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उपचुनाव का घमासान:सुजानगढ़ और सहाड़ा में कांग्रेस कॉन्फिडेंट, भाजपा से राजसमंद छीनने को ताकत झोंकी; इंटरनल फीडबैक के मुताबिक राजसमंद में भाजपा मजबूत

जयपुर9 दिन पहले
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प्रदेश में सुजानगढ़, सहाड़ा और राजसमंद विधानसभा सीटों पर 17 अप्रेल को उपचुनाव हैं। कांग्रेस का इंटरनल फीडबैक यह है कि सुजानगढ़ और सहाड़ा में उसके प्रत्याशी मजबूत स्थिति में है लेकिन राजसमंद अब भी भाजपा का किला ढहाने में कांग्रेस को अभी और ताकत लगानी होगी। यही वजह है कि भाजपा से इस सीट को छीनने के लिए कांग्रेस ने एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है। तीनों सीटों पर सहानुभूति का फायदा मिलेगा। इसके बाद इन तीनों ही सीटों पर हार-जीत में बड़ा अंतर रहने की उम्मीद नहीं है।

उपचुनाव से पहले सुजानगढ़ और सहाड़ा कांग्रेस के खाते में थी और राजसमंद सीट पर भाजपा का कब्जा था। तीनों विधायकों के निधन के बाद इन सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। इनमें सुजानगढ़ सीट पर एक बार कांग्रेस तो अगली बार भाजपा के जीतने का ट्रेंड रहा है। पिछली बार कांग्रेस के मास्टर भंवर लाल मेघवाल ने भाजपा के खेमाराम मेघवाल को 40 हजार से बड़े अंतर से हराया था। इस बार भंवर लाल के बेट मनोज के सामने फिर से भाजपा ने खेमाराम को ही उतारा है।

खान कारोबारियों के जरिए जीत रास्त तलाशने में जुटी कांग्रेस
वहीं राजसमंद सीट भी 2003 से भाजपा के खाते में रही। यहां 2008 से 2018 तक किरण माहेश्वरी विधायक रहीं। उनके निधन के बाद भाजपा ने उनकी पुत्री दीप्ति को यहां प्रत्याशी घोषित किया है। इस सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है क्योंकि यहां आरएसएस का काफी प्रभाव है। लेकिन कांग्रेस पंचायत और निकाय चुनावों में भाजपा के इस किले में सेंध लगा चुकी है। इसके अलावा यहां करीब 40 हजार खान मजदूर हैं।

इन वोटों के लिए कांग्रेस ने खान मंत्री प्रमोद जैन भाया को चुनावों तक के लिए यहां कैंप करने के लिए कहा है। हालांकि कांग्रेस के इंटरनल फीडबैक के मुताबिक राजसमंद में फिलहाल भाजपा करीब 10 हजार वोटों से आगे है लेकिन अगले 10 दिनों में ऊंट किस करवट बैठेगा यह कहा नहीं जा सकता।

सहाड़ा कांग्रेस का गढ़, पितलिया बड़ा फैक्टर
सहाड़ा कांग्रेस व राजसमंद भाजपा का गढ़ रहे हैं। सहाड़ा में 2003 से लगातार कांग्रेस के कैलाश त्रिवेदी जीतते रहे। उनके निधन के बाद कांग्रेस ने उनकी पत्नी गायत्री देवी को यहां से प्रत्याशी बनाया है। हालांकि इस बार भाजपा ने यहां के प्रभावशाली निर्दलीय लादूलाल पितलिया को अपने खेमें में शामिल कर लिया है लेकिन उनकी भाजपा में एंट्री बेहद विवादित रही। ऐसे में पीतलिया बैठने से भाजपा को फायदा मिलेगा या नुकसान यह चुनाव के नतीजे ही बताएंगे।

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