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कॉकटेल इंजेक्शन खरीद में विवादों का ओवरडोज:केंद्र ने 1100 इंजेक्शन भेजे, एक भी नहीं लगा, आरएमएससीएल ने 10 करोड़ रुपए के और खरीद लिए

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: संदीप शर्मा
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केंद्र ने 1100 इंजेक्शन भेजे, एक भी नहीं लगा... आरएमएससीएल ने 10 करोड़ रुपए के और खरीद लिए - Dainik Bhaskar
केंद्र ने 1100 इंजेक्शन भेजे, एक भी नहीं लगा... आरएमएससीएल ने 10 करोड़ रुपए के और खरीद लिए

आरएमएससीएल (राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड) ने कोरोना की आड़ में कई गड़बडियां की, लेकिन ऐसा पहली बार किया गया है कि रखे हुए एक भी इंजेक्शन को काम में नहीं लिया गया और फिर भी 10 करोड़ रुपए कीमत के 1000 इंजेक्शन की खरीद और कर ली गई।

आरएमएससीएल अधिकारियों ने डॉक्टर्स के उस तर्क को भी दरकिनार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ये इंजेक्शन काम में नहीं लिए जा सकते। वजह बताई थी, इन इंजेक्शन का कम उपयोगी होना और साइड इफेक्ट बहुत अधिक होना। इसके बावजूद की गई खरीद के बाद अब प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों के अधीक्षकों और प्रिंसीपल पर दवाब बनाया जा रहा है कि इन इंजेक्शन को मंगाया जाए।

लेकिन किसी भी काम में नहीं आने की वजह से मेडिकल कॉलेज के अधीक्षकों ने मना कर दिया है। अब ये इंजेक्शन आरएमएससीएल के गले की फांस बन गए हैं कि आखिर इन्हें कहां खपाएं। अब सवाल यह उठ रहा है कि एक इंजेक्शन एक लाख रुपए का है और किसी काम में नहीं लिया जा सकता। इसके बावजूद एक साथ 1000 इंजेक्शन क्यों खरीदे गए?

अब डिमांड लेटर डालने का दबाव बना रहे; एसएमएस ने साफ इनकार किया

कोरोना के गंभीर मरीजों के के इलाज के लिए केन्द्र ने एंटीबॉडी कॉकटेल इंजेक्शन भेजे। 1100 इंजेक्शन एसएमएस को दिए गए। किसी भी मरीज को ये लगाए नहीं गए। इसके बाद एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई और उनसे रिपोर्ट मांगी गई। कमेटी के डॉक्टरों ने कहा कि इस इंजेक्शन में कुछ रिजल्ट्स आने बाकी हैं। ऐसे में इन्हें लगाना काफी रिस्की हो सकता है।

इसके बाद ये इंजेक्शन काम में नहीं लिए गए। अभी ये इंजेक्शन एसएमएस के ड्रग स्टोर में ज्यों के त्यों रखे हैं। अब जबकि ये इंजेक्शन काम नहीं आ रहे हैं और ना आ सकते हैं तो आरएमएससीएल के अधिकारियों की ओर से ड्रग स्टोर के कर्मचारियों और अन्य अस्पतालों के इंचार्ज को इसके डिमांड लेटर (इंडेंट) बनाने के लिए कहा जा रहा है। एसएमएस ने कमेटी का हवाला देते हुए इंडेट बनाने से मना कर दिया।

17 मई की कमेटी की रिपोर्ट देखिए, इसमें प्रिंसीपल को साफ लिखा है कि ये इंजेक्शन काम नहीं आएंगे। प्रदेश के कहीं ओर इंजेक्शन नहीं भेजे गए। 26 मई को एसएमएस में रख दिए गए। सवाल उठना वाजिब है कि इतना सब होने के बावजूद आरएमएससीएल ने 4 जून को इसकी खरीद क्यों की।

विभाग का कुतर्क; खरीदेंगे नहीं तो काम में कैसे लेंगे, सवाल- बेजां क्यों खरीदे?

हमें इंजेक्शन खरीदने से मना नहीं किया गया। खरीदेंगे नहीं तो काम में कैसे लेंगे? यूज करने वाले अलग हैं, खरीदने वाले अलग हैं। हो सकता है कमेटी ने पहले मना कर दिया, फिर बाद में हां कहा हो। सीनियर ज्यादा अच्छे से बता पाएंगे। मुझे तो जाे कहा गया, मैंने तो उसी की खरीद की है। -संदीप चौहान, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रिक्योरमेंट, आरएमएससीएल

कोई भी दवा आती है तो उसे काम में लिया जाता है। हमने केवल एसएमएस अस्पताल में ही इंजेक्शन दिए थे। उन्होंने काम में क्यों नहीं ली, हमें नहीं पता। हमारा काम दवा खरीदने का है और उनका काम में लेने का। -आलोक रंजन, एमडी, आरएमएससीएल