पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • BVG Told Bhaskar Yes, Video Of Bribe Was Made And Then Denied From The Video Itself, Late Night Claim Talked About Giving CSR Funds, Not Bribe

ग्रेटर नगर निगम ड्रामा:बीवीजी ने भास्कर से कहा- हां, रिश्वत का वीडियो बना फिर वीडियो से ही खंडन किया, देर रात दावा- सीएसआर फंड देने की बात की, घूस की नहीं

जयपुरएक महीने पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर ने कंपनी के ऑपरेशन मैनेजर संदीप चौधरी से बात की। उन्होंने पहले तो कहा ‘वीडियो सही है।’ फिर खुद को फंसता देख किनारा कर लिया और फोन बंद। - Dainik Bhaskar
भास्कर ने कंपनी के ऑपरेशन मैनेजर संदीप चौधरी से बात की। उन्होंने पहले तो कहा ‘वीडियो सही है।’ फिर खुद को फंसता देख किनारा कर लिया और फोन बंद।

गुरुवार देर शाम निलंबित मेयर के पति राजाराम को बीवीजी के साथ बिल पास करने के लिए कमीशन को लेकर हो रही बातचीत का अधूरा वीडियो जारी हुआ। वायरल वीडियो का सच जानने के लिए भास्कर ने कंपनी के ऑपरेशन मैनेजर संदीप चौधरी से बात की। यहां उन्होंने पहले तो कहा ‘वीडियो सही है।’ फिर खुद को फंसता देख किनारा कर लिया और फोन बंद। उठापटक बढ़ी तो रात 8 बजे से लेकर पौने 12 बजे के बीच कंपनी के दूसरे प्रतिनिधि ने एक के बाद एक 2 वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी।

भास्कर से बातचीत में पहले स्वीकारा- वीडियो सही है कंपनी प्रतिनिधि संदीप चौधरी से सवाल

Q. सरकार ने तो पैसा रिलीज कर दिया?
-पेमेंट अभी अकाउंट में नहीं आया।

Q. कितना पेमेंट हुआ है?
-लगभग सवा आठ करोड़ के आसपास..। और कोई खास बात है तो बताईए...

Q. यही कि आपका वीडियो चल रहा है?
-मैंने देखा नहीं अभी।

Q. देखा क्या, आपने तो बनाया होगा ना?
-कौनसा वीडियो... (राजाराम से पैसे का वीडियो?) हां, बिल्कुल सही है।

Q. आपका ही बनाया हुआ है...
-सही है, मैं आपको दोबारा बताता हूं।

फिर संभले:

ओमकार सप्रे, प्रोजेक्ट हैड बीवीजी की ओर से पहले वीडियो में खंडन

बीवीजी का किसी भी संस्था से न तो लेन-देन हुआ न ही कोई बात हुई।

दूसरे में सफाई:

देर रात बीवीजी ने एक और वीडियो में कहा पुराने वीडियो में चर्चा सीएसआर फंड में प्रताप गौरव फंड केंद्र को दिए जाने वाले सहयोग के लिए थी। कंपनी की सफाई के पीछे उनके कई प्रदेशों में चल रहे प्रोजेक्ट हैं। कहीं हालात नहीं बिगड़े इस अंदेशे से खुद को विवादों से अलग किया।

भास्कर इनसाइड; ग्रेटर के विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा मजबूत पर मेयर ने विधायकों की सुनी नहीं

कचरा...कमाई और कुर्सी के लिए नगर निगम ग्रेटर ‘बड़ा पॉलिटिकल थियेटर बना हुआ है’। गुरुवार को सुबह हाईकोर्ट ने सरकार जवाब दाखिल निर्देश करने के दिए। दोपहर में बीवीजी के अकाउंट में सरकार ने करीब सवा आठ करोड़ रुपए का पेमेंट कर दिया ...और शाम होते-होते निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम गुर्जर का बीवीजी से कमीशन मांगने का वीडियो वायरल हो गया। बिलकुल किसी के फिल्म के स्क्रिप्ट की तरह....। भास्कर इनसाइड स्टोरी में जानिए... अपनी ही पार्टी में अब सौम्या गुर्जर की लड़ाई और मुश्किल क्यों हो रहीं हैं।

