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जयपुर एयरपोर्ट का कार्गो मूवमेंट में देश में 12वां स्थान:गोवा और लखनऊ जैसे एयरपोर्ट्स को भी पीछे छोड़ा, कुल 13336 मीट्रिक टन कार्गो का परिवहन किया

जयपुर2 महीने पहले
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21 करोड़ की लागत से बनाया नया कार्गो टर्मिनल। - Dainik Bhaskar
21 करोड़ की लागत से बनाया नया कार्गो टर्मिनल।

जयपुर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट कोरोना काल में यात्रियों के आवागमन के लिहाज से भले ही पिछड़ गया हो, लेकिन कार्गो मूवमेंट के लिहाज से जयपुर एयरपोर्ट की रैंक में सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2020-21 में जयपुर एयरपोर्ट से कुल 13336 मीट्रिक टन कार्गो का परिवहन किया गया है। इस तरह कार्गो परिवहन के मामले में जयपुर एयरपोर्ट देश में 12वें स्थान पर रहा है। पहले पर मुंबई और दूसरे स्थान पर दिल्ली रहा है।

कार्गो परिवहन के मामले में जयपुर एयरपोर्ट ने गोवा और लखनऊ जैसे एयरपोर्ट्स को भी पीछे छोड़ दिया है। हालांकि यात्रीभार और फ्लाइट संचालन के मामले में दोनों ही एयरपोर्ट जयपुर से कहीं आगे हैं। जयपुर एयरपोर्ट से कार्गो परिवहन की संभावनाओं को देखते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने 21 करोड़ की लागत से हाल ही नया कार्गो टर्मिनल भी विकसित किया है। अब यहां से घरेलू कार्गो का मूवमेंट भी शुरू कर दिया है। इससे न केवल यहां के व्यापारियों और किसानों को अपनी वस्तुएं बाहर भेजने में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें अपनी सामग्री का उचित दाम भी मिल सकेगा।

एयरपोर्ट अथॉरिटी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जल्द ही कार्गो स्पेशल फ्लाइट्स का संचालन भी शुरू हो सकेगा। गाैरतलब है कि देश के अहमदाबाद, मुंबई, दिल्ली, बैंगलुरू जैसे कई बड़े शहरों से कार्गो स्पेशल फ्लाइट संचालित होती हैं।

जयपुर एयरपोर्ट के कार्गो प्लान पर एक नजर
जयपुर एयरपोर्ट से वर्ष 2013 में एयरपोर्ट के टर्मिनल-1 से कार्गो मूवमेंट शुरू हुआ है। वर्ष 2014-15 में 9265 मीट्रिक टन कार्गो परिवहन किया गया। वहीं 2019-20 में कोरोना से पहले 17680 मीट्रिक टन कार्गो परिवहन हुआ। जबकि, 2020-21 में कोरोना के चलते 13336 मीट्रिक टन कार्गो का ही परिवहन हो सका। पहले इंडिगो और गो एयर ही कार्गो का परिवहन करती थी। लेकिन, अब एयर इंडिया, स्पाइसजेट और एयर एशिया भी परिवहन करने लगी।

21करोड़ से नया टर्मिनल भवन बनाया
अब 21 करोड़ की लागत से कार्गो मूवमेंट के लिए नया टर्मिनल भवन बनाया गया है। बिल्डिंग के चार सेक्शन में कोल्ड स्टोरेज की सुविधा दी गई है। इसमें फार्मास्युटिकल और फल-सब्जियां सुरक्षित रखी जा सकें। इससे राजस्थान की कृषि उपज मंडी समिति अपनी वस्तुएं देश-विदेश में भेज सकती हैं। अभी जेम एंड ज्वेलरी का कार्गो मूवमेंट ज्यादा होता है। लेकिन अब फल-फूल, सब्जी, दवाईयों का भी हो सकेगा। क्योंकि जयपुर से इलेक्ट्रॉनिक सामान और पेरिशेबल कार्गो की डिमांड भी अधिक है।

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