जिंदगी से बड़ी जेब:कोलेस्ट्रॉल-एंटी फंगल दवा जांच में घुली नहीं, रिपोर्ट तब आई, जब लाखों डोज बिक गईं

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: सुरेन्द्र स्वामी
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एंटी फंगल ‘इट्रेकोनेजोल’ कैप्सूल भी नहीं घुलने से संक्रमण को रोकने में फेल हुआ है। - Dainik Bhaskar
एंटी फंगल ‘इट्रेकोनेजोल’ कैप्सूल भी नहीं घुलने से संक्रमण को रोकने में फेल हुआ है।

मुनाफाखोरों की भूख आमजन की जिंदगी पर भारी पड़ रही है। कोलेस्ट्रोल-बीपी और फंगस रोकने वाली दवाएं अमानक मिल रही हैं। टेस्टिंग लैब में न तो दवा घुल रही है और ना ही पूरे घटक मिल रहे हैं। इससे भी खराब स्थिति यह है कि जब तक टेस्टिंग लैब से जांच रिपोर्ट आती है, लाखों डोज बिक चुकी होती है। कोलेस्ट्राल कम करने की ‘एटोरवास्टेटिन’ टेबलेट जांच में घुली ही नहीं।

एंटी फंगल ‘इट्रेकोनेजोल’ कैप्सूल भी नहीं घुलने से संक्रमण को रोकने में फेल हुआ है। फेफड़ों का संक्रमण रोकने वाली एंटीबायोटिक एमोक्सिलीन एंड पोटेशियम क्लेवुनेट और चक्कर आने पर इस्तेमाल की जाने वाली सिनेरिजिन एंड डॉमपेरीडोन मेलेट दवा में भी पूरा घटक तक नहीं मिला। ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा ने 15 तरह की दवाओं के लिए अलर्ट जारी किया है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत संबंधित बैच नंबर की दवाओं का स्टॉक जब्त कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

ये दवाएं अमानक

  • एमॉक्सीसिलिन -पोटे. क्लेवुनेट
  • सिनेरिजिन डोमपेरीडोन मेलेएट
  • इट्रेकोनोजोल कैप्सूल
  • इट्रोकोनोजोल
  • एटोरवास्टेटिन
  • राबेप्राजोल सोडियम एंड डीपी
  • राबेप्राजोल सोडियम

मौजूदा स्थिति

  • प्रदेश में वर्ष 2019 से जून-2021 तक कुल सैंपल 12253 में से 5599 जांच किए गए।
  • जयपुर की सेठी कॉलोनी में एकमात्र सरकारी लैब।
  • जोधपुर, उदयपुर व बीकानेर में ड्रग टेस्टिंग लैब का भवन बनकर तैयार। मेनपावर की कमी से चालू नहीं।

कम घटक या नकली दवाओं की पहचान ऐसे करें

  • दवा का रंग उड़ जाना
  • वजन बराबर नहीं होना
  • घटक की मात्रा तय मात्रा में नहीं
  • सीरप में घुली दवा नीचे बैठ जाना
  • दवा नहीं घुलना
  • लेबलिंग में गड़बड़ी
  • कंपनी का नाम, निर्माण तिथि, एक्सपायरी डेट नहीं होना

क्वालिटी की जिम्मेदारी कंपनी व अस्पताल की

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के फार्माकॉलोजी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. लोकेन्द्र शर्मा का कहना है दवा निर्माण के समय कंपनियों को घटक, मात्रा के साथ-साथ मॉनिटरिंग अनिवार्य करनी चाहिए। जिससे दवाओं की क्वालिटी में सुधार हो सकेगा।

एसएमएस अस्पताल के मेडिसन के डॉ.रमन शर्मा व डॉ.पुनीत सक्सेना का कहना है कि जो दवा घुली ही नहीं तो बीमारी को रोकनें में उसका असर ही नहीं होगा। और घटक पूरा नहीं होने पर बीमारी ठीक नहीं होगी।

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