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2 महीने में डोटासरा को दूसरा झटका:कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ में नगर पालिका चुनाव में भी पार्टी को बहुमत नहीं, प्रधान चुनाव में भी जोड़तोड़ से हासिल की थी सत्ता

जयपुर10 महीने पहले
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कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा। (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा। (फाइल फोटो)
  • पंचायत समिति प्रधान चुनाव में बीजेपी के एक सदस्य को अयोग्य ठहराने के बाद बराबरी पर आई थी कांग्रेस, फिर लॉटरी से जीत मिली थी

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को दो महीनों में दूसरा झटका लगा है। प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र की नगरपालिका में कांग्रेस अपने बूते पर बोर्ड नहीं बना पाई, कांग्रेस को निर्दलियों का समर्थन लेना पड़ेगा। लक्ष्मणगढ़ में नगरपालिका चुनाव में भी कांग्रेस और बीजेपी बराबर पर हैं। 40 वार्ड वाली लक्ष्मणगढ नगरपालिका में कांग्रेस और बीजेपी ने 14-14 वार्ड जीते हैं, 11 वार्डों में निर्दलीय जीते हैं। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र में नगरपालिका बोर्ड किसका बने यह निर्दलीय तय करेंगे।

दो महीने पहले पंचायत समिति के प्रधान के चुनाव में जोड़तोड़ से लाज बचाने के बाद नगरपालिका चुनाव में भी कांग्रेस को चमत्कार का इंतजार है। दरअसल, दो महीने पहले हुए पंचायत समिति प्रधान के चुनाव में भी कांग्रेस बीजेपी बराबरी पर आए थे लेकिन उस वक्त बीजेपी के एक सदस्य को अयोग्य ठहराने से संख्या बराबर हो गई थी। इसके बाद एक निर्दलीय के सहयोग से लॉटरी के जरिए कांग्रेस जीत पाई।

यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र में भी हारी कांग्रेस
उधर, यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष के निर्वाचन क्षेत्र डूंगरपुर में कांग्रेस हार गई, वहां बीजेपी का बोर्ड बना है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव नतीजों की समीक्षा करके सुधार करने की जरूरत है। अगर उनके खुद के इलाकों में ही पूरा बहुमत नहीं मिला तो बाकी नेताओं को कैसे सुधार के लिए कहेंगे?

रिकॉल : लक्ष्मणगढ में नवजात बच्चे की वजह से बीजेपी से छीन लिया था प्रधान पद
डोटासरा के क्षेत्र लक्ष्मणगढ पंचायत समिति के प्रधान में एक दुधमुंहे नवजात ने बीजेपी का बहुमत आने के बावजूद उससे प्रधानी का पद छीन लिया था। इसका कारण था इस नवजात का बीजेपी के पंचायत समिति सदस्य की तीसरी संतान होना, तीन संतान वाला प्रदेश में पंचायत चुनाव नहीं लड़ सकता। बस इसी प्रावधान से बीजेपी बहुमत होने के बावजूद हार गई और एक निर्दलीय के सहयोग से लॉटरी के जरिए कांग्रेस जीत गई।

बहुमत बीजेपी का लेकिन बराबरी पर आने के तरीके और जीत पर विवाद अब हाईकोर्ट में
प्रधान चुनाव में कांग्रेस के बीजेपी से जीती बाजी खींचकर ले जाने के तरीके पर खूब सियासी विवाद हुआ था। लक्ष्मणगढ पंचायत समिति में कुल 25 पंचायत समिति सदस्य के चुनाव हुए। चुनाव में 13 पंचायत
समि​ति सदस्य बीजेपी, 11 कांग्रेस के और 1 निर्दलीय था। इस तरह बीजेपी को बहुमत था। प्रधान चुनाव से पहले बीजेपी के एक पंचायत समिति सदस्य विजेंद्र जांगिड़ के तीसरी संतान होने का हवाला देते हुए उन्हें वोट डालने से अयोग्य ठहरा दिया। इस पर खूब विवाद हुआ। बीजेपी के एक सदस्य को अयोग्य ठहराते ही पूरा गेम ही बदल गया, बीजेपी का एक सदस्य कम होने से उसका आंकड़ा 12 पर आ गया था।

एक निर्दलीय सदस्य ने कांग्रेस को समर्थन दिया, इस तरह कांग्रेस बीजेपी प्रधान उम्मीदवारों के 12-12 वोट आए। बाद में लॉटरी से प्रधान का फैसला हुआ जो कांग्रेस के पक्ष में गया। हालांकि चुनाव के बाद तीसरी संतान के आधार पर अयोग्य ठहराए गए पंचायत समिति सदस्य विजेंद्र जांगिड़ ने इस मामले को कोर्ट में चुनौती दी, मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। हाईकोर्ट ने अयोग्य ठहराने से खाली हुई सीट पर चुनाव करवाने पर रोक लगा दी है।

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