कारण 1- इस ड्रामे की डोर भाजपा के भी कुछ बड़े चेहरों ने थाम रखी है। ग्रेटर निगम के क्षेत्र में आने वाले विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का दबदबा है...इसके बाद भी सौम्या गुर्जर के लिए कभी पक्ष में माहौल नहीं रहा। इसके पीछे बड़ा कारण है सौम्या की कार्यशैली। बड़े चेहरों का दावा है कि निगम के काम को लेकर कभी विधायकों से चर्चा नहीं की गई।

कारण 2- पहली बार मेयर बनी सौम्या को प्रतिद्वंद्वी के तौर पर भी देखा गया। दीवान ए खास में चर्चा यही है। हकीकत में शील धाभाई के नाम पर सहमति ज्यादा है, जिनको नाम अनुरूप शांत और पुराने स्थिर नेता के तौर पर बताया जा रहा है। अब नजर कोर्ट के आदेश पर है, जहां से स्टे मिलता है तो सौम्या फिर से कुर्सी संभालेंगी।

निलंबित मेयर के लिए उल्टा पासा -
सौम्या ने जिस मुद्दे पर कमिश्नर को घेरा अब पति भी उसी कमीशन के खेल में फंसे

तत्कालीन मेयर सौम्या गुर्जर जिस बीवीजी कंपनी के साथ कमिश्नर की सांठगांठ बता जेबें भरने का आरोप मंढ रही थी, उन्हीं आरोपों के घेरे में अब उनके पति राजाराम गुर्जर हैं। गुरुवार शाम को एक वीडियो वायरल हुआ। इसमें कथित तौर पर सौम्या गुर्जर के पति से 10 प्रतिशत कमिशन लेकर बिल जारी करने की बात होती दिखी।

यह वीडियो उस समय आया, जबकि सौम्या गुर्जर के मेयर पद से निलंबन मामले को लेकर बीजेपी कोर्ट में गई है। इससे साफ है कि सौम्या को पहले से घेरने की तैयारी थी। वीडियो 20 अप्रेल का है। उधर राजाराम ने वीडियो को फर्जी बताया।

सफाई हेरिटेज में भी नहीं, बोर्ड में मेयर को छोड़ सब बोले-चुप रहने की नसीहत

बीवीजी को लेकर हेरिटेज बोर्ड बैठक में उप महापौर असलम फारुकी, पार्षद उमरदराज, आयशा सिद्धकी, मनोज मुद्गल, शफीक, दशरथ सिंह सहित कई कांग्रेसी पार्षदों ने ब्लैक लिस्ट करने को कहा। असलम ने जब बीवीजी पर बोलना चाहा तो मेयर ने रोक दिया कि ये मसला पास हो चुका है। मेयर से सवाल किए कि बीवीजी के मामले में 400 नोटिस पहले से हैं फिर सिर्फ चेतावनी क्यों? इस पर आयशा आदि पार्षदों ने मेयर को कटघरे में लिया।

1600 रुपए/ टन कचरा उठाने आई कंपनी का पैकेज 1792 तक पहुंचा, उठना कचरा था..पर कई दामन हुए दागदार

2016 में बीवीजी को हायर किया गया। मेयर-कमिश्नर बिलों को लेकर बवाल मचाते रहे, जबकि हकीकत में शहर कचरा हो गया। कंपनी से हुए करार में घर से कचरा उठाना था लेकिन निगम ने घरों से कचरा उठाने के बजाए पहले उसे गली-बाजार में फैलाया। इसके बाद जो बिल बनाए, उसमें मलबा, पत्थर भी शामिल था जो घरों से तो नहीं ही निकलते।

चार बरस बाद भी गली-बाजारों में कचरा डिपो बने हुए हैं। काम की जिम्मेदारी जिन एसआई से लेकर सेनेट्री इंस्पेक्टर और जोन उपायुक्तों को दी हुई है, उन्होंने केवल बिल आगे भेजे। सफाई का मैकेनिज्म बन ही नहीं पाया। इस पर फोकस के बजाए या तो कोई कंपनी के साथ है या फिर उसके खिलाफ।

