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दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कांग्रेस के लिए बना सिरदर्द:प्रदेश प्रभारी अजय माकन 28 और 29 सितम्बर को करेंगे राजस्थान दौरा, वल्लभनगर और धरियावाद जाकर टिकट के लिए जानेंगे ग्राउंड रिपोर्ट

जयपुर2 महीने पहले
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दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कीा तैयारी में जुटी कांग्रेस - Dainik Bhaskar
दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कीा तैयारी में जुटी कांग्रेस

राजस्थान की 2 विधानसभा सीटों पर होने वाले उप चुनाव की तैयारियां कांग्रेस ने तेज कर दी हैं। लेकिन उदयपुर की वल्लभनगर और प्रतापगढ़ की धरियावद सीटों पर प्रत्याशियों का चयन करना कांग्रेस के लिए बड़ी माथापच्ची का कारण बन गया है। पीसीसी चीफ, राज्य के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और प्रभारी मंत्रियों, चुनाव के लिए बनाई गई कमेटी से मिले फीडबैक के बाद अब खुद प्रदेश प्रभारी अजय माकन दो दिन के दौरे पर इन उप चुनाव वाले क्षेत्रों में जाकर जमीनी हकीकत जानेंगे। प्रभारी अजय माकन 28 और 29 सितंबर को राजस्थान दौरे पर रहेंगे। मुख्यमंत्री निवास पर सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात करने के बाद अजय माकन और पीसीसी चीफ डोटसरा का वल्लभनगर और धरियावद विधानसभा क्षेत्रों में जाकर वहां के कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं से चर्चा करने का कार्यक्रम है।

कांग्रेस के लिए सिर दर्द बना 2 सीटों पर उपचुनाव

वल्लभनगर से कांग्रेस विधायक रहे गजेन्द्र सिंह शक्तावत और धरियावद से बीजेपी विधायक रहे गौतम मीणा का कोरोना संक्रमण काल में निधन हो जाने से दोनों सीटें खाली हुई हैं। ऐसे में इन सीटों पर सिम्पैथी वोट का फैक्टर हावी है। जिसे भुनाने की तैयारी दोनों ही पार्टियां कर रही हैं। लेकिन एक ओर दिवंगत विधायकों के कई परिजन टिकट मांग रहे हैं, दूसरी ओर पार्टी के कई नेता भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। टिकट नहीं मिलने पर इनमें से कई बागी या निर्दलीय के तौर पर भी ताल ठोक सकते हैं। जिससे पार्टी के समीकरण बिगड़ सकते हैं। इसीलिए ज़मीनी हकीकत जानने और नेताओं की समझाइश के लिए माकन खुद दौरे पर रहेंगे।

वल्लभनगर में सहानुभूति वोट कहीं बंट न जाए

वल्लभनगर से कांग्रेस विधायक रहे स्व. गजेन्द्र शक्तावत की पत्नी प्रीति शक्तावत और उनके बड़े भाई देवेन्द्र सिंह शक्तावत टिकट के बड़े दावेदार हैं। परिवार में सियासी दावेदारी और दो फाड़ पिछले दिनों उस वक्त खुलकर सामने आए, जब नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन रहे देवेन्द्र सिंह शक्तावत ने टिकट की दावेदारी जताते हुए साफ कह दिया था कि अगर मुझे टिकट नहीं दिया,तो मैं निर्दलीय चुनाव लड़ूंगा। वोट बटोरने के लिए इस परिवार की खींचतान पर बीजेपी की भी नजरें हैं, माना जा रहा है जिसका भी टिकट कटा वह बीजेपी के पाले में भी जा सकता है। इस दोनों बड़े दावेदारों के अलावा गजेन्द्र सिंह शक्तावत के भांजे और सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष राज सिंह झाला ने भी अपनी दावेदारी जताई है। शक्तावत परिवार से बाहर भी कांग्रेस से टिकट के लिए दावेदारी हैं, जिनमें पीसीसी सदस्य रह चुके भीम सिंह चूण्ड़ावत और कांग्रेस नेता ओंकार लाल मेनारिया भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। लेकिन वल्लभ नगर सीट पर राजपूत फैक्टर काम करता है। यहां गैर राजपूत का विधायकी का चुनाव जीत पाना मुश्किल नज़र आता है। यहां एसटी वोट ज्यादा है,लेकिन वह परम्परागत तौर पर राजपूत प्रत्याशी को जाता रहा है।

धरियावद सीट पर बीजेपी का गढ़ ढ़हाना बड़ी चुनौती

धरियावाद सीट बीजेपी विधायक रहे गौतमलाल मीणा के निधन से खाली हुई है। ऐसे में बीजेपी इसे अपनी सीट मानकर चल रही है। सहानुभूति फैक्टर के बूते बीजेपी यहां मज़बूती से ताल भी ठोक रही है। स्व. गौतमलाल मीणा के बेटे कन्हैया लाल मीणा यहां से बीजेपी टिकट के सबसे मजबूत दावेदार हैं। कन्हैया लाल मीणा को पूर्व सीएम रहीं वसुंधरा राजे का भी आशीर्वाद माना जाता है। जबकि कांग्रेस में पूर्व विधायक नगराज मीणा इस बार फिर से प्रबल दावेदार हैं। नगराज मीणा पूर्व में यहां से 2 बार चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि 3 बार उनकी हार भी हुई है, जिनमें पिछले 2 विधानसभा चुनाव में लगातार हुई हार शामिल है। कांग्रेस अगर लगातार दो बार चुनाव हार चुके नेता को टिकट नहीं देने के फॉर्मूले पर अमल करती है, तो नगराज मीणा का टिकट कट सकता है। लेकिन फिर वे बागी होकर ताल ठोक सकते हैं,जिससे कांग्रेस के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी हो जाएगी। नगराज मीणा के अलावा नाथूलाल मीणा, केसर भाई उर्फ केबी मीणा और रूपलाल मीणा की भी दावेदारी है। केबी मीणा धरियावद से 2 बार के सरपंच हैं। जबकि रूपलाल मीणा लसाड़िया से 4 बार के सरपंच हैं। ऐसे में धरियावद में बीजेपी के लिए टिकट तय करना आसान है,लेकिन कांग्रेस के लिए यह बेहद मुश्किलों से भरा है।

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