विवाद:केंद्र ने ‘द इलेक्ट्रिसिटी रूल्स-2020’ को नोटिफाई किया, लेकिन सरकारी बिजली कंपनियां लागू करने को तैयार नहीं

श्याम राज शर्मा | जयपुर10 महीने पहले
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  • बिजली सप्लाई व कनेक्शन में देरी पर मुआवजे का भार भी डिस्कॉम पर पड़ेगा

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने ‘द इलेक्ट्रिसिटी रूल्स (राइट्स ऑफ कज्यूमर्स) -2020’ को नोटिफाई कर दिया है। इसके बाद उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली पाने का अधिकार व एक सप्ताह में कनेक्शन पाने का अधिकारी मिल गया है। लेकिन प्रदेश का ऊर्जा विभाग और बिजली वितरण कंपनियां फिलहाल यह सुविधा देने के लिए तैयार नहीं है।

प्रदेश की जयपुर, जोधपुर व अजमेर डिस्कॉम की खस्ताहाल आर्थिक स्थिति के कारण 24 घंटे बिजली सप्लाई का फीडर लेने के लिए औद्योगिक व कॉमर्शियल उपभोक्ताओं से पूरे सिस्टम का खर्चा देना पड़ता है। यह 5 से लेकर 50 लाख रुपए तक होता है।

द इलेक्ट्रिसिटी रूल्स नोटिफिकेशन लागू करने के बाद उपभोक्ता को कनेक्शन मांगने पर बिजली कंपनियों को तय समय में कनेक्शन देना होगा, अन्यथा देरी होने पर उपभोक्ता मुआवजा लेने का हकदार होगा। इससे डिस्कॉम का वित्तीय घाटा बढ़ेगा और आर्थिक स्थिति कमजोर होगी। केंद्र सरकार के नए नोटिफिकेशन के बाद बिजली कंपनियों के प्रबंधन ने इसकी स्टडी करवानी शुरु कर दी है।
द इलेक्ट्रिसिटी रूल्स लागू हुआ तो मिलेगी जनता को राहत

प्रदेश में छोटे कस्बों व ग्रामीण इलाकों में घरेलू, औद्योगिक व कॉमर्शियल श्रेणी का बिजली कनेक्शन लेने के लिए आवेदन करने पर कई महीने लग जाते है। वहीं डिस्कॉम का एचटी सिस्टम नहीं होने पर उपभोक्ताओं को सेल्फ फाइनेंस स्कीम में आवेदन करने का दबाव डाला जाता है। यानि 11 केवी फीडर व ट्रांसफार्मर सहित अन्य खर्चा उपभोक्ता को देना होता है। ऐसे में उद्योग लगाने में मशीनरी से ज्यादा खर्चा बिजली कनेक्शन में हो जाता है।
केंद्र को आपत्ति दर्ज करवा दी थी : कल्ला
ऊर्जा मंत्री बीडी कल्ला का कहना है कि नए ‘द इलेक्ट्रिसिटी रूल्स (राइट्स ऑफ कज्यूमर्स)-2020’ व विद्युत अधिनियम को लेकर हमने केंद्र सरकार व ऊर्जा मंत्रालय को आपत्ति दर्ज करवा दी थी। केंद्र प्रदेश की बिजली कंपनियों की शक्तियां अपने हाथ में लेना चाहता है। जबकि कई बार पत्र लिखने के बावजूद बिजली कंपनियों को वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही है। यह गलत है। नए ‘द इलेक्ट्रिसिटी रूल्स-2020’ की स्टडी करवाई जा रही है।

यह काम नहीं किया तो देना होगा मुआवजा

  • 24 घंटे बिजली सप्लाई करनी होगी, अन्यथा देना होगा मुआवजा।
  • कनेक्शन में देरी, डिस्कनेक्शन, रि-कनेक्शन व शिफ्टिंग में देरी।
  • उपभोक्ता की श्रेणी बदलना, लोड परिवर्तन में ज्यादा समय लगना।
  • खराब व बंद मीटर को समय पर नहीं बदलना।
  • वोल्टेज में देरी व बिल की शिकायतों के निस्तारण नहीं करना।
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