राजनीति और अफसरशाही की अंदर की बातें:राजस्थान के सियासी आसमान में आशंका के बादल, फैसले की गर्जना, बदलाव की बाढ़ में कद और पद बहने का डर

जयपुर2 महीने पहले
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राजधानी में इन दिनों 9 जनपथ के नाम से नया पावर सेंटर बनकर उभरा है। 9 जनपथ पर नेताओं से लेकर ब्यूरोक्रेट्स अकसर हाजिरी लगाते हैं, लेकिन इन दिनों यहां नए चेहरे भी नजर आ रहे हैं। इन्हें देखकर हर कोई हैरान है। 9 जनपथ पर सचिन पायलट के कोर कमांडर्स कहे जाने वाले नेताओं की महफिल सज रही है। सियासी हलकों में तो यह चर्चा भी है कि जो यहां नजर आया तो समझो उसकी इंटिग्रिटी शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पायलट खेमे के एक विधायक ने इस सेंटर पर बैठने के बाद ही लंबा चौड़ा बयान जारी कर सीएम की तारीफ की और फिर खेमा बदल लिया। इस पावर सेंटर की तुलना बीजेपी राज के आज से 17 साल पहले के एक बड़बोले नेता से की जाने लगी है। उन नेताजी की कहानी यह है कि राजनीतिक नियुक्ति से बर्खास्त करके बीच सड़क पर उतारकर ड्राइवर चला गया था। फिलहाल 9 जनपथ सरकार और उसके मुखिया के लिए डैमेज कंट्रोल सेंटर के रूप में काम कर रहा है, लेकिन इससे होने वाले डैमेज की कल्पना की चिंता कांग्रेस के नेता अभी से करने लगे हैं।

संभावित फीडबैक रिजल्ट से कई चेहरों की शिकन बढ़ी

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अजय माकन के विधायकों के फीडबैक के बाद से सरकार के कई मंत्री परेशान हैं। फीडबैक का रिजल्ट आने से पहले ही कई मंत्रियों की नींद उड़ गई है। हाईकमान के पास पहले से कई मंत्रियों की शिकायतें थीं। अब माकन की रिपोर्ट ने आग में घी का काम कर दिया है। विधायकों ने कई मंत्रियों के खिलाफ जिस तरह की शिकायतें की हैं, उन्हें इग्नोर करना अब आसान नहीं होगा। मंत्रियों का संभावित रिजल्ट पावर कॉरिडोर्स में लीक हो चुका है, जिससे चेहरों की शिकन और बढ़ गई है। परसेप्शन इस तरह का बन गया कि पावर कॉरिडोर्स के लोग अब कोई भी डील करने से पहले मंत्रिमंडल फेरबदल तक वेट एंड वॉच की बात करने लगे हैं।
पिता ने सियासी खेमा बदला, तब से घर में घमासान

पूर्वी राजस्थान के एक विधायक व उनके बेटे के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। पिता ने सियासी खेमा बदला तब से घर में घमासान मचा है। छोटी छोटी बातें भी सोशल मीडिया पर लीक हो रही हैं। विधायक पुत्र ने पिछले दिनों ट्वीट करके पिता के ड्राइंग रूम में सचिन पायलट की फोटो को भगवान से रिप्लेस करने का खुलासा किया। बाद में सामने आया कि विधायक ने पहले राज्यपाल और सीएम के साथ सचिन पायलट की फोटो लगा रखी थी। अब जबसे विधायक ने खेमा बदला है, पायलट की जगह भगवान की फोटो लगा ली। इस रिप्लेसमेंट पर सोशल मीडिया पर खूब डिबेट हुई। शुभचिंतकों ने सलाह के बाद विधायक पुत्र ने ट्वीट डिलीट कर दिया।

