राजस्थान में भ्रष्टाचारियों पर मेहरबानी...:घूसखोर सीई को जल जीवन मिशन का चार्ज, इसे फेल करने वाले गोयल को स्पेशल विंग

जयपुर4 महीने पहले
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पंजाब में भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मिसाल पेश हुई हो, पर राजस्थान में भ्रष्टाचारियों को जमकर मलाईदार पोस्ट का तोहफा दिया जाता है। मंगलवार को ही पाबंदी के बावजूद विशेष अनुमति से जलदाय विभाग में 4 चीफ इंजीनियर के तबादले किए गए। इसमें स्पेशल प्रोजेक्ट विंग में चीफ इंजीनियर रहते हुए रंगे हाथ घूस लेते पकड़े जा चुके सीई (ग्रामीण) आरके मीना को 60 हजार करोड़ के जल जीवन मिशन (जेजेएम) की जिम्मेदारी सौंप दी है। मीना पहले भी अतिरिक्त चार्ज के तौर पर जेजेएम का काम देख चुके हैं।

वहीं जल जीवन मिशन में कम प्रोग्रेस व कमजोर रैंकिंग के जिम्मेदार सीई दिनेश गोयल को स्पेशल प्रोजेक्ट विंग सौंपा गया है। यहां लगे सीई दलीप कुमार गौड़ को हटाकर सीई (टेक्निकल) और टेक्निकल मेंबर का काम दिया है। सीई (टेक्निकल) संदीप शर्मा को हटाकर नागौर प्रोजेक्ट में लगाया है। सीई मनीष बेनीवाल को पोस्टिंग नहीं दी गई है। वे जयपुर रीजन में एडि. चीफ इंजीनियर के पद पर काम करेंगे। उन्हें मार्च में चीफ इंजीनियर लगाया जाना था। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल को लगाने के बाद यह सबसे बड़ा बदलाव है। पहले विभाग के एसीएस सुधांश पंत थे।

मीना का कॅरिअर दागी, फिर भी अहम जिम्मेदारी
एसीबी ने जुलाई 2016 में एसपीएमएल घूसकांड का खुलासा किया था। तब स्पेशल प्रोजेक्ट विंग के चीफ इंजीनियर आरके मीना को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। कई महीनों तक जेल में रहने के बाद मीना को बहाल कर ग्रामीण विंग में लगा दिया था। पिछले दिनों विधायक राजेंद्र सिंह गुढा ने भी उनके कार्यालय में धरना देकर फर्श पर बैठ गए थे।

गोयल के नेतृत्व में हम 29वें पर खिसके
जेजेएम के सीई दिनेश गोयल के पास नागौर प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी भी थी। कमजोर मॉनिटरिंग के कारण राजस्थान 33 राज्यों में 29वें पर है। वहीं ढाई साल की कुल प्रोग्रेस के आधार पर 32वें स्थान पर है।
जब मिशन का काम शुरू हुआ था, तब राज्य राष्ट्रीय औसत से 4% पीछे था। गोयल की मॉनिटरिंग में 25% पिछड़ गया है।

आईएएस-आईपीएस तक घूसखोरी में गिरफ्तार... पर छूटते ही प्राइम पोस्ट

IAS नीरज के पवन
अभी संभागीय आयुक्त, बीकानेर हैं...12 सितंबर 2021 को RSLDC में 5 लाख रु. की घूस मामले में केस दर्ज हुआ। मोबाइल भी जब्त किए गए। पांच साल में भ्रष्टाचार के 4 केस दर्ज हैं। पवन के खिलाफ भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के तीन केस पहले से एसीबी में चल रहे हैं।

IAS प्रदीप गवांडे
अभी उच्च शिक्षा में संयुक्त सचिव हैं नीरज के. पवन के साथ RSLDC घूसकांड में इन पर भी केस दर्ज हुआ। ये RSLDC में एमडी थे। एसीबी ने इनका भी मोबाइल जब्त किया था।

IPS राजेश मीणा
अभी आईजी योजना हैं करीब 9 साल पहले थानों से उगाही के मामले में आईपीएस राजेश मीणा को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि इसके बाद इन्हें कई प्राइम पोस्ट मिल चुकीं।

IPS लक्ष्मण गौड़
अभी आईजी प्रशिक्षण हैं 27 जून 2020 को घूस के मामले में दलाल को गिरफ्तार किया था, जो आईजी के नाम से थानों से रिश्वत की राशि को एकत्रित करता था।
IAS इंद्र सिंह राव
अभी निलंबित.....23 दिसंबर 2020.. बारां कलेक्टर रहे इंद्रा सिंह राव को पेट्रोल पंप की रिलीज को रिन्यूअल करने के एवज में 1.40 लाख रु. लेते हुए एसीबी ने पकड़ लिया था।

IAS नन्नूमल पहाड़िया
अभी निलंबित.....23 अप्रैल 2022 को अलवर के पूर्व कलेक्टर रहे पहाड़िया को दलाल के माध्यम से पांच लाख रुपए की रिश्वत के मामले में पकड़ा था।

IPS मनीष अग्रवाल
अभी निलंबित.....करीब एक साल पहले एसीबी ने हाइवे बनाने वाली कंपनी से दो बार में 31 लाख रुपए की रिश्वत ली थी। दूसरी कंपनी से 38 लाख रुपए की रिश्वत मांग रहे थे।

  • इसके अलावा आईएएस इंद्रसिंह राव, नन्नूमल पहाड़िया व आईपीएस मनीष अग्रवाल भी गिरफ्तार हो चुके। तीनों निलंबित हैं।