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मौतों का सच सीधे ग्राउंड से:देशभर में कोविड से अनाथ होने वाले बच्चे 577 बताए... जबकि भास्कर की पड़ताल में सिर्फ राजस्थान में ही 411 मिले

जयपुर4 महीने पहले
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कोरोना ने पिता को तो ब्लैक फंगस ने मां को छीना।  27 मई को दोनों बेटियों ने मां को मुखाग्नि दी। - Dainik Bhaskar
कोरोना ने पिता को तो ब्लैक फंगस ने मां को छीना। 27 मई को दोनों बेटियों ने मां को मुखाग्नि दी।
  • आंकड़ों के खेल से बच्चों को तो बख्शो, उनके सिर से साया उठ गया है, प्रदेश में भी 20 मई तक 17 अनाथ थे, 8 दिन में कैसे 411 हो गए?

कोराेना ने डेढ़ साल में पूरे के पूरे परिवार बर्बाद कर दिए। सबसे ज्यादा प्रभावित वे बच्चे हैं जिन्होंने इस दौरान अपने माता-पिता दोनों को खो दिया या जिनका एक अभिभावक पहले ही नहीं था और कोरोना ने दूसरा भी छीन लिया। केंद्र ने हाल में अनाथ बच्चों के लिए कुछ सहूलियतों की घोषणा तो जरूर की लेकिन महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 25 मई को ट्वीट कर बताया कि देश में सिर्फ 577 बच्चे ही अनाथ हुए हैं।

इन आंकड़ों को देखकर लगता है कि केंद्र दी हुई राहत सभी अनाथ बच्चों तक पहुंचेगी। क्योंकि राजस्थान सरकार ने 28 मई तक एक सर्वे कराया तो इसमें प्रदेशभर में 411 बच्चों के अनाथ होने का आंकड़ा सामने आया है। जब एक ही प्रदेश में इतने बच्चे अनाथ हुए हैं तो देशभर में यह आंकड़ा सिर्फ 577 ही कैसे हो सकता है? हालांकि इससे पूर्व भी राजस्थान सरकार ने 20 मई तक का एक सर्वे किया था।

उसमें अनाथ बच्चों की संख्या प्रदेशभर में मात्र 17 ही बताई गई थी। राजस्थान बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल का कहना है कि फिलहाल हम तीन मुख्य स्कीमों गोराधाय, उत्कर्ष और पालनहार से इन बच्चों की परवरिश में सहयोग करेंगे। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से भी इनकी आिर्थक मदद कराएंगे। ऐसे बच्चों खासकर लड़कियों के लिए भी हम सर्वे करवा रहे हैं जो माता-पिता के बाद दादा-दादी या अन्य परिजनों के साथ हैं। अगर उन्हें वहां दिक्कत है तो हम उन्हें भी सरकार के संरक्षण में लेंगे।

कोरोना ने पिता को तो ब्लैक फंगस ने मां को छीना

कोटा में महज एक माह के अंतराल में दाे बेटियाें के सिर से माता-पिता का साया उठ गया।
कोटा में महज एक माह के अंतराल में दाे बेटियाें के सिर से माता-पिता का साया उठ गया।

पिता और मां काे बचाने के लिए मीनाक्षी (30) और तोषिका (25) ने खूब संघर्ष किया। अस्पतालाें में दाैड़ीं, हर किसी से मदद मांगी, डाॅक्टराें के आगे गिड़गिड़ाईं, लेकिन दोनों को ही नहीं बचा पाईं। मां विमलेश (56) ने 26 मई को ब्लैक फंगस से दम तोड़ दिया तो इससे पहले 27 अप्रैल को पिता अजय सक्सेना (60) की कोरोना से मौत हो गई। 27 मई को दोनों बेटियों ने मां को मुखाग्नि दी तो हर किसी का कलेजा भर आया।

प्रदेश सरकार ने 20 मई तक जो सर्वे किया उसमें प्रदेश में कुल 17 ही अनाथ बच्चे मिले।

  • 7 दिन बाद 28 मई तक का सर्वे किया गया तो अनाथ बच्चों का आंकड़ा 411 पर पहुंच गया। इससे पहले सर्वे को गंभीरता से न लेने का संशय उठ रहा है।
  • पहले सर्वे की हालत यह थी कि जयपुर जिले में एक भी अनाथ नहीं मिला था। जबकि भास्कर को तीन गांव में ही 7 अनाथाें की जानकारी मिल गई।
  • दोबारा सर्वे सरकार ने 28 मई तक कराया तो जयपुर जिले में 29 बच्चे मिल गए जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था। दूसरे सर्वे में सबसे ज्यादा 34 अनाथ अलवर में मिले।