शहरी विकास का मिशन सियासी गलियारों से मंदिर-मस्जिद में सिमटा:कांग्रेसी विधायक ने मस्जिद में नए निर्माण मंजूर कराए तो बीजेपी सांसद ने मंदिर के नए काम पास करा लिए

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: महेश शर्मा
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शहरी विकास में बदलाव लाने वाला मिशन राजनैतिक हितों के साथ मंदिर-मस्जिद तक सिमटता दिख रहा है। - Dainik Bhaskar
शहरी विकास में बदलाव लाने वाला मिशन राजनैतिक हितों के साथ मंदिर-मस्जिद तक सिमटता दिख रहा है।

शहरी विकास में बदलाव लाने वाला मिशन राजनैतिक हितों के साथ मंदिर-मस्जिद तक सिमटता दिख रहा है। मिशन के पैसों से बीजेपी-कांग्रेस के नेता पसंद के काम कराने में जुटे हैं। हेरिटेज की सीमाओं को लांघकर जो धार्मिक यात्रा शुरू की गई थी, उसे अब परिपाटी बनाया जा रहा है। पहले कांग्रेस विधायक अमीन कागजी की सिफारिश पर जामा-मस्जिद में नए निर्माण कार्य पास हुए। अब बीजेपी ने एक और मंदिर में नए निर्माण कार्यों को पास करा लिया।

सांसद रामचरण बोहरा (सदस्य, स्थायी समिति-शहरी विकास भी) की सिफारिश पर चांदपोल गेट हनुमान मंदिर में विकास कार्य कराए जाएंगे। इस पर स्मार्ट सिटी मिशन ने 20 लाख के काम मंजूर किए हैं। 31 जुलाई को बोहरा ने इनकी सिफारिश की थी। 15 दिन पहले स्मार्ट सिटी मिशन के कार्यालय पहुंचकर मीटिंग ली, 7 दिन बाद ही टेंडर भी लगा दिए गए। इससे पहले शहरी टूरिज्म की राह आसान करने के बजाए विधानसभा में 13 करोड़ से तो राजभवन में सवा 8 करोड़ से टूरिज्म के नाम पर सौंदर्यीकरण-म्यूजियम आदि के काम पास किए हुए हैं।

6 मंदिरों में पहले से 13 करोड़ के काम, 1 जामा मस्जिद में सवा 2 करोड़ के काम

फरवरी 2020 में त्रिपोलिया बृजनिधि, चौड़ा रास्ता ताड़केश्वर और सिरहड्योढी के कल्किजी मंदिर में तो मार्च 2020 में बड़ी चौपड़ लक्ष्मीनारायण जी, पुरानी बस्ती गोपीनाथजी और गणगौरी बाजार के राधाकिशनजी मंदिर में काम शुरू किए गए हैं। तब स्मार्ट सिटी की अवधारणा के तहत इन ऐतिहासिक मंदिरों में सीमेंट हटाकर भी चूना-सुर्खी के काम हो रहे हैं। जामा-मस्जिद और अब मंदिर के इस कार्य में यह हिदायत पीछे छूट गई है।

‘ओवर’स्मार्ट सिस्टम को देखिए, असल छोड़, सजावटी मुलम्मा
1- गलियों का हश्र:
6.50 करोड़ से पाइप, सीवरेज-ड्रेनेज-नाली मरम्मत के काम होने थे, काम फेल 2 करोड़ की बुकिंग के बाद बंद।

यहां नाम का काम: 19 लाख से गलियों के बाहर 154 जगह नामकरण को सुंदरता से उकेरेंगे।

2- स्मार्ट ट्रैफिक का हाल: चारदीवारी में सिरदर्द बनी ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने का कोई प्लान बना ही नहीं पाए।

और ये कर दिया: 50 लाख से करीब 511 आकर्षक बेरिकेड्स तैयार कराए जा रहे हैं।

3- स्मार्टवर्किंग का हश्र: बिलिंग, बुकिंग, पार्किंग, ट्रैफिक आदि को स्मार्ट तकनीक से जोड़ना था, ताकि हमारा समय बचे और जीवन आसान हो।
और खुद स्मार्ट हुए: 70 लाख रुपए से एक साथ खुद की टीम के लिए नए लैपटॉप की खरीद।

4- स्पीड वर्क का हश्र: बाजारों में दूसरी बार करीब 14 करोड़ रुपए के काम विवादित होकर बंद।
इधर दिखावा चालू: 80 लाख से हेरिटेज निगम में फेस रीकग्निशन मशीन खरीद रहे हैं।

(सभी नए कार्यों के लिए स्मार्ट सिटी ने टेंडर लगा दिए हैं।)

3 सवाल और अध्यक्ष के जवाब-

बीएस देथा, अध्यक्ष, स्मार्ट सिटी मिशन

1. मंदिर-मस्जिद पर फोकस?
- प्रपोजल आए थे, काम कर रहे हैं। अस्पताल भी तो कर रहे।

2. हेरिटेज भी दरकिनार?
- बोर्ड में लेकर पास कर रहे हैं।

3. राजनैतिक स्वार्थ हावी?
-ये भी पब्लिक यूजेज के ही काम हैं।

पब्लिक परेशान होती रहे!
ये प्राचीन मंदिर है। (और भी बहुत?) बाकी में भी देखेंगे। यहां बाहर दर्शनार्थी परेशान होते हैं। पक्के आरसीसी का काम नहीं, केवल शेड-स्टील-फर्श आदि के काम हैं। -रामचरण बोहरा, सांसद

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