विश्व हृदय दिवस पर विशेष:कोरोना के बाद कार्डियोमियोपैथी के केस बढ़े, चिकित्सक से सलाह लेते रहे

जयपुर2 महीने पहले
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कोरोनो के सामान्य लक्षण, जांच एवं इलाज के बारे में हम सभी काफी हद तक परिचित हैं। आज ‘‘विश्व हृदय दिवस’ पर हम इस बीमारी से होने वाले हृदय पर कुप्रभाव के बारे में बात करेंगे। कोरोना से ठीक होने के बाद व्यक्ति स्वस्थ महसूस करता है। धीरे-धीरे उसका जीवन पुनः पटरी पर आ जाता है। एक दिन अचानक सुबह-सुबह उसके सीने में दर्द होता है एवं श्वास लेने में तकलीफ होती है।

मरीज तुरंत अस्पताल जाता है। जांच में पता चलता है कि हार्ट अटैक हुआ है। ऐसे मरीजों की संख्या काफी बढ़ रही है। इसका मुख्य कारण हृदय की धमनियों में खून के थक्के जमना है। सामान्यतया कोरोना में फेफड़ों में ऐसा होता है, लेकिन यह हृदय में भी हो सकता है। हार्ट अटैक के अलावा कोरोना के बाद कार्डियोमियोपैथी भी अक्सर हो जाती है।

इस रोग में हृदय बड़ा हो जाता है एवं ढंग से कार्य नहीं करता है। श्वास फूलना, शरीर पर सूजन आना एवं थकान इसके मुख्य लक्षण हैं। कभी-कभी कोविड के बाद व्यक्ति की धड़कन या तो बढ़ जाती है या सामान्य से कम हो जाती है। मरीज को धड़कन बढ़ने से यह महसूस होने लगती है। यदि धड़कन बहुत ज्यादा कम होती है तो पेस मेकर भी लगाया जाता है। यह तकलीफ कोविड के बाद 6 महीने तक हो सकती है।

कैसे बचें: बचाव ही उपचार है। कोरोना से स्वस्थ होने के बाद चिकित्सक की सलाह से दवाई जरूर लें। विशेषकर रक्त को पतला करने वाली गोली। (जैसा डाॅ. मणि कोठारी ने बताया)

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