भास्कर विशेष:2 मेयर, 2 आईएएस समेत 16 अफसरों की कमेटी ने 4 माह में एक भी बैठक नहीं बुलाई

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: महेश शर्मा
  • कॉपी लिंक
बीवीजी कंपनी को लेकर मचे बवाल के बावजूद सरकार न तो सफाई व्यवस्था दुरुस्त करा पाई, ना ही विवादों का समाधान निकाल पाई है। - Dainik Bhaskar
बीवीजी कंपनी को लेकर मचे बवाल के बावजूद सरकार न तो सफाई व्यवस्था दुरुस्त करा पाई, ना ही विवादों का समाधान निकाल पाई है।

बीवीजी कंपनी को लेकर मचे बवाल के बावजूद सरकार न तो सफाई व्यवस्था दुरुस्त करा पाई, ना ही विवादों का समाधान निकाल पाई है। मामले को ठंडा करने के लिए भारी-भरकम कमेटी जरूर बना दी गई। इसमें 2 मेयर, 2 आईएएस (कमिश्नर) सहित दोनों निगम व स्वायत्त शासन विभाग के मिलाकर 16 अफसर-इंजीनियरों को शामिल किया गया, लेकिन लीड करने का जिम्मा किसी को नहीं दिया। केवल संयुक्त रूप से दोनों मेयर को अध्यक्ष बनाया गया, जबकि दोनों में बीजेपी-कांग्रेस का अलग-अलग बोर्ड है।

ऐसे में सवाल उठता है कि दोनों महापौर कैसे साथ बैठेंगे, समान अथॉरिटी कैसे किसी की बात मानेंगी? ऐसे में हुआ भी यही। कमेटी को लेकर किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। 25 जून 2021 को इस आदेश के बाद नतीजे पर पहुंचना तो दूर, कोई बैठक ही नहीं हो पाई। कमेटी में दोनों बोर्ड के महापौर, दोनों निगम के कमिश्नर, दोनों के ही मुख्य और अतिरिक्त अभियंता, वित्तीय सलाहकार, निदेशक विधि, मुख्य लेखाधिकारी, उपायुक्त स्वास्थ्य और प्रोजेक्ट के एक्सईएन सहित स्वायत्त शासन विभाग के बतौर 3 प्रतिनिधि मुख्य अभियंता (निदेशालय और आरयूआईडीपी) सहित वित्तीय सलाहकार को रखा गया था।

बवाल; बीवीजी के 276 करोड़ के बकाया भुगतान को लेकर 20 करोड़ रुपए की कमिशन डील के वायरल वीडियो के बाद आया था सियासी भूचाल आया...

सवाल; क्या कमेटियां मामले को ठंडे बस्ते में डालने के लिए ही बनती हैं? शहर का कचरा संग्रहण बदहाल हो चुका है... ऐसे में कंपनी को लेकर कोई फैसला आखिर क्यों नहीं किया जा रहा है?

यह था मामला; 20 अप्रैल को एक वायरल वीडियो में आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक निंबाराम की मौजूदगी में बीवीजी के 276 करोड़ के बकाया बिल पास कराने के बदले ~20 करोड़ डोनेशन की बात सामने आई थी। एसीबी ने तत्कालीन मेयर सौम्या गुर्जर के पति राजाराम और बीवीजी प्रोजेक्ट हैड ओमप्रकाश सप्रे को गिरफ्तार किया था। 25 जून 2021 को बनी कमेटी ने बीवीजी के साथ हुए अनुबंध के अनुसार अब तक के बिलों का डेटा, दस्तावेजों, निगम के रिकॉर्ड से मिलान, शास्ति, पैनल्टी एलडी एवं भुगतान योग्य राशि की गणना करके बताना था।

दोनों मेयर मानतीं हैं- बीवीजी का काम ठीक नहीं, बैठक पर बोलीं- वो हमारे यहां आएं

अभी मेरे टाइम में कोई मीटिंग साथ हुई नहीं है। वह हमारे यहां आ जाएंगे, कोई दिक्कत नहीं है। हमारे यहां जगह वगैरह भी ठीक है (सीनियॉरिटी वाली बात पर भी हामी भरी)। जहां तक परफॉर्मेंस की बात है, हम कोर्ट में अपना पक्ष रख चुके हैं। जैसे रिजल्ट चाहिए, वह तो नहीं हैं।- शील धाभाई, मेयर, ग्रेटर निगम

मीटिंग के लिए दोनों का फ्री रहना जरूरी है। अभी तक किसी मसले पर हम साथ नहीं बैठ पाए हैं। मसला आपने याद दिलाया है। वह यहां आएं या मैं वहां जाऊं, अभी उसके लिए बात होना जरूरी है। जहां तक बीवीजी की बात है, जो रिजल्ट आना चाहिए, वह अभी तक नहीं है। - मुनेश गुर्जर, मेयर, हेरिटेज

शासन सचिव भी भूल गए, भास्कर ने पूछा तो याद आया

सरकार के आदेश की पालना होनी चाहिए थी। पता करते हैं कि अभी तक ऐसा क्यों नहीं हो पाया। दोनों संबंधित कमिश्नर से भी बात करेंगे। मामले में जल्द रिपोर्ट लेंगे।- भवानी सिंह देथा, सचिव, स्वायत्त शासन विभाग से सवाल