1 कांट्रेक्ट में तय था मशीन से कचरा उठेगा

कचरा घर से उठकर मशीन टू मशीन ट्रांसफर होना था, ताकि कहीं नहीं फैले।
ऐसा इसलिए: प्राइमरी कलेक्शन से निकल सैकंडरी कलेक्शन को जीरो पर लाएं।
और हुआ ये: कचरा सेग्रीगेट नहीं हुआ। क्लेम पूरा। काम केवल वजन उठाने का दिखा। जमीन पर सैकंडरी पाइंट विकसित कर लिए। गंदगी फैलती रही।

2. जरूरत कभी पूरी नहीं हुई

कंपनी मेरे कार्यकाल में थी। सरकार को फाइल भेज मंजूरी मिली थी। पुराने शहर में कचरा परिवहन की दरें 50 रुपए ज्यादा थीं। मंत्री ने फाइल लौटाई। बाहरी शहर में 1600 रु/टन और परकोटे में 1650 रु./ प्रति टन था। जो कॉन्सेप्ट सोचा था वह कभी पूरा नहीं हुआ।-निर्मल नाहटा, पूर्व मेयर

3. सरकार बदली पर हालात नहीं
500 नोटिस के बावजूद हालात नहीं सुधरे तो 28 जनवरी को बोर्ड की मीटिंग में बीवीजी को बाहर करने का निर्णय लिया गया। इसमें कांग्रेस के पार्षद भी शामिल थे।
30 दिन में विकल्प: तय हुआ 30 दिन में व्यवस्था होगी। 6 मई को कंपनी कोर्ट पहुंच गई और 8 सप्ताह तक कार्रवाई पर स्टे ले आई।

निलंबन से लेकर कंपनी से सांठगांठ तक के 8 अहम किरदार और हालात

  • सौम्या गुर्जर: केवल कोर्ट से राहत की उम्मीद। संघ समर्थित माने जा रहे। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष का भी साथ।
  • राजाराम: अभी तक जो अपने राजनीतिक अनुभव से पत्नी की बैकबोन थे, अब खुद आरोपों के कटघरे में।
  • संदीप चौधरी: कंपनी के आपरेशन मैनेजर, जिनकी भूमिका अप्रेल से सौम्या गुर्जर के खिलाफ। कमिश्नर से मारपीट के दौरान भी हंगामा करने के आरोपी। वीडियो बनाने में भी इन्हीं को आगे माना जा रहा।
  • यज्ञमित्र: सौम्या के निलंबित होने के बाद कार्यवाहक मेयर के साथ अतिरिक्त सावधान और सरल बन रहे, ताकि खोट सौम्या में ही दिख सके। कंपनी से नजदीकियों पर कानून की किताबें आगे करते हैं।
  • शील धाभाई: कार्यवाहक मेयर, जिनके मन की लालसा नवंबर में भी मेयर की थी। बीजेपी विधायक की पसंद, क्योंकि वो भी इनमें प्रतिस्पर्धा नहीं देखते।
  • दीपक नंदी: डीएलबी के डायरेक्टर हैं। कार्रवाई के लिए सरकार के निर्देशों पर निर्भर। निगम और मंत्री के बीच सेतु।
  • शांति धारीवाल: जिन्होंने मेयर को निलंबित कर ब्यूरोक्रेसी का दिल जीता। परिपक्व राजनेता के तौर पर कार्यवाहक मेयर भी बीजेपी का बनाया। अब पार्टी में ही मामले को अनावश्यक तूल की बातें।
  • मुनेश गुर्जर: हेरिटेज निगम के कार्यों की विफलता ढंक रही। ग्रेटर फेल हुआ तो ये खुद को पास मान बैठे। पहले ही बैठकों में तकनीकी रूप से बचती थीं, अब पूरी तरह कांग्रेसी विधायक इन पर हावी।
खबरें और भी हैं...