न सिर्फ आम लोग बल्कि खास लोगों की भी लंबी फेहरिस्त है। पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल, उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर समेत बॉलीवुड एक्टर्स और कई खास विदेशी मेहमान भी पंडित कुल्फी का जायका ले चुके हैं। तेंदुलकर ने दुकान के बाहर परिवार के साथ गाड़ी में बैठकर कुल्फी खाई थी और 10 पैक भी करवाई थी।

ठेले तक कुल्फी खाने आते थे सीएम, विधायक और मंत्री
साल 1986 से पहले पंडित कुल्फी ठेले पर बेची जाती थी। तब विधानसभा आज के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में चलती थी। नजदीक होने की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के साथ-साथ कई कद्दावर नेता, मंत्री और विधायक कुल्फी का स्वाद लेने के लिए खुद चलकर ठेले तक आते थे। पंडित घनश्याम ने बताया चीन और इंग्लैंड के कुछ विदेशी पर्यटक उन्हें लाखों रुपए का ऑफर देकर विदेश में भी पंडित जी दुकान खोलने का आग्रह कर चुके हैं। लेकिन घनश्याम ने अपने पिता की विरासत को अब तक सहेज रखा है।