सरकार की इमेज बिल्डिंग का महकमा संभाल चुके आईएएस एसीबी के रडार पर

गहलोत सरकार की इमेज बिल्डिंग वाला महकमा संभाल चुके एक विख्यात और अब कुख्यात आईएएस इन दिनों एसीबी के रडार पर हैं। पुराने मामले की जांच अभी बंद नहीं हुई और अब कई और नए कारनामे जांच एजेंसी के हाथ लग चुके हैं। इन अति महत्वाकांक्षी आईएएस के महकमे में एसीबी बड़ा धमाका कर चुकी है। सबसे खास बात यह है सरकार की इमेज बिल्डिंग वाले महकमे के दिनों की कई फाइल्स अब जी का जंजाल बनने वाली हैं। जयपुर ग्रेटर की सस्पेंडेड मेयर के पति से इन आईएएस की दोस्ती सार्वजनिक होने के बाद सरकार के मुखिया की निगाहें भी टेढ़ी हो गई हैं। फिलहाल ये न इधर के रहे न उधर के।

कार्यवाहक मेयर को पता है फिलहाल कुर्सी पर कोई संकट नहीं

जयपुर ग्रेटर की कार्यवाहक मेयर ने चार्ज संभालते ही छह माह लंबी डेडलाइन देना शुरू कर दिया। अफसरों को भी इसी तरह के टारगेट दिए गए। यह तब की बात है जब सस्पेंडेंड मेयर सौम्या गुर्जर की याचिका पर हाईकोर्ट का फैसला नहीं आया था। जब कोर्ट ने सौम्या की याचिका खारिज करके छह महीने में ज्यूडिशियल इंक्वायरी पूरी करने का आदेश दिया। तब नगर निगम वालों को समझ आया कि वाकई मैडम की बात में तो बहुत दम है। अब लगभग तय हो गया है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से फैसला नहीं आ जाता तब तक कार्यवाहक मेयर की कुर्सी पर कोई संकट नहीं है। सरकार में उनकी अच्छी पैठ है, इसलिए फाइलें बुलेट ट्रेन की स्पीड से दौड़ रही हैं।

बीजेपी में सबकी उलझन : हाईकृपा की कृपा किस पर होगी

बीजेपी के भीतर चल रही लीडरशिप की खींचतान से सेकंड लाइन के नेता कंफ्यूज हैं। चेहरे अनेक हैं, हाईकमान की कृपा चुनावों तक किसकी तरफ शिफ्ट होगी, किसी को नहीं पता। पूर्व सीएम का खेमा अब भी हार मानने को तैयार नहीं है। हाल ही में एक अति उत्साही नेताजी ने जिस तरह सेल्फ गोल दागा उससे पूर्व सीएम खेमा डिफेंसिव मोड पर आया है। इस टेस्ट फायर के बाद कुछ और भी नेता रडार पर थे, लेकिन एकबारगी सब होल्ड पर हैं। बीजेपी की सेकंड लाइन के नेता भारी कंफ्यूजन में है कि किस नेता को पकड़कर रखें। चुनावों तक पार्टी में कई समीकरण बनेंगे और बिगड़ेंगे, लेकिन सबके दिमाग में एक बात क्लियर है कि अभी बहुत सोच समझकर चलने का वक्त है। जल्दबाज और अति उत्साही नेता खुद के साथ आका का भी खेल बिगाड़ सकते हैं। समझदार माने जाने वाले नेता रणनीति के तहत डिप्लोमेटिक स्टाइल की सियासत करने में ही भलाई समझ रहे हैं।
दाग अच्छे हैं... भ्रष्टाचार के आरोपी सदाचार की ट्रेनिंग देंगे

पंचायतीराज को मजबूत करने, सदाचार की ट्रेनिंग देने वाले इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान की क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठ रहे हैं। रेवेन्यू बोर्ड के घूसकांड से विवादों में आए आईएएस को इस संस्थान में डायरेक्टर जनरल बना दिया। इनसे एसीबी ने कई दिनों से पूछताछ की थी। दागी अफसरों को इस संस्थान में लगाने का लंबा इतिहास रहा है। इससे पहले बीजेपी राज के दौरान खान घोटाले में जेल गए आईएएस को भी बाद में बहाल होने पर इसी संस्थान का प्रमुख बनाया। गेहूं घोटाले में जेल जा चुकी आईएएस संस्थान की निदेशक रहीं। इससे पहले भी जेल जा चुके दो अफसर संस्थान के प्रमुख रह चुके हैं। बड़ा सवाल यह है कि जिस संस्थान के मुखिया पर ही आरोप हो वहां सदाचार की ट्रेनिंग कौन देगा?

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