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दर्द पर मरहम:कैंसर मरीजों को 7 दिन तक मिलेगी 10 मिलीग्राम की ‘मोर्फिन’ टैबलेट, पर्ची जरूरी, स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल जारी

जयपुर15 दिन पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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एक्सपायरी डेट से पहले फूड सेफ्टी एंड ड्रग कमिश्नरेट को सूचना देनी पड़ेगी। - Dainik Bhaskar
एक्सपायरी डेट से पहले फूड सेफ्टी एंड ड्रग कमिश्नरेट को सूचना देनी पड़ेगी।

प्रदेश के जिला, सैटेलाइट और उपजिला अस्पतालों में कैंसर के असहनीय दर्द को झेल रहे मरीजों को सात दिन तक 10 मिलीग्राम की ‘मोर्फिन’ की टैबलेट मिलेगी। अस्पतालों में आने वाले मरीजों को दी जाने वाली दवाओं का रिकाॅर्ड मेंटेन करना अनिवार्य होगा। मरीजों को मिलने वाली तीन पर्ची में एक मरीज, एक दवा देने वाले के पास और तीसरी पर्ची डॉक्टर के पास रहेगी। इसके अलावा रोजाना का पूरा स्टॉक मेंटेन रखना होगा।

अस्पताल प्रशासन को दवा की एक्सपायरी डेट आने से पहले फूड सेफ्टी एंड ड्रग कमिश्नरेट को सूचना देनी पड़ेगी। किसी भी तरह की लापरवाही बरतने पर संबंधित स्टाफ के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही होगी। राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आरएमएससीएल) की ओर से 50 हजार मोर्फिन टैबलेट खरीदने की प्रक्रिया जारी कर दी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य मंत्रालय की तर्ज पर स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल जारी किया गया है। इसकी पालना सभी अस्पतालों को करना अनिवार्य है। मरीजों को हर हालत में दवा मिले। इसके लिए मेडिकल कॉलेज से जुड़े व जिला अस्पतालों को आपस में समन्वय रखना पड़ेगा।

घरवालों के दर्द पर मरहम लगाने के लिए ‘पेलिएटिव केयर यूनिट’
नेशनल प्रोग्राम फॉर पेलिएटिव केयर (एनपीपीसी) के तहत प्रदेश के 33 जिला अस्पतालों में लाचार घरवाले भी दर्द से तड़पते मरीज के आखिरी सांसें गिनने का इंतजार करते रहते हैं। मरीजों और उनके घरवालों के दर्द पर मरहम लगाने के लिए पेलिएटिव केयर यूनिट संचालित है। यहां पर लंबे समय से गंभीर बीमारी जैसे असहनीय दर्द, सांस में तकलीफ, मानसिक रोग, किडनी फेल होने, लकवा, शरीर के आधे हिस्से निचले अंग के काम नहीं करने या एेसी कोई बीमारी जिसके कारण जीवन के स्तर में गंभीर गिरावट आई हों।

सांस में तकलीफ से पीड़ित मरीजों के इलाज की सुविधा उपलब्ध है। यहां कैंसर के आखिरी स्टेज से जूझ रहे मरीजों को दर्द कम करने की दवा देने के साथ उनकी पूरी देखभाल की जाती है। क्लीनिक पर ओपीडी, डे-केयर, इनडोर, पैन मैनेजमेंट और होम बेस्ड केयर की सुविधा है। डॉ. शर्मा ने बताया कि डॉक्टर के हस्ताक्षर व मुहर होने पर मरीजों को 10 मिलीग्राम की मोर्फिन टेबलेट दी जाएगी।

स्वास्थ्य मंत्रालय की तर्ज पर प्रदेश के जिला अस्पतालों में संचालित पेलिएटिव केयर यूनिट में दी जाने वाली मोर्फिन टेबलेट के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल जारी किया गया है। इसके तहत प्रोसेस और मात्रा की पालना करना होगा। - सुधीर कुमार शर्मा, मिशन निदेशक (नेशनल हैल्थ मिशन)

(भास्कर एक्सपर्ट पैनल : निर्मला शर्मा, स्टेट नोडल अधिकारी, एननपीपीसी)

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