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आरएसएस प्रचारक निंबाराम को हाईकोर्ट से राहत:बीवीजी कंपनी के रिश्वत लेनदेन प्रकरण में निंबाराम की गिरफ्तारी पर रोक लगाई, सात दिन में अनुसंधान अधिकारी के समक्ष पेश होने को कहा

जयपुर2 महीने पहले
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आरएसएस प्रचारक निंबाराम को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। सात दिन में अनुसंधान अधिकारी के समक्ष पेश होने का भी आदेश दिया है - Dainik Bhaskar
आरएसएस प्रचारक निंबाराम को हाईकोर्ट ने राहत देते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। सात दिन में अनुसंधान अधिकारी के समक्ष पेश होने का भी आदेश दिया है

जयपुर में डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने वाली कंपनी बीवीजी इंडिया के 276 करोड़ रुपए का बकाया भुगतान के बदले 20 करोड़ रुपए की रिश्वत मांगने से जुड़े मामले में आरएसएस प्रचारक निंबाराम को हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने निंबाराम की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें सात दिन में अनुसंधान अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने के लिए कहा है। तब तक निंबाराम की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने एसीबी को भी कहा है कि उसके उच्च अफसर यह सुनिश्चित करेंगे कि मामले में निष्पक्ष व बिना किसी बाहरी दवाब के अनुसंधान हो। मामले में अनुसंधान पूरा होने पर चालान या एफआर पेश की जा सकेगी।

जस्टिस सतीश कुमार शर्मा ने यह आदेश बुधवार को निंबाराम की याचिका पर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में प्रार्थी के खिलाफ अनुसंधान लंबित है और कंपनी के एक प्रतिनिधि व मेयर पति के खिलाफ चालान पेश हो चुका है। इस स्तर पर एफआईआर रद्द करने या अनुसंधान पर रोक लगाए जाने का मामला नहीं बनता है और विधिनुसार अनुसंधान अधिकारी अनुसंधान करने के लिए स्वतंत्र हैं।

हाईकोर्ट ने कहा कि मामले में बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधियों के आग्रह पर प्रार्थी से प्रताप गौरव केन्द्र के लिए दान देने के लिए मीटिंग आयोजित हुई या नहीं अथवा प्रार्थी का आशय केवल प्रताप गौरव केन्द्र को दान देने तक सीमित रहा या रिश्वत के लेन-देन में उसकी सक्रिय भूमिका रही, ऐसे तमाम बिन्दुओं पर अनुसंधान एजेंसी को अनुसंधान करना है। लेकिन अनुसंधान एजेंसी का यह भी दायित्व है कि वह बिना किसी बाहरी दवाब या प्रभाव के निष्पक्ष अनुसंधान करे और प्रार्थी को भी अनुसंधान में अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिल सके।

तीन महीने पहले सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर एसीबी में दर्ज हुई थी एफआईआर

आपको बता दें कि तीन महीने पहले एसीबी ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर प्राथमिकी जांच दर्ज की थी। इसके बाद नगर निगम ग्रेटर जयपुर की निलंबित महापौर डॉ. सौम्या गुर्जर के पति राजाराम गुर्जर, बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि ओमकार सप्रे, मैनेजर संदीप चौधरी और आरएसएस प्रचारक निंबाराम के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। एसीबी ने अपने मुकदमे में निंबाराम पर लेनदेन की बातचीत में सहयोगात्मक भूमिका का आरोप लगाया था। वीडियो में राजाराम, ओमकार सप्रे, संदीप चौधरी के साथ निंबाराम भी बातचीत करते हुए नजर आए थे।

एफआईआर और कार्रवाई को रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
आपको बता दें कि करीब एक महीने पहले निंबाराम ने एसीबी में दर्ज FIR और कार्रवाई को रद्द करवाने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें निंबाराम की ओर से कहा गया कि प्रकरण में याचिकाकर्ता का नाम राजनीतिक द्वेषता के चलते शामिल किया है। सत्तारूढ़ पार्टी के नेता सार्वजनिक मंच पर उनके खिलाफ बयानबाजी कर प्रस्ताव पारित कर रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी के बयान दे रहे हैं।

प्रकरण में बकाया भुगतान को लेकर जो वीडियो सामने आया है, उसमें भी रिश्वत को लेकर उनकी ओर से कोई बातचीत नहीं है। ऐसे में एसीबी ने सत्ता के दबाव में आकर एफआईआर में याचिकाकर्ता का नाम शामिल किया है। इसलिए एफआईआर से याचिकाकर्ता का नाम हटाया जाए और उनके खिलाफ एसीबी की ओर से की जा रही जांच को रोका जाए। हाल ही में एसीबी ने अनुसंधान पूरा कर राजाराम गुर्जर और ओमकार सप्रे के खिलाफ कोर्ट में चालान पत्र पेश किया था। जबकि संजीव चौधरी व निंबाराम के खिलाफ अनुसंधान लंबित रखा था